नीट पुनः परीक्षा 2026: बंगलूरू यातायात पुलिस की जांच में हुआ बड़ा खुलासा, देरी का असली कारण सामने आया

बंगलूरू में एक छात्र द्वारा नीट परीक्षा छूट जाने के मामले में अब नई जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक रिपोर्टों में शहर के भीषण यातायात को इसका कारण बताया गया था, लेकिन यातायात पुलिस द्वारा की गई गहन जांच में पूरी तरह से अलग तथ्य उजागर हुए हैं। पुलिस के अनुसार, परीक्षा में शामिल न हो पाने का मुख्य कारण यातायात जाम नहीं, बल्कि छात्र का देर से घर से निकलना और लंबा रास्ता चुनना था।

यातायात पुलिस ने अपनी जांच में सीसीटीवी फुटेज, छात्र और उसके परिजनों के बयान, साथ ही संपूर्ण मार्ग का विश्लेषण किया। इस विस्तृत जांच के बाद ही यह निष्कर्ष निकाला गया। पुलिस ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में स्पष्ट किया कि सीसीटीवी विश्लेषण और मार्ग की जांच से यह प्रमाणित होता है कि उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के बाद परीक्षा केंद्र पर पहुंचा।

घर से निकलने में हुई देरी

पुलिस के मुताबिक, परीक्षा वाले दिन शहर में यातायात की स्थिति सामान्य थी और जहां भी आवश्यकता हुई, वहां तैनात यातायात कर्मियों ने वाहनों की आवाजाही में सहायता भी की। असली समस्या छात्र के घर से देर से निकलने और उसके द्वारा चुने गए मार्ग में थी। जांच में पाया गया कि नीट परीक्षार्थी आरटी नगर स्थित अपने घर से दोपहर 12:57 बजे रवाना हुआ था। वहीं, परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अंतिम समय सीमा दोपहर 1:30 बजे निर्धारित थी। इस हिसाब से छात्र के पास गंतव्य तक पहुंचने के लिए केवल 33 मिनट का समय था।

सीसीटीवी फुटेज और मार्ग विश्लेषण से पुष्टि हुई कि उम्मीदवार परीक्षा केंद्र के क्षेत्र में दोपहर 1:33 बजे पहुंचा, जो निर्धारित समय से तीन मिनट की देरी थी। यह स्पष्ट है कि केवल 33 मिनट पहले घर से निकलने के कारण छात्र के लिए समय पर पहुंचना लगभग असंभव हो गया और वह परीक्षा में शामिल नहीं हो सका।

लंबे मार्ग का चयन बना बाधा

जांच में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई कि छात्र ने परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए एक लंबा रास्ता चुना था, जबकि एक छोटा और अधिक सुविधाजनक मार्ग भी उपलब्ध था। पुलिस का मानना है कि यदि उम्मीदवार ने छोटे मार्ग का उपयोग किया होता, तो उसके समय पर पहुंचने की संभावना काफी बढ़ जाती। इस फैक्ट-चेक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि परीक्षा के दिन किसी बड़े सार्वजनिक आयोजन के कारण यातायात प्रभावित नहीं हुआ था।

इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी हुए। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि 21 जून को आयोजित एक बड़ी रैली के कारण छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, यातायात पुलिस की जांच में इस रैली को देरी का प्रमुख कारण नहीं माना गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि रास्ते में तैनात उनके कर्मी जरूरत पड़ने पर उम्मीदवारों की मदद करने के लिए तैयार थे और यातायात की स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में थी। इस पूरे मामले में देरी के लिए यातायात को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।