नीट री-टेस्ट में सुरक्षा के कड़े इंतजाम: क्या छात्रों पर बढ़ेगा मानसिक दबाव?

नीट री-एग्जाम 2026 को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए सुरक्षा कदमों ने एक नई बहस छेड़ दी है। परीक्षा केंद्रों पर सेना की तैनाती और अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इससे पहले से तनाव में झेल रहे छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव तो नहीं पड़ेगा। इस मुद्दे पर पूर्व आईपीएस अधिकारी और भाजपा के पूर्व राज्य अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने अपनी चिंता व्यक्त की है।

सुरक्षा के कड़े इंतजामों पर उठे सवाल

21 जून को आयोजित होने वाली नीट यूजी 2026 की पुनः परीक्षा के लिए सरकार ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। इसमें वायुसेना के माध्यम से प्रश्नपत्रों की एयरलिफ्टिंग, सीआरपीएफ और सीआईएसएफ की दोहरी सुरक्षा, चार स्तरीय सीसीटीवी निगरानी, एआई आधारित फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक प्रणाली शामिल है। प्रधानमंत्री कार्यालय से सीधी निगरानी के साथ कई स्तरों पर जांच की योजना बनाई गई है।

के. अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि ये इंतजाम किसी उच्च-स्तरीय सैन्य अभियान से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि पेपर लीक रोकने के लिए सरकार के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन इससे छात्रों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक बोझ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, परीक्षा से पहले इतनी सख्त जांच प्रक्रिया से गुजरना, जिसके लिए छात्रों ने महीनों तैयारी की है, उनके तनाव को और बढ़ा सकता है।

परीक्षा प्रणाली और एनईपी 2020 के लक्ष्य पर असर

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने यह भी कहा कि इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उस मूल उद्देश्य के विपरीत है, जिसमें परीक्षा के तनाव को कम करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि अत्यधिक सुरक्षा और निगरानी से परीक्षा प्रणाली का मकसद ही खत्म हो जाता है। छात्रों को परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले कई स्तरों पर तलाशी, बायोमेट्रिक सत्यापन और एआई निगरानी से गुजरना होगा, जो स्वाभाविक रूप से उनकी चिंता को बढ़ाएगा।

समय विस्तार और प्रवेश प्रक्रिया की चुनौतियां

सुरक्षा के अलावा, परीक्षा की अवधि को 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट करने का निर्णय भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अन्नामलाई के अनुसार, प्रवेश से पहले लंबी जांच प्रक्रिया और परीक्षा के समय में वृद्धि, दोनों मिलकर छात्रों के पहले से बढ़े हुए तनाव को और बढ़ा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन सभी इंतजामों के बावजूद, एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, एनटीए ने इन समस्याओं को जल्द हल करने का आश्वासन दिया है।

सुरक्षा बढ़ाने के बजाय समाधान पर जोर

अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि वह पेपर लीक जैसी समस्याओं के समाधान के पक्ष में हैं, लेकिन उन्हें चिंता है कि अपनाया गया तरीका सही नहीं हो सकता। उनके अनुसार, इस कदम से समस्या का समाधान होने के बजाय नई चुनौतियां पैदा होने का खतरा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अधिक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित यह पेन-एंड-पेपर आधारित परीक्षा 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। हालांकि, सुरक्षा के इंतजामों को लेकर उठ रहे सवालों ने शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बना दिया है।