सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी कट-ऑफ घटाने पर एनबीईएमएस से मांगा जवाब, संतुलन पर दिया जोर

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नीट पीजी 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल में अचानक भारी कमी किए जाने के मामले में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने कहा कि मेडिकल शिक्षा में खाली सीटों को भरने और गुणवत्ता बनाए रखने के बीच संतुलन आवश्यक है।

अदालत ने दो सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का दिया निर्देश

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने एनबीईएमएस को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि एक ओर जहां सीटें खाली नहीं रहनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक मानकों से समझौता भी अस्वीकार्य है। यह मामला चिकित्सा शिक्षा के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

याचिकाकर्ताओं ने नियमों में बदलाव को बताया असंवैधानिक

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल संकरणारायणन ने दलील दी कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल प्रवेश में कट-ऑफ या अंकों में बदलाव केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि स्नातकोत्तर स्तर पर मानक और अधिक कड़े होने चाहिए, न कि उन्हें कमजोर किया जाना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता नियमों में बदलाव संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों ने मूल कट-ऑफ के आधार पर अपनी तैयारी और करियर संबंधी निर्णय लिए थे, जिससे यह बदलाव उनके साथ अन्यायपूर्ण है।

कट-ऑफ में अभूतपूर्व कमी से मेडिकल समुदाय में हलचल

देशभर में लगभग 18,000 पीजी मेडिकल सीटों के खाली रहने के बाद एनबीईएमएस ने कट-ऑफ में बड़ा संशोधन किया था। नोटिस के अनुसार, सामान्य श्रेणी के लिए कट-ऑफ 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 7 पर्सेंटाइल कर दिया गया, जबकि आरक्षित वर्गों के लिए इसे 40 पर्सेंटाइल से घटाकर शून्य पर्सेंटाइल कर दिया गया। मेडिकल समुदाय के कई वर्गों ने इस फैसले को ‘अभूतपूर्व और तर्कहीन’ बताते हुए चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदम से पीजी मेडिकल शिक्षा के स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और डॉक्टरों की गुणवत्ता से समझौता होने की आशंका है।

अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद तय की है। अदालत ने एनबीईएमएस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि सीटें भरने और गुणवत्ता बनाए रखने के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाएगा। इस फैसले का असर हजारों मेडिकल स्नातकों के भविष्य पर पड़ेगा, जो पीजी प्रवेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।