एक राष्ट्र एक सदस्यता योजना: शोध के क्षेत्र में बड़ी छलांग
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘एक राष्ट्र एक सदस्यता’ (ONOS) योजना ने अपने पहले वर्ष में ही अकादमिक जगत में एक मिसाल कायम कर दी है। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच देशभर के छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों ने 11.3 करोड़ से अधिक शोध लेख डाउनलोड किए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस पहल ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में कितना बड़ा बदलाव ला दिया है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों और केंद्रीय शोध संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं तक मुफ्त पहुंच प्रदान की जा रही है।
योजना का विस्तार और उद्देश्य
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवंबर 2024 में इस योजना को मंजूरी दी थी, जिसे 1 जनवरी 2025 से लागू किया गया। इसके संचालन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के इनफ्लिबनेट केंद्र को सौंपी गई है। तीन वर्षों (2025-2027) के लिए 6,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य देशभर के सरकारी शैक्षणिक और शोध संस्थानों को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों के जर्नल तक निःशुल्क पहुंच उपलब्ध कराना है। इस प्रक्रिया को सरल बनाते हुए सरकार सीधे प्रकाशकों को भुगतान करती है, जिससे संस्थानों पर सदस्यता शुल्क का बोझ नहीं पड़ता।
शोध संसाधनों में अभूतपूर्व वृद्धि
ONOS योजना के आने से पहले, विभिन्न मंत्रालयों के तहत 10 अलग-अलग जर्नल कंसोर्टियम काम कर रहे थे, जिनसे लगभग 8,000 जर्नल उपलब्ध थे। अब इस योजना के तहत यह संख्या बढ़कर 13,000 से अधिक हो गई है। लाभार्थियों की संख्या भी 55 लाख से बढ़कर लगभग एक करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं, इसमें भाग लेने वाले संस्थानों की संख्या 2,300 से बढ़कर लगभग 5,800 हो गई है। यह योजना 30 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों के विशाल संग्रह तक पहुंच प्रदान करती है, जिससे देशभर के छात्र और शोधकर्ता लाभान्वित हो रहे हैं।
शीर्ष संस्थान और डाउनलोड आंकड़े
शोध लेख डाउनलोड करने के मामले में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास ने 40.3 लाख डाउनलोड के साथ पहला स्थान हासिल किया है। इसके बाद भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलूरू 28.3 लाख डाउनलोड के साथ दूसरे स्थान पर है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (15.3 लाख) और दिल्ली विश्वविद्यालय (14.2 लाख) प्रमुख उपयोगकर्ता रहे। राज्य विश्वविद्यालयों में अन्ना विश्वविद्यालय ने 7.8 लाख डाउनलोड के साथ बाजी मारी। इसके अलावा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने भी बड़ी संख्या में डाउनलोड दर्ज किए हैं।
प्रकाशक और डिजिटल प्लेटफॉर्म
इस मंच पर हर महीने लगभग एक करोड़ लेख डाउनलोड हो रहे हैं। यह सुविधा एल्सेवियर, स्प्रिंगर नेचर, विली, टेलर एंड फ्रांसिस, आईईईई, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस जैसे 30 प्रमुख प्रकाशकों के जर्नल तक पहुंच प्रदान करती है। यह पूरी प्रक्रिया एक केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से संचालित होती है, जिसे सूचना और पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र द्वारा प्रबंधित किया जाता है। शोधकर्ता संस्थागत लॉग-इन या आईपी आधारित पहुंच के जरिए इन जर्नल और लेखों को पढ़ सकते हैं।
अतिरिक्त सुविधाएं और भविष्य की संभावनाएं
यह पहल केवल पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि शोधकर्ताओं को लेख प्रकाशन शुल्क (APC) में भी सहायता प्रदान करती है। इसके तहत 430 से अधिक गोल्ड ओपन-एक्सेस जर्नल में प्रकाशन की सुविधा दी जाती है, जहां प्रकाशित शोध लेख बिना किसी शुल्क के पाठकों के लिए तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह योजना टियर-2 और टियर-3 शहरों के शोधकर्ताओं को भी वैश्विक शोध सामग्री तक पहुंच प्रदान करके देश में वैज्ञानिक और बहु-विषयक अनुसंधान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।