नॉर्वे का बड़ा कदम: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की तैयारी
दुनिया भर में सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए कई सरकारें अब बच्चों को इससे बचाने के लिए सख्त कानून बना रही हैं। इसी कड़ी में नॉर्वे ने भी एक ऐतिहासिक फैसला लेने की घोषणा की है। नॉर्वे सरकार 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जा रही है। इसके लिए वर्ष 2026 के अंत तक संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा। इस कानून की सबसे अहम बात यह होगी कि उम्र के सत्यापन की पूरी जिम्मेदारी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर होगी।
क्यों जरूरी है यह प्रतिबंध?
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गहर स्टोर ने इस फैसले के पीछे की वजह साफ की है। उनके अनुसार, बच्चों का बचपन स्क्रीन और एल्गोरिदम के हवाले नहीं किया जा सकता। उनका खेल-कूद, दोस्ती और रोजमर्रा की जिंदगी डिजिटल दुनिया की लत से प्रभावित हो रही है। सरकार चाहती है कि बच्चे अपने वास्तविक जीवन में खुश रहें और सोशल मीडिया के नुकसानदेह कंटेंट से सुरक्षित रहें। यह कानून बच्चों के डिजिटल जीवन को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बहुत जरूरी कदम माना जा रहा है।
किन ऐप्स पर लागू होगा यह नियम?
नॉर्वे की लेबर सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर उन ऐप्स की सूची जारी नहीं की है, जिन पर यह प्रतिबंध लागू होगा। हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि इसमें इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिकटॉक, स्नैपचैट और एक्स जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। कानून बनने के बाद कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 16 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न कर सके।
ऑस्ट्रेलिया से शुरू हुआ वैश्विक रुझान
बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध की यह लहर ऑस्ट्रेलिया से शुरू हुई थी। दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बना, जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। इस प्रतिबंध के दायरे में मेटा के ऐप्स (इंस्टाग्राम और फेसबुक), टिकटॉक, स्नैपचैट, यूट्यूब और एक्स शामिल हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा, जो 270 करोड़ रुपये तक हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया के इस कदम के बाद अब नॉर्वे समेत कई यूरोपीय देश इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
दुनिया के अन्य देशों में लागू या प्रस्तावित नियम
बच्चों को सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए कई देशों ने सख्त कानून बनाए हैं या बनाने की योजना बना रहे हैं। यहां प्रमुख देशों की स्थिति का विवरण दिया गया है:
- फ्रांस: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य कर दी गई है। सरकार पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रही है।
- ग्रीस: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध की घोषणा कर दी गई है, जो जनवरी 2027 से लागू होगा।
- इंडोनेशिया और मलेशिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कई पाबंदियां और प्रतिबंध लागू किए जा चुके हैं।
- तुर्किये: 15 साल से कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच रोकने के लिए संसद में विधेयक पारित कर दिया गया है।
- स्पेन और डेनमार्क: स्पेन (16 साल) और डेनमार्क (15 साल) की सरकारें बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही हैं।
- पोलैंड: 15 और 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सख्त कानून लाने पर विचार किया जा रहा है।
- ब्रिटेन: ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध लगाने की योजना पर विचार चल रहा है।
- अमेरिका: वर्जीनिया और यूटा जैसे कई राज्यों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया फीचर्स को सीमित करने और उम्र की जांच के नियम लागू कर दिए गए हैं।
- चीन: यहां बच्चों के स्क्रीन टाइम और कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष ‘माइनर मोड’ लागू किया गया है।
सोशल मीडिया के नए नियम कैसे काम करेंगे?
दुनिया भर की सरकारें बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए तीन मुख्य तरीकों पर काम कर रही हैं। ये तरीके तकनीक और सख्त नियमों पर आधारित हैं:
उम्र की पक्की जांच (एज वेरिफिकेशन): अब केवल ‘मेरी उम्र 18 साल है’ वाले बॉक्स पर टिक करना पर्याप्त नहीं होगा। फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और इटली जैसे देश उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें सरकारी आईडी कार्ड मांगना, चेहरा पहचानने वाली तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से उम्र का अनुमान लगाना शामिल है।
माता-पिता की सहमति अनिवार्य: 13 से 15 साल तक के बच्चों के लिए सिर्फ उम्र की जांच काफी नहीं मानी जा रही है। फ्रांस और पुर्तगाल जैसे देशों में यह नियम बनाया गया है कि इस आयु वर्ग के बच्चे बिना अपने माता-पिता की ऑनलाइन मंजूरी के सोशल मीडिया अकाउंट नहीं बना सकेंगे।
कंपनियों की जिम्मेदारी तय: अब बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ माता-पिता की नहीं है, बल्कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसी कंपनियों की भी है। उन्हें यह सुनिश्चित करना ही होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर छोटे बच्चे न आएं। अगर कंपनियां ऐसा करने में विफल रहती हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया में यह जुर्माना 270 करोड़ रुपये तक हो सकता है।
नॉर्वे का यह कदम न केवल बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए है, बल्कि यह दुनिया भर के देशों के लिए एक मिसाल भी बन सकता है। आने वाले समय में और अधिक देश इस तरह के सख्त कानून लागू कर सकते हैं।