नए स्मार्टफोन की परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए तुरंत बदलें ये सेटिंग्स
नया स्मार्टफोन खरीदने के बाद अक्सर लोग जल्दबाजी में उसे सेट कर लेते हैं और डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स के साथ ही इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि कुछ ही महीनों में फोन की स्पीड और बैटरी लाइफ पर असर पड़ने लगता है। असल में, फोन कंपनियां डिवाइस को ऐसी सेटिंग्स पर रखती हैं जो बैटरी बचाने पर केंद्रित होती हैं, न कि बेहतरीन प्रदर्शन देने पर। इस वजह से एक शक्तिशाली प्रोसेसर और उच्च गुणवत्ता वाली डिस्प्ले होने के बावजूद आप फोन की असली क्षमता का केवल 60-70 प्रतिशत ही इस्तेमाल कर पाते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका नया फोन हमेशा तेज़ और स्मूद चले, तो कुछ ज़रूरी सेटिंग्स को तुरंत बदलना जरूरी है।
जेस्चर नेविगेशन से फोन को बनाएं और स्मूद
नया फोन सेट करते समय आपको थ्री-बटन नेविगेशन और जेस्चर नेविगेशन में से एक चुनने का विकल्प मिलता है। पुरानी आदत के कारण ज़्यादातर लोग थ्री-बटन लेआउट चुन लेते हैं, लेकिन अगर आप फोन को तेज़ और आसानी से इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो जेस्चर नेविगेशन बेहतर विकल्प है। इससे स्क्रीन के नीचे तीन बटनों की जगह नहीं घेरती और आप स्वाइप जेस्चर से फोन को कंट्रोल कर सकते हैं। किनारों से स्वाइप करके पीछे जाना, नीचे से ऊपर स्वाइप करके हाल के ऐप्स देखना और ऊपर से नीचे स्वाइप करके क्विक सेटिंग्स खोलना — ये सभी क्रियाएं फोन को ज़्यादा स्मूद बनाती हैं। इसके लिए सेटिंग्स में जाएं, फिर सिस्टम या जेस्चर के ऑप्शन पर क्लिक करें और सिस्टम नेविगेशन में जाकर जेस्चर नेविगेशन को चुन लें।
अनावश्यक प्री-इंस्टॉल ऐप्स को हटाएं
नया फोन खरीदने पर कई ऐसे ऐप्स पहले से इंस्टॉल होते हैं जिनकी ज़्यादातर लोगों को ज़रूरत नहीं होती। सेटअप के दौरान इन्हें इंस्टॉल न करने का विकल्प मिलता है, लेकिन लोग अक्सर इसे नज़रअंदाज कर देते हैं। ये अनावश्यक ऐप्स बैकग्राउंड में चलकर प्रोसेसर और रैम पर लोड डालते हैं, जिससे फोन धीमा होने लगता है और बैटरी भी जल्दी खत्म होती है। इसलिए फोन सेट करने के बाद सबसे पहले उन ऐप्स को अनइंस्टॉल या डिसेबल कर दें, जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते। इससे फोन हल्का रहेगा और परफॉर्मेंस में साफ सुधार दिखेगा।
डिस्प्ले रिफ्रेश रेट को हाई पर सेट करें
आजकल ज़्यादातर स्मार्टफोन में 90Hz, 120Hz या उससे अधिक हाई रिफ्रेश रेट वाली डिस्प्ले मिलती है, लेकिन डिफ़ॉल्ट रूप से फोन इसे लो या ऑटो मोड पर सेट रखता है। इसका मतलब है कि फोन खुद तय करता है कि कहां ज़्यादा और कहां कम रिफ्रेश रेट इस्तेमाल करना है। अगर आप स्मूद स्क्रॉलिंग और बेहतर विजुअल अनुभव चाहते हैं, तो डिस्प्ले सेटिंग्स में जाकर रिफ्रेश रेट को हाई पर सेट कर दें। इससे सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग, गेमिंग और ऐप ट्रांज़िशन ज़्यादा फ्लूइड और आकर्षक लगेंगे।
स्क्रीन रेज़ोल्यूशन को उच्चतम गुणवत्ता पर रखें
रिफ्रेश रेट की तरह ही डिस्प्ले रेज़ोल्यूशन भी अक्सर डिफ़ॉल्ट रूप से कम सेट होता है। इसका उद्देश्य बैटरी बचाना होता है, लेकिन इससे डिस्प्ले की असली गुणवत्ता सामने नहीं आ पाती। अगर आप वीडियो देखने, गेम खेलने या फोटो ब्राउज़ करने का पूरा मज़ा लेना चाहते हैं, तो डिस्प्ले सेटिंग्स में जाकर स्क्रीन रेज़ोल्यूशन को सबसे उच्च विकल्प पर सेट करें। कुछ फोन में इसे एचडी, एफएचडी, क्यूएचडी या यूएचडी के नाम से दिया जाता है। सबसे ऊंचा विकल्प चुनने पर आपको फोन की डिस्प्ले का पूरा पोटेंशियल देखने को मिलेगा, जिससे हर दृश्य अधिक स्पष्ट और जीवंत दिखेगा।
अपनी ज़रूरत के अनुसार बैटरी सेटिंग्स बदलें
कई स्मार्टफोन में डिफ़ॉल्ट रूप से बैटरी सेविंग या बैलेंस्ड मोड ऑन रहता है। इससे बैटरी तो बचती है, लेकिन फोन की परफॉर्मेंस सीमित हो जाती है। अगर आपके लिए लंबा बैटरी बैकअप ज़रूरी है, तो यह सेटिंग ठीक है। लेकिन अगर आप गेमिंग, मल्टीटास्किंग या हाई परफॉर्मेंस चाहते हैं, तो बैटरी सेटिंग्स में जाकर परफॉर्मेंस मोड या बूस्ट मोड को चुन सकते हैं। इससे प्रोसेसर पूरी क्षमता से काम करता है और फोन ज़्यादा तेज़ महसूस होता है। यह बदलाव खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो अपने फोन से अधिकतम प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं।
एनिमेशन स्पीड को तेज़ करें
एंड्रॉइड फोन में डिफ़ॉल्ट एनिमेशन स्पीड धीमी होती है, जिससे फोन थोड़ा सुस्त लगता है। आप डेवलपर ऑप्शन में जाकर विंडो एनिमेशन स्केल, ट्रांज़िशन एनिमेशन स्केल और एनिमेटर ड्यूरेशन स्केल को 0.5x या ऑफ पर सेट कर सकते हैं। इससे ऐप खुलने और बंद होने की गति तेज़ हो जाती है और फोन अधिक रिस्पॉन्सिव लगता है। ध्यान रखें कि डेवलपर ऑप्शन को एक्टिवेट करने के लिए सेटिंग्स में ‘अबाउट फोन’ पर जाकर बिल्ड नंबर पर 7 बार टैप करना होता है।
ऑटो-अपडेट और बैकग्राउंड डेटा को नियंत्रित करें
नए फोन में कई ऐप्स ऑटो-अपडेट और बैकग्राउंड डेटा का इस्तेमाल करते हैं, जिससे डेटा खर्च होता है और बैटरी पर लोड बढ़ता है। प्ले स्टोर सेटिंग्स में जाकर ऑटो-अपडेट को ‘वाई-फाई पर ही’ या ‘ऑफ’ कर सकते हैं। साथ ही, उन ऐप्स के लिए बैकग्राउंड डेटा को प्रतिबंधित करें जिनकी आपको लगातार ज़रूरत नहीं है। इससे न केवल डेटा बचेगा, बल्कि फोन की बैटरी और परफॉर्मेंस भी बेहतर होगी।
लोकेशन और ब्लूटूथ सेटिंग्स को मैनेज करें
कई बार नए फोन में लोकेशन और ब्लूटूथ डिफ़ॉल्ट रूप से ऑन रहते हैं, जो बैटरी को तेज़ी से खत्म करते हैं। जब इनकी ज़रूरत न हो, तो इन्हें बंद रखना बेहतर है। क्विक सेटिंग्स पैनल से इन्हें आसानी से ऑन-ऑफ किया जा सकता है। इसके अलावा, लोकेशन सेटिंग्स में जाकर ‘बैटरी सेविंग’ मोड चुन सकते हैं, जो सटीकता से समझौता किए बिना बैटरी बचाता है।
इन छोटे लेकिन प्रभावी बदलावों को अपनाकर आप अपने नए स्मार्टफोन की असली क्षमता को अनलॉक कर सकते हैं। फोन की स्पीड, बैटरी लाइफ और डिस्प्ले अनुभव में स्पष्ट सुधार देखने को मिलेगा, जिससे आपका डिवाइस लंबे समय तक नए जैसा प्रदर्शन करेगा।