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परम एकादशी 2026: इस विशेष उपाय से प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु, मिलेगा शुभ फल
परमा एकादशी का व्रत इस वर्ष 11 जून 2026 को रखा जाएगा। अधिकमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली यह एकादशी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परम एकादशी हर तीन वर्ष में एक बार आती है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन रेवती नक्षत्र और शोभन योग का संयोग बन रहा है, जो पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ है। ऐसे में भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं।
परम एकादशी पर करें यह विशेष उपाय
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में कुछ विशेष उपाय करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं। पूजा के दौरान केले का भोग लगाएं और तुलसी दल के साथ मिठाई अर्पित करें। इसके पश्चात श्रद्धापूर्वक विष्णु चालीसा का पाठ करें। इस सरल उपाय को करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
विष्णु चालीसा के पाठ के लाभ
- धन और आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बनते हैं।
- व्रत का संपूर्ण और शुभ फल प्राप्त होता है।
- मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।
- कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होने लगती है।
- विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने के संकेत मिलते हैं।
- संतान संबंधी परेशानियों से राहत मिलने की संभावना रहती है।
- घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में उन्नति और सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
विष्णु चालीसा
दोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥
चौपाई
नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥
शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥
आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥
असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥
परमा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
- व्रत तिथि: 11 जून 2026
- उत्तम शुभ मुहूर्त: सुबह 5:23 बजे से 7:07 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:02 बजे से 4:42 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
- लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 12:21 बजे से 2:05 बजे तक
अस्वीकरण: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए कोई उत्तरदायित्व नहीं है।
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