नीट यूजी पुनर्परीक्षा: देरी से पहुंचे अभ्यर्थियों को केंद्रों पर नहीं मिला प्रवेश, फूट-फूटकर रोए छात्र

डॉक्टर बनने का सपना संजोए हजारों छात्रों के लिए नीट यूजी पुनर्परीक्षा का दिन किसी त्रासदी से कम नहीं रहा। देशभर के कई परीक्षा केंद्रों पर ऐसे दृश्य देखने को मिले, जहां मात्र कुछ मिनटों की देरी ने वर्षों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया। एडमिट कार्ड थामे छात्र और उनके परिजन बंद गेटों के सामने बेसुध होकर रोते रहे, लेकिन नियमों की दीवार के आगे उनकी एक न चली।

बेंगलुरु: गेट के सामने गिड़गिड़ाते रहे परीक्षार्थी

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कई छात्र निर्धारित समय के बाद परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। यहां के दृश्य बेहद मार्मिक थे। अभ्यर्थी सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर अंदर जाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी विनती अनसुनी कर दी गई। कुछ छात्र लोहे की सलाखों को पकड़कर फूट-फूटकर रोते दिखे, जबकि कुछ ने गेट के ऊपर या नीचे से अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। यह नजारा किसी का भी दिल पसीज जाने के लिए काफी था।

भोपाल: सड़क दुर्घटना के बाद भी नहीं मिली रियायत

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक विशेष रूप से हृदयविदारक मामला सामने आया। यहां दो अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र पर थोड़ी देर से पहुंचे, और उन्हें प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया गया। एक अभ्यर्थी के चाचा ने बताया कि रास्ते में उनकी एक दुर्घटना हो गई थी, जिसके चलते उन्हें प्राथमिक उपचार कराना पड़ा और इसमें समय लग गया। उन्होंने कहा कि जब वे केंद्र पर पहुंचे, तो प्रशासन का कहना था कि परीक्षा शुरू हो चुकी है और अब किसी भी स्थिति में प्रवेश संभव नहीं है। यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे अप्रत्याशित परिस्थितियां भी बड़ी योजनाओं को बिगाड़ सकती हैं।

दिल्ली: समय पर पहुंचने के बाद भी बंद रहा दरवाजा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी कुछ छात्र परीक्षा से वंचित रह गए। एक छात्रा ने दावा किया कि वह दोपहर 1:30 बजे ही केंद्र पर पहुंच गई थी, फिर भी उसे प्रवेश नहीं दिया गया। उसने बताया कि अधिकारियों ने गेट खोलने से साफ इनकार कर दिया, जिससे वह स्तब्ध रह गई। यह घटना परीक्षा केंद्रों पर लागू सख्त समय सीमा को दर्शाती है, जहां एक मिनट का अंतर भी मायने रखता है।

पिता ने गेट पर पटका सिर, बेटी का सपना हुआ चकनाचूर

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक पिता और उसकी बेटी परीक्षा केंद्र के बाहर बिलखते नजर आ रहे हैं। पिता ने गेट पर अपना सिर पटकते हुए प्रवेश की गुहार लगाई, लेकिन नियमों के आगे उनकी एक न चली। कथित तौर पर परीक्षा केंद्र का गेट दोपहर 1:30 बजे बंद कर दिया गया था, जिसके बाद किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया।

इस छात्रा की पहचान रागिनी विश्वकर्मा के रूप में हुई है। 18 वर्षीय रागिनी कार्डियोलॉजिस्ट बनने का सपना देख रही थी और महीनों से इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही थी। वह एक दिन सफेद कोट पहनकर दिल के मरीजों की जान बचाना चाहती थी, लेकिन रविवार दोपहर को उसका यह सपना तैयारी की कमी से नहीं, बल्कि कुछ मिनटों की देरी से टूट गया।

परीक्षार्थियों के लिए सबक

इन घटनाओं से एक महत्वपूर्ण सीख मिलती है कि किसी भी परीक्षा के दिन समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक से दो घंटे पहले केंद्र पर पहुंचने की योजना बनानी चाहिए। इससे ट्रैफिक, दुर्घटना या किसी अन्य अप्रत्याशित स्थिति से निपटने का समय मिल जाता है। एक छोटी सी चूक वर्षों की मेहनत और सपनों पर भारी पड़ सकती है, इसलिए समय की पाबंदी को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।

  • परीक्षा केंद्र का रास्ता पहले से तय कर लें और वहां पहुंचने में लगने वाले समय का अनुमान लगाएं।
  • यातायात की संभावित समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त समय रखें।
  • अपने सभी आवश्यक दस्तावेज एक रात पहले ही तैयार रखें।
  • किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए परीक्षा केंद्र के लिए जल्दी निकलें।