एनआईटी राउरकेला का अभिनव पेटेंट: चाल-आधारित घुसपैठ पहचान प्रणाली

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), राउरकेला के शोधकर्ताओं ने सुरक्षा क्षेत्र में एक नया आयाम जोड़ा है। उन्होंने एक ऐसी स्वचालित प्रणाली विकसित की है जो व्यक्तियों की चाल यानी चलने के पैटर्न के आधार पर प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसपैठियों की पहचान कर सकती है, जिसके लिए उन्हें पेटेंट भी प्राप्त हुआ है। यह तकनीक विशेष रूप से बड़े और जटिल भवनों में सुरक्षा चुनौतियों को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

यह प्रणाली थर्मल इमेजिंग और चाल पहचान (गेट रिकॉग्निशन) तकनीकों के सम्मिलन पर आधारित है। इसे अगली पीढ़ी का सुरक्षा समाधान माना जा रहा है, जो अनधिकृत प्रवेश पर निगरानी को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाता है। पारंपरिक सीसीटीवी कैमरों के विपरीत, जिनमें लगातार मैन्युअल निगरानी की आवश्यकता होती है और वे मानवीय त्रुटियों के प्रति संवेदनशील होते हैं, यह नई प्रणाली पूरी तरह से स्वचालित है और बिना किसी शारीरिक संपर्क के काम करती है।

कैसे काम करता है यह स्मार्ट सिस्टम?

इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर समित अरी ने बताया कि बड़े सेटअप में कई कैमरों के माध्यम से व्यक्तियों को ट्रैक करना अक्सर मुश्किल होता है, खासकर बदलती रोशनी और बाधाओं की स्थिति में। इस सीमा को दूर करने के लिए टीम ने एक पूर्णतः स्वचालित और गैर-घुसपैठ प्रणाली विकसित की है।

  • थर्मल इमेजिंग का उपयोग: यह प्रणाली कम इन्फ्रारेड शोर के कारण पृष्ठभूमि से मनुष्यों को अलग पहचानने में सक्षम है। यह अपर्याप्त रोशनी या पूर्ण अंधकार में भी सटीक पहचान सुनिश्चित करती है।
  • चाल एक बायोमेट्रिक पहचानकर्ता के रूप में: शोध दल ने मानव चाल को एक अद्वितीय बायोमेट्रिक पहचानकर्ता के रूप में इस्तेमाल किया। हर व्यक्ति के चलने का तरीका अलग होता है, ठीक उसके फिंगरप्रिंट या चेहरे की तरह। सिस्टम इसी पैटर्न को पहचानता है।
  • पहचान और अलर्ट प्रक्रिया: जब कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो सिस्टम उसकी चाल की तुलना अधिकृत व्यक्तियों के डेटाबेस से करता है। यदि कोई मेल नहीं मिलता है, तो सिस्टम स्वचालित रूप से उसे संदिग्ध मानकर सुरक्षाकर्मियों को सूचित करता है।

इसे साकार करने के लिए, टीम ने एक कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित किया है जिसमें तीन थर्मल कैमरे शामिल हैं, जो एक केंद्रीय सर्वर से जुड़े हैं।

रात्रिकालीन और चुनौतीपूर्ण वातावरण में कार्यक्षमता

इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसकी रात्रिकालीन और कम दृश्यता की स्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता है। चूंकि यह थर्मल इमेजिंग पर निर्भर करती है, इसलिए रोशनी की कमी इसकी सटीकता को प्रभावित नहीं करती। यह इसे चुनौतीपूर्ण वातावरण जैसे घने जंगलों, रात के समय सुरक्षा अभियानों या बिजली की अनुपलब्धता वाले क्षेत्रों के लिए आदर्श बनाती है।

व्यापक अनुप्रयोग और भविष्य की संभावनाएं

प्रोफेसर अरी के अनुसार, इस तकनीक के कई क्षेत्रों में व्यापक अनुप्रयोग हैं:

  • शैक्षणिक और कॉर्पोरेट परिसर: विश्वविद्यालयों और कंपनियों के बड़े परिसरों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए।
  • रक्षा और उच्च सुरक्षा व्यवस्थाएं: सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी कार्यालयों में जहां विश्वसनीय पहचान महत्वपूर्ण है।
  • औद्योगिक और अनुसंधान सुविधाएं: संवेदनशील प्रयोगशालाओं और औद्योगिक इकाइयों में अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए।

यह प्रणाली न केवल मैन्युअल निगरानी पर निर्भरता को कम करती है, बल्कि परिचालन दक्षता में भी सुधार करती है। यह खतरों का तेजी से और अधिक सटीक पता लगाने में सहायक है, जिससे सुरक्षाकर्मी संभावित जोखिमों पर समय पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त, संग्रहीत चाल डेटा भविष्य में फोरेंसिक जांच के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है, जिससे सुरक्षा विश्लेषण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। यह नवाचार सुरक्षा प्रौद्योगिकी में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पारंपरिक निगरानी प्रणालियों की सीमाओं को पार करता है।