नीट यूजी पुनर्परीक्षा: सीबीटी मोड की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, केजरीवाल ने छात्रों से संवाद का आग्रह किया

नीट यूजी परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस विवाद के बाद, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद सुधाकर सिंह सहित कई लोगों ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका प्रस्तुत की है। इस याचिका के माध्यम से केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से कुछ अहम मांगें की गई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नीट यूजी की पुनर्परीक्षा पारंपरिक पेन-पेपर मोड के बजाय पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) मोड में आयोजित की जानी चाहिए।

याचिका में क्या रखी गई मांगें?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस याचिका में सबसे प्रमुख मांग 21 जून 2026 को प्रस्तावित नीट यूजी री-एग्जाम को सीबीटी मोड में कराने की है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि डिजिटल माध्यम से होने वाली यह परीक्षा पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगा सकती है। उनके अनुसार, ऑफलाइन परीक्षा की तुलना में सीबीटी मोड अधिक सुरक्षित और पारदर्शी है।

इसके अलावा, याचिका में मौजूदा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के स्थान पर एक नई और स्वतंत्र संस्था के गठन की भी मांग की गई है, जिसे ‘राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण’ (नेशनल एग्जामिनेशन अथॉरिटी) नाम दिया गया है। प्रस्तावित इस संस्था में न्यायिक निगरानी, कानूनी जवाबदेही और उन्नत तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था को शामिल करने की बात कही गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उच्च स्तरीय समिति और साइबर सुरक्षा पर जोर

याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय से एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति गठित करने का भी आग्रह किया है। इस समिति में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, फोरेंसिक वैज्ञानिक और प्रशासनिक विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं। यह समिति देशभर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश करेगी।

याचिका में राष्ट्रीय परीक्षाओं के लिए एक मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा लागू करने पर भी बल दिया गया है। इसमें एन्क्रिप्टेड डिजिटल पेपर ट्रांसमिशन सिस्टम, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी और सख्त साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल शामिल करने की मांग की गई है। प्रश्नपत्रों की ‘डिजिटल लॉकिंग’ व्यवस्था लागू करने पर जोर देते हुए कहा गया है कि इससे पेपर लीक की संभावनाओं को लगभग समाप्त किया जा सकता है।

जांच रिपोर्ट और परिणामों की पारदर्शिता की मांग

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को चार सप्ताह के भीतर नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच की स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया जाए। इस रिपोर्ट में जांच के दौरान सामने आए नेटवर्क, की गई गिरफ्तारियां, आरोपियों और अभियोजन की प्रगति का पूरा ब्योरा होना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, याचिका में एनटीए को नीट यूजी 2026 के केंद्रवार परिणाम प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग भी शामिल है। ऐसा करने से परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या असामान्यता की पारदर्शी ढंग से जांच की जा सकेगी और छात्रों के हितों की रक्षा हो सकेगी।

अरविंद केजरीवाल का छात्रों से संवाद

इस बीच, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने नीट के छात्रों के लिए एक विशेष अपील जारी की है। उन्होंने छात्रों से अनुरोध किया है कि वे इस पूरे विवाद और परीक्षा रद्द होने के कारण तनाव न लें। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि वे छात्रों के विचार और सुझाव सुनने के लिए तैयार हैं।

अपने वीडियो संदेश में केजरीवाल ने कहा, “चारों तरफ से रिपोर्ट्स आ रही हैं कि बहुत से बच्चे नीट एग्जाम कैंसिल होने की वजह से अवसाद और तनाव में हैं। यहां तक कि चार बच्चों के आत्महत्या करने की खबरें भी सामने आई हैं। मेरी सभी छात्रों से विनम्र प्रार्थना है कि वे इतना तनाव न लें।” उन्होंने छात्रों से अपनी भावनाओं और सुझावों को टिप्पणियों या डायरेक्ट मैसेज के माध्यम से उनके साथ साझा करने का आग्रह किया, ताकि वे उनकी चिंताओं को समझ सकें और उन्हें आश्वस्त कर सकें।