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निपाह और डेंगू में अंतर: आम भ्रांतियां और सटीक जानकारी

केरल में इस समय कई संक्रामक बीमारियां एक साथ सक्रिय हैं। शिगेला, वेस्ट नाइल बुखार और निपाह के संदिग्ध मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। निपाह को अत्यधिक घातक माना जाता है, जिसकी मृत्यु दर 75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या निपाह भी डेंगू की तरह मच्छरों से फैलता है? दोनों बीमारियों के प्रति सावधानी बरतने के लिए इनके अंतर को समझना जरूरी है।

निपाह और डेंगू: दो अलग-अलग संक्रमण

चिकित्सा रिपोर्टों के अनुसार, निपाह और डेंगू को अक्सर एक समान समझ लिया जाता है, जबकि ये पूरी तरह से भिन्न बीमारियां हैं। डेंगू का प्रसार मच्छरों के काटने से होता है, जबकि निपाह का प्राकृतिक स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ हैं। डेंगू आमतौर पर रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या को कम करता है, वहीं निपाह मस्तिष्क और श्वसन प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। निपाह की घातकता डेंगू की तुलना में कहीं अधिक है।

दोनों बीमारियों के फैलने का तरीका

डेंगू वायरस संक्रमित एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। इसके विपरीत, निपाह वायरस मच्छरों से नहीं फैलता। निपाह संक्रमित जानवरों, दूषित फलों या संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से फैल सकता है। इसलिए निपाह को मच्छर जनित रोग नहीं माना जाना चाहिए।

लक्षणों में समानता और अंतर

दोनों ही बीमारियों के शुरुआती लक्षण कुछ हद तक मिलते-जुलते हो सकते हैं, जैसे बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द। हालांकि, कुछ विशिष्ट लक्षण इन्हें अलग पहचान देते हैं:

  • डेंगू: तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते और प्लेटलेट्स की कमी इसके मुख्य लक्षण हैं।
  • निपाह: गंभीर सिरदर्द, सांस लेने में कठिनाई, मानसिक भ्रम, बेहोशी और मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) इस संक्रमण में अधिक देखे जाते हैं।

संक्रमण का प्रसार: एक व्यक्ति से दूसरे तक

डेंगू आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता। इसके लिए संक्रमित मच्छर का होना जरूरी है। वहीं, निपाह वायरस कुछ परिस्थितियों में एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में फैल सकता है। यही कारण है कि निपाह के प्रकोप के दौरान संक्रमित मरीजों को अलग रखना और संक्रमण नियंत्रण के उपाय बेहद जरूरी हो जाते हैं।

बचाव के उपाय

डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों पर नियंत्रण सबसे प्रभावी तरीका है। आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करना आवश्यक है। निपाह से बचने के लिए दूषित या आधे खाए फलों और कच्चे खजूर के रस से दूरी बनानी चाहिए। बीमार जानवरों से संपर्क न करना और संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करते समय विशेष सावधानी बरतना भी इससे बचाव के महत्वपूर्ण उपाय हैं।

नोट: यह लेख चिकित्सा रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

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