नीट पीजी कटऑफ में कमी पर डॉक्टर संगठन का कड़ा विरोध, स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र

नीट पीजी 2025 की कटऑफ में हाल ही में की गई बड़ी कटौती को लेकर चिकित्सा जगत में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फाईमा) ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में संगठन ने सरकार के इस कदम पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।

मेडिकल शिक्षा और मरीजों की सुरक्षा पर खतरा

फाईमा का कहना है कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) द्वारा केंद्र सरकार के निर्देशों पर यह कटौती की गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी कमी है। इस फैसले के बाद अब वे उम्मीदवार भी पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में प्रवेश के लिए पात्र हो गए हैं, जिन्होंने परीक्षा में शून्य या नकारात्मक अंक प्राप्त किए हैं। संगठन के अनुसार, यह कदम मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है और इससे मरीजों की सुरक्षा पर सीधा संकट पैदा हो सकता है।

परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

फाईमा ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि नीट पीजी जैसी प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षा का मुख्य उद्देश्य सबसे योग्य और कुशल डॉक्टरों का चयन करना है। कटऑफ को इतना नीचे लाकर इस परीक्षा की विश्वसनीयता और नैतिकता पर ही सवाल खड़े कर दिए गए हैं। संगठन का मानना है कि जिन उम्मीदवारों ने नकारात्मक अंक प्राप्त किए हैं, उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सक बनने का प्रशिक्षण देना किसी भी शैक्षणिक या नैतिक मानक के अनुरूप नहीं है। इससे भविष्य में तैयार होने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों की क्षमता और गुणवत्ता प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।

सरकारी अस्पतालों पर होगा सबसे बुरा असर

संगठन ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई है कि इस फैसले का सबसे अधिक नुकसान सरकारी और शिक्षण अस्पतालों पर निर्भर गरीब और कमजोर वर्गों को होगा। फाईमा का कहना है कि कम योग्यता वाले डॉक्टरों को विशेषज्ञ प्रशिक्षण देना मरीजों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली दोनों ही संकट में पड़ जाएंगे। संगठन ने यह भी आशंका जताई कि इस तरह के फैसलों से यह संदेश जाएगा कि नीट पीजी जैसी परीक्षा की कोई विशेष अहमियत नहीं रह गई है, क्योंकि अब मेरिट के बजाय केवल सीटें भरने के लिए प्रवेश दिया जा रहा है।

फैसला वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी

फाईमा ने पत्र में इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार और एनबीईएमएस से मांग की है कि इस नोटिफिकेशन को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए। संगठन ने तर्कसंगत और मेरिट आधारित कटऑफ को बहाल करने की बात कही है। साथ ही, फाईमा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सरकार ने सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो संगठन देशभर के रेजिडेंट डॉक्टरों और विभिन्न मेडिकल एसोसिएशनों के साथ मिलकर एक बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा।