ऑरेकल के संस्थापक ने ChatGPT और Gemini में एक जैसी कमजोरी बताई

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक नई बहस छिड़ गई है। ऑरेकल के सह-संस्थापक और मुख्य तकनीकी अधिकारी लैरी एलिसन ने एआई मॉडल्स की एक बुनियादी कमजोरी को उजागर किया है। उनके अनुसार, चैटजीपीटी, जेमिनी और लामा जैसे सभी प्रमुख एआई मॉडल एक ही स्रोत से प्रशिक्षित हो रहे हैं। यह स्रोत इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक डेटा है। एलिसन का मानना है कि इस वजह से ये सभी मॉडल तेजी से एक-दूसरे के समान होते जा रहे हैं।

एक ही डेटा से सीखने की समस्या

लैरी एलिसन ने अपनी बात को बहुत स्पष्ट रूप से रखा। उन्होंने कहा कि भले ही कंपनियां अपने एआई मॉडल को बेहतर बताने का दावा कर रही हों, लेकिन हकीकत यह है कि सभी मॉडल इंटरनेट के खुले डेटा पर ही निर्भर हैं। इसका मतलब यह है कि इन सभी मॉडलों की जानकारी का आधार एक जैसा है। जब सभी प्रतिस्पर्धी एक ही किताबों और वेबसाइटों से सीख रहे हैं, तो उनमें कोई बड़ा अंतर रहना मुश्किल है। एलिसन ने ऑरेकल की अर्निंग्स कॉल में यह बात कही और बताया कि एआई मॉडल बनाना अब एक सामान्य तकनीक बनती जा रही है।

असली प्रतिस्पर्धा निजी डेटा में

तो फिर एआई की दौड़ में जीत कैसे संभव होगी? एलिसन के अनुसार, इसका जवाब निजी डेटा में छिपा है। उनका कहना है कि अब असली मुकाबला बेहतर मॉडल बनाने का नहीं, बल्कि एआई को निजी और गोपनीय डेटा से जोड़ने का होगा। उदाहरण के लिए, किसी अस्पताल के मरीजों का रिकॉर्ड या किसी कंपनी की बिक्री रिपोर्ट। यह वह डेटा है जो इंटरनेट पर मौजूद नहीं है। जो एआई मॉडल इस निजी जानकारी को सुरक्षित रखते हुए इस्तेमाल कर पाएगा, वही इस प्रतिस्पर्धा में आगे रहेगा। ऑरेकल इसी रणनीति पर काम कर रहा है और उसने अपने निवेश का अनुमान 35 अरब डॉलर से बढ़ाकर 50 अरब डॉलर कर दिया है।

ऑरेकल की तैयारी और रणनीति

ऑरेकल के पास इस मामले में एक बड़ा फायदा है। दुनिया की अधिकांश बड़ी कंपनियों का डेटा पहले से ही ऑरेकल के डेटाबेस में सुरक्षित है। कंपनी एक विशेष तकनीक का उपयोग कर रही है जिसे ‘रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जनरेशन’ या RAG कहा जाता है। यह तकनीक एआई को कंपनियों की निजी फाइलों में से सटीक जवाब ढूंढने में मदद करती है, वह भी सुरक्षा से समझौता किए बिना। इसके अलावा, ऑरेकल ने अपनी एआई क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। कंपनी ने एएमडी के 50,000 जीपीयू वाले सुपरक्लस्टर और एनवीडिया के लाखों जीपीयू से जुड़ने वाले जेटास्केल सुपरकंप्यूटर की घोषणा की है। पिछले साल के अंत तक ऑरेकल का क्लाउड बिजनेस 500 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जो एआई की बढ़ती मांग को दिखाता है।

प्रतिस्पर्धा और आने वाली चुनौतियां

लैरी एलिसन की इस सोच के सामने कई चुनौतियां भी हैं। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां भी एंटरप्राइज एआई क्षमताओं को विकसित करने में जुटी हैं। ये कंपनियां भी अपने-अपने क्लाउड प्लेटफॉर्म पर निजी डेटा को एआई से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। इसके अलावा, ‘सिंथेटिक डेटा’ यानी मशीनों द्वारा बनाए गए डेटा के आने से निजी डेटा पर निर्भरता कम भी हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ऑरेकल का अपने डेटाबेस पर मजबूत नियंत्रण उसे इस प्रतिस्पर्धा में जीत दिलाता है या एआई की दिशा किसी नए मोड़ पर चली जाती है। फिलहाल, एआई की दुनिया में असली लड़ाई अब इंटरनेट के खुले डेटा से हटकर कंपनियों के बंद कमरों में रखे निजी डेटा तक पहुंचने की हो गई है।