भारत का ड्रोन क्षेत्र: 38,500 से अधिक ड्रोन और 40,000 प्रमाणित पायलटों के साथ नई ऊंचाइयां

भारत में ड्रोन तकनीक का विस्तार तेजी से हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में पंजीकृत ड्रोन की संख्या 38,500 को पार कर चुकी है। वहीं, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा प्रमाणित रिमोट पायलटों की संख्या फरवरी 2026 तक 39,890 तक पहुंच गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि ड्रोन अब सिर्फ प्रयोगात्मक चरण में नहीं हैं, बल्कि एक संगठित और प्रशिक्षित ढांचे के तहत काम कर रहे हैं।

प्रशिक्षण संस्थानों का बढ़ता नेटवर्क

ड्रोन संचालन और रखरखाव के लिए देशभर में 240 से अधिक मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र सक्रिय हैं। ये संस्थान युवाओं को रिमोट पायलटिंग और तकनीकी संचालन का प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि कौशल विकास इस क्षेत्र की नींव है। ड्रोन इकोसिस्टम अब सिर्फ उड़ने वाली मशीनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निर्माता, सॉफ्टवेयर डेवलपर, सेवा प्रदाता, स्टार्टअप, शोध संस्थान और डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह पूरी व्यवस्था एक समान नियामक ढांचे के तहत काम कर रही है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो रही हैं।

कृषि से शहरी विकास तक ड्रोन का उपयोग

ड्रोन का उपयोग अब कई क्षेत्रों में बढ़ गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कृषि, भूमि सर्वेक्षण, संपत्ति मूल्यांकन, बुनियादी ढांचे की निगरानी, आपदा प्रबंधन और सरकारी सेवाओं में ड्रोन सक्रिय रूप से इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे काम की सटीकता में सुधार हुआ है और पारदर्शिता बढ़ी है। सरकार की स्वामित्व योजना के तहत अब तक 3.28 लाख गांवों का ड्रोन से सर्वेक्षण किया जा चुका है। इसके अलावा, 31 राज्यों के 1.82 लाख गांवों में 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति अधिकारों को स्पष्टता मिली है।

नमो ड्रोन दीदी: महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल

ड्रोन तकनीक महिलाओं के जीवन में भी बदलाव ला रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महिला स्वयं सहायता समूहों को 1,094 ड्रोन दिए गए हैं। इनमें से 500 से अधिक ड्रोन नमो ड्रोन दीदी पहल के तहत वितरित किए गए हैं। इस पहल से खेती की उत्पादकता बढ़ी है और महिलाओं की आय में सुधार हुआ है। यह कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बुनियादी ढांचे और सुरक्षा में ड्रोन की भूमिका

ड्रोन का उपयोग रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी में भी बढ़ रहा है। इससे रखरखाव का काम तेज और अधिक सटीक हो पाया है। सरकार का मानना है कि स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा, कौशल विकास और केंद्र-राज्य योजनाओं के समन्वय से ड्रोन तकनीक का उपयोग सामाजिक-आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। सरकारी बयान के अनुसार, ड्रोन क्षेत्र अब पायलट प्रोजेक्ट से निकलकर नवाचार-आधारित मुख्यधारा का उद्योग बन चुका है।