भारत में ऑनलाइन गेमिंग का बढ़ता खतरा: 8 करोड़ लोग इस लत के शिकार

भारत में ऑनलाइन गेमिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक गंभीर समस्या भी उभर कर सामने आई है। सरकारी साइबर सुरक्षा एजेंसी I4C ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। एजेंसी के अनुसार, देश में 40 करोड़ से अधिक गेमर्स हैं, जिनमें से लगभग 8 करोड़ लोग ऑनलाइन गेमिंग की लत के शिकार हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 24 प्रतिशत की उम्र 24 वर्ष से कम है।

यह समस्या अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहले ही ‘गेमिंग डिसऑर्डर’ को एक मानसिक बीमारी के रूप में मान्यता दे दी है। भारत में बढ़ते मामलों को देखते हुए, समय रहते इस लत को पहचानना और इसका इलाज करना बेहद जरूरी हो गया है।

गेमिंग की लत क्यों लगती है?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च (NIMHANS) की एक रिपोर्ट के अनुसार, गेमिंग एडिक्शन का सीधा संबंध हमारे दिमाग से है। गेम डिजाइन करने वाली कंपनियां अपने गेम्स को इस तरह से बनाती हैं कि खिलाड़ी बार-बार उन्हें खेलने के लिए प्रेरित हो। जब कोई व्यक्ति गेम खेलता है, तो उसके दिमाग से डोपामाइन नामक एक रसायन निकलता है, जो खुशी और संतुष्टि का एहसास कराता है। यही कारण है कि धीरे-धीरे यह आदत एक लत में बदल जाती है।

गेमिंग की लत के लक्षण

ऑनलाइन गेम की लत को पहचानना मुश्किल नहीं है। प्रभावित व्यक्ति के व्यवहार में कुछ स्पष्ट बदलाव देखे जा सकते हैं:

  • व्यक्ति बिना किसी रुकावट के घंटों तक गेम खेलता रहता है।
  • गेम हारने पर वह चिड़चिड़ा हो जाता है या गुस्सा करने लगता है।
  • समय पर खाना नहीं खाता और बार-बार कहने पर भी नहीं सुनता।
  • पढ़ाई या काम में उसका प्रदर्शन गिरने लगता है और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है।

गेमिंग एडिक्शन के गंभीर परिणाम

I4C ने चेतावनी दी है कि गेमिंग की लत के कारण खिलाड़ियों का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। हारने पर वे न केवल गुस्सा करते हैं, बल्कि कई बार खुद को नुकसान भी पहुंचा लेते हैं। अगर परिवार वाले उनसे फोन या गेमिंग डिवाइस लेने की कोशिश करते हैं, तो वे इतने नाराज हो जाते हैं कि आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं। यह स्थिति बेहद गंभीर है और तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

कैसे छुड़ाएं गेमिंग की लत?

बच्चों और युवाओं में गेमिंग की लत को समय रहते पहचानना और उसे दूर करना बहुत जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस लत को अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे कम करना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर कोई बच्चा 4 घंटे गेम खेलता है, तो पहले उसे 3 घंटे तक सीमित करें। उसके बाद धीरे-धीरे समय कम करते जाएं।

बच्चे को खाली बैठने से बचाने के लिए उसे रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करें। ड्राइंग, पेंटिंग, साइकिल चलाना, खेलकूद, संगीत या तैराकी जैसी चीजें सिखाई जा सकती हैं। इससे बच्चे का ध्यान स्मार्टफोन और गेमिंग से हटेगा और वह स्वस्थ विकल्पों की ओर बढ़ेगा।

युवाओं पर बढ़ता खतरा

ई-गेमिंग फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 40 करोड़ से अधिक गेमर्स हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत की उम्र 24 वर्ष से कम है। विभिन्न शोध संस्थानों के अध्ययनों में पाया गया है कि जो युवा रोजाना दो घंटे से अधिक समय गेम खेलने में बिताते हैं, उनमें लत लगने का खतरा सबसे अधिक होता है। ये आंकड़े बताते हैं कि गेमिंग के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जागरूकता फैलाना और समय पर हस्तक्षेप करना कितना आवश्यक है।