नीट पेपर लीक मामला: सीबीआई की दसवीं गिरफ्तारी, लातूर के कोचिंग संचालक के मोबाइल से बरामद हुआ प्रश्नपत्र

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के लातूर शहर से एक कोचिंग संचालक को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी इस मामले में एजेंसी द्वारा की गई दसवीं कार्रवाई है। आरोपी की पहचान शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के रूप में हुई है, जो ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ नाम से कोचिंग संस्थान चलाता है।

मोबाइल फोन से मिला लीक पेपर

अधिकारियों के अनुसार, सीबीआई ने रविवार को आरोपी के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान मोटेगांवकर के मोबाइल फोन से मेडिकल प्रवेश परीक्षा का लीक हुआ प्रश्नपत्र बरामद हुआ। इसी सबूत के आधार पर एजेंसी ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी का आरोप है कि शिवराज मोटेगांवकर उस संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य था, जो नीट यूजी 2026 के प्रश्नपत्रों को लीक करने और उन्हें फैलाने में शामिल था।

परीक्षा से पहले ही मिल गया था पेपर

सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने अन्य साथियों के साथ मिलकर 23 अप्रैल 2026 को ही, यानी परीक्षा से काफी पहले, प्रश्नपत्र और उसके उत्तर हासिल कर लिए थे। इसके बाद उसने इस पेपर को कई अन्य लोगों तक पहुंचाया। फिलहाल एजेंसी पूरे पेपर लीक नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन शामिल है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

अब तक हुई गिरफ्तारियां

पेपर लीक मामले में सीबीआई अब तक कुल दस लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के अलावा निम्नलिखित नाम शामिल हैं:

  • मनीषा गुरुनाथ मांधरे
  • प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी
  • मांगीलाल बीवाल
  • विकास बीवाल
  • दिनेश बीवाल
  • यश यादव
  • शुभम खैरनार
  • मनीषा वाघमारे
  • धनंजय लोखंडे

सीबीआई ने इस मामले में कई स्थानों पर छापेमारी भी की है और पूरे नेटवर्क की कड़ी से कड़ी जोड़ने का प्रयास जारी है। एजेंसी का ध्यान अब इस बात पर है कि प्रश्नपत्र किस माध्यम से लीक हुआ और इस पूरे षड्यंत्र में कोचिंग संचालकों, छात्रों और परीक्षा आयोजकों की क्या भूमिका रही। यह मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि लाखों मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य से जुड़ी गंभीर चिंता का विषय भी है।