फिटनेस के चक्कर में कहीं आप अपने शरीर को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे?
शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए संतुलित आहार से मिलने वाले पोषक तत्व बेहद जरूरी होते हैं। लेकिन आजकल लोगों की बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों के कारण शरीर में कई विटामिन और मिनरल्स की कमी देखी जा रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए लोग बिना डॉक्टरी सलाह के ही तरह-तरह के सप्लीमेंट्स लेने लगते हैं। सोशल मीडिया पर फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स भी लगातार यही संदेश देते हैं कि हर किसी को किसी न किसी सप्लीमेंट की जरूरत है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? क्या ये गोलियां शरीर को फायदा पहुंचा रही हैं या फिर चुपचाप नुकसान कर रही हैं?
सप्लीमेंट्स: जरूरत है या सिर्फ एक ट्रेंड?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, सप्लीमेंट्स का सेवन केवल उन लोगों को करना चाहिए जिनमें किसी विशेष पोषक तत्व की कमी पाई गई हो। यह कमी उम्र बढ़ने, किसी बीमारी या विशेष खानपान के कारण हो सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर ही सही मात्रा और प्रकार का सप्लीमेंट सुझाते हैं। लेकिन जब लोग बिना किसी जांच के खुद से इनका सेवन शुरू कर देते हैं, तो यह फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। शरीर को हर पोषक तत्व की एक निश्चित मात्रा की जरूरत होती है। जरूरत से ज्यादा विटामिन और मिनरल शरीर में जमा होकर विषैला प्रभाव डाल सकते हैं।
अपने आप सप्लीमेंट लेना क्यों है खतरनाक?
डॉक्टरों का मानना है कि बिना मेडिकल जांच या डॉक्टरी सलाह के लंबे समय तक सप्लीमेंट्स लेना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। कई बार ये सप्लीमेंट्स अन्य दवाओं के साथ प्रतिक्रिया करके उनके असर को बदल देते हैं। उदाहरण के लिए, विटामिन K रक्त पतला करने वाली दवाओं के प्रभाव को प्रभावित कर सकता है, जबकि कुछ मिनरल्स एंटीबायोटिक दवाओं के अवशोषण को कम कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार ही पोषण का सबसे अच्छा स्रोत है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और दूध-अंडा जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य जरूरी यौगिक आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं। इसलिए पोषण की पूर्ति के लिए गोलियों पर निर्भर रहना सही नहीं है।
कैल्शियम सप्लीमेंट्स: हड्डियों की मजबूती या किडनी पर बोझ?
कैल्शियम हड्डियों और दांतों के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी अधिकता गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। यदि आप अपनी डाइट से पहले से ही पर्याप्त कैल्शियम ले रहे हैं, तो हाई-डोज सप्लीमेंट लेना किडनी स्टोन के खतरे को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, अधिक कैल्शियम लेने से कब्ज, पेट फूलना और रक्त में कैल्शियम के स्तर में वृद्धि जैसी समस्याएं हो सकती हैं। रक्त में कैल्शियम का बढ़ा हुआ स्तर (हाइपरकैल्सीमिया) मांसपेशियों में कमजोरी, उल्टी और हृदय की धड़कन में बदलाव का कारण बन सकता है। कैल्शियम सप्लीमेंट आयरन, जिंक और कुछ एंटीबायोटिक दवाओं के अवशोषण को भी प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए इन्हें अन्य दवाओं से अलग समय पर लेना चाहिए।
विटामिन डी: धूप की कमी या जहर का डोज?
भारत समेत दुनिया भर में विटामिन डी की कमी एक आम समस्या बन गई है। यह विटामिन कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन इसकी अधिकता भी उतनी ही खतरनाक हो सकती है। अत्यधिक विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के स्तर को असामान्य रूप से बढ़ा सकता है, जिससे किडनी में पथरी, किडनी डैमेज, बार-बार पेशाब आना और मानसिक भ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए विटामिन डी सप्लीमेंट भी डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए।
आयरन सप्लीमेंट: एनीमिया का इलाज या लिवर पर बोझ?
आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी मिनरल है। इसकी कमी से एनीमिया हो सकता है, जिसके लिए डॉक्टर आयरन सप्लीमेंट देते हैं। लेकिन जिन लोगों में आयरन की कमी नहीं है, उनके लिए अतिरिक्त आयरन लेना नुकसानदायक हो सकता है। हाई-डोज आयरन लेने से कब्ज, पेट दर्द, मतली, उल्टी और काले रंग का मल जैसी समस्याएं आम हैं। इससे भी बड़ा खतरा यह है कि लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा आयरन लेने पर यह लिवर, हृदय और अन्य अंगों में जमा हो सकता है, जिससे गंभीर नुकसान हो सकता है।
यह स्पष्ट है कि सप्लीमेंट्स का सेवन एक गंभीर मामला है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। किसी भी सप्लीमेंट को लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना और अपनी शारीरिक जरूरतों को समझना बेहद जरूरी है। प्राकृतिक आहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर ही हम लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।