निर्जला एकादशी 2026: 25 या 26 जून को रखा जाएगा व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और सही तारीख

साल भर में आने वाली सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। यह व्रत ज्येष्ठ माह में आता है, जो वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। बिना अन्न और जल के यह उपवास रखना कठिन माना जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके अद्भुत लाभ हैं। श्रद्धा और नियम से इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मकता आती है। भगवान विष्णु की कृपा से सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। यह उपवास संयम, धैर्य और आध्यात्मिक उन्नति को बढ़ाने वाला माना गया है। साल 2026 में निर्जला एकादशी की तारीख को लेकर लोगों के मन में भ्रम है। आइए, स्पष्ट करते हैं कि यह व्रत किस दिन रखा जाएगा।

निर्जला एकादशी 2026: सही तारीख

इस वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून 2026 को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 25 जून 2026 को रात 8 बजकर 9 मिनट पर होगा। चूंकि एकादशी तिथि का उदयकाल 25 जून को प्राप्त हो रहा है, इसलिए उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

व्रत पारण का समय

निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण अगले दिन 26 जून 2026 को सुबह 5:25 बजे से 8:13 बजे तक किया जा सकता है। इसी समय अवधि में व्रत खोलना शुभ माना जाएगा।

निर्जला एकादशी 2026 पर शुभ संयोग

इस वर्ष निर्जला एकादशी का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस तिथि पर गुरुवार का संयोग है। साथ ही, स्वाति नक्षत्र, शिव और सिद्ध योग का साया रहेगा। ज्योतिष दृष्टि से लक्ष्मी-नारायण योग का निर्माण भी हो रहा है। मान्यता है कि इन शुभ संयोगों में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

निर्जला एकादशी पूजा विधि

  • पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • भगवान को पीले पुष्प, तुलसी दल, फल, पीली वस्तु और पीले रंग की मिठाई अर्पित करें।
  • इस दौरान केला और गुड़ का भोग लगाएं। साथ में चने की दाल भी रखें।
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार श्रद्धापूर्वक जाप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और घी का दीया जलाएं।
  • सायंकाल दीपदान करें और भजन-कीर्तन में समय बिताएं।
  • अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें। जरूरतमंदों को जल से भरा कलश, फल और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। प्रस्तुत सूचना और तथ्यों की सटीकता और संपूर्णता के लिए कोई दावा नहीं किया जाता।