देश में 1.02 करोड़ से अधिक शिक्षक: क्या स्कूली शिक्षा में आया बदलाव? रिपोर्ट के अहम संकेत
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी यूडीआईएसई+ 2025-26 रिपोर्ट में देशभर के स्कूलों की स्थिति पर व्यापक जानकारी दी गई है। यह रिपोर्ट बताती है कि शिक्षकों की संख्या, डिजिटल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। छात्र-शिक्षक अनुपात भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मानकों से बेहतर हो गया है। आइए जानते हैं रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष।
शिक्षकों की संख्या में वृद्धि और महिला शिक्षकों की बढ़ती भागीदारी
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देशभर में शिक्षकों की कुल संख्या बढ़कर 1,02,73,020 हो गई है। यह 2022-23 की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है। महिला शिक्षकों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है और अब वे कुल शिक्षकों का 54.9 प्रतिशत हिस्सा हैं। मंत्रालय का मानना है कि इससे स्कूलों में अधिक समावेशी और संवेदनशील शिक्षण वातावरण तैयार होगा। पिछले चार वर्षों में शिक्षकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है:
- 2022-23: 94,83,294
- 2023-24: 98,07,600
- 2024-25: 1,01,22,420
- 2025-26: 1,02,73,020
छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार, NEP मानकों से बेहतर प्रदर्शन
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश का प्यूपिल-टीचर रेशियो (PTR) राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्धारित 30:1 अनुपात से बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। विभिन्न शिक्षा स्तरों पर PTR इस प्रकार दर्ज किया गया है:
- फाउंडेशनल: 10:1
- प्रिपरेटरी: 12:1
- मिडिल: 17:1
- सेकेंडरी: 21:1
बेहतर छात्र-शिक्षक अनुपात का असर विद्यार्थियों की शिक्षा जारी रखने पर भी दिखाई दिया है। फाउंडेशनल से प्रिपरेटरी स्तर पर जाने की संक्रमण दर (Transition Rate) 99.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि मिडिल से सेकेंडरी स्तर पर यह दर बढ़कर 88.3 प्रतिशत दर्ज की गई है।
ड्रॉपआउट दर में कमी और नामांकन में वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर में गिरावट आई है। यह दर पिछले वर्ष के 8.2 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रह गई है। इसी अवधि में सेकेंडरी स्तर का सकल नामांकन अनुपात (GER) 68.5 प्रतिशत से बढ़कर 71.7 प्रतिशत हो गया है। सेकेंडरी स्तर पर छात्रों का रिटेंशन रेट भी 47.2 प्रतिशत से बढ़कर 51.9 प्रतिशत दर्ज किया गया है। मंत्रालय ने इसका प्रमुख कारण माध्यमिक स्तर के स्कूलों की संख्या और उनकी उपलब्धता में वृद्धि को बताया है।
डिजिटल शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में सुधार
डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार:
- 69.9 प्रतिशत स्कूलों में अब कंप्यूटर उपलब्ध हैं, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 64.7 प्रतिशत था।
- 67.4 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध हो चुकी है।
यह वृद्धि डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही, स्कूलों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता भी लगभग सार्वभौमिक स्तर तक पहुंच गई है:
- 99.5 प्रतिशत स्कूलों में सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था है।
- 98.5 प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय उपलब्ध हैं।
- 58.2 प्रतिशत स्कूलों में दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधा के लिए रैंप और हैंडरेल की व्यवस्था की गई है।
एकल शिक्षक और शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या में कमी
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि यूडीआईएसई+ डेटा का उपयोग कर शिक्षकों की तैनाती को अधिक प्रभावी बनाया गया है। इसके परिणामस्वरूप, सिर्फ एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में 3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा, जीरो एनरोलमेंट (जहां कोई छात्र नामांकित नहीं था) वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 29 प्रतिशत की कमी आई है। मंत्रालय का कहना है कि इससे शिक्षा संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्कूल प्रबंधन की दक्षता में सुधार हुआ है। पिछले चार वर्षों में इन आंकड़ों में लगातार सुधार देखा गया है:
- एकल शिक्षक वाले स्कूल: 2022-23 में 1,18,190 से घटकर 2025-26 में 1,00,843
- शून्य नामांकन वाले स्कूल: 2022-23 में 10,294 से घटकर 2025-26 में 5,663