NCERT की नई पाठ्यपुस्तक में भारतीय चुनाव प्रणाली की सराहना
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 के लिए तैयार अपनी नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में भारत की चुनावी प्रक्रिया को ‘बेमिसाल’ करार दिया है। पुस्तक में विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि किस प्रकार भारतीय चुनाव आयोग फर्जी खबरों, भ्रामक सूचनाओं और अन्य चुनौतियों के बावजूद देश में निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव सुनिश्चित करता है।
यह पाठ्यपुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – पार्ट 1’ के ‘चुनाव’ अध्याय में यह उल्लेख किया गया है। यह किताब जल्द ही छात्रों के लिए उपलब्ध होगी और इसमें भारतीय चुनाव प्रणाली की विशालता और जटिलता को रेखांकित किया गया है।
निष्पक्ष चुनाव की चुनौतियाँ और जिम्मेदारियाँ
पाठ्यपुस्तक में लिखा गया है, “भारत की चुनाव प्रक्रिया अद्वितीय है और दुनिया के अन्य हिस्सों से भिन्न है, क्योंकि इसमें विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में फैले 96.8 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता शामिल हैं। चुनाव आयोग इस विशाल प्रक्रिया को स्वतंत्र रूप से संचालित करता है और पूरे देश में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है।”
पुस्तक में आगे कहा गया है कि निष्पक्ष चुनाव कराने में अनेक बाधाओं के बावजूद, चुनाव आयोग विभिन्न स्तरों पर चुनावों को निष्पक्ष बनाए रखने का प्रयास करता है। इसके अलावा, आयोग मतदान से इतर भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाता है।
पाठ्यपुस्तक के अनुसार, “अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए, जैसे कि मतदाता सूची अद्यतन करना, उम्मीदवारों का नामांकन, चुनाव प्रचार का नियमन, राज्यों के बीच कानून व्यवस्था में समन्वय, सुरक्षा के व्यापक प्रबंध, मतगणना, परिणामों की घोषणा और विवादों का निपटारा, चुनाव आयोग सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस का बड़े पैमाने पर उपयोग करता है।”
फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं से निपटने के उपाय
पुस्तक में ‘निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए चुनौतियाँ’ नामक एक विशेष खंड शामिल है। इसमें बताया गया है कि 2024 में 96.8 करोड़ से अधिक मतदाताओं, हजारों मतदान केंद्रों और सैकड़ों राजनीतिक दलों के साथ चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती है, जो विभिन्न भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में फैले हुए हैं।
इस खंड में आगे कहा गया है, “भ्रामक सूचनाओं, फर्जी खबरों और डराने-धमकाने जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए चुनाव आयोग जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, आदर्श आचार संहिता, ईवीएम, वीवीपैट, मतदाता जागरूकता अभियान और अन्य उपायों का सहारा लेता है।”
पाठ्यपुस्तक विशेष रूप से भ्रामक सूचनाओं, फर्जी खबरों और डराने-धमकाने को चुनावों के दौरान प्रमुख चुनौतियों के रूप में पहचानती है। अंत में इस बात पर जोर दिया गया है कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। पुस्तक में लिखा है, “निरंतर सतर्कता और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से चुनाव अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बन सकते हैं और लोकतंत्र मजबूत हो सकता है।”
समावेशी चुनाव प्रक्रिया पर जोर
यह पाठ्यपुस्तक ‘कोई भी मतदाता पीछे न छूटे’ (No Voter to Be Left Behind) थीम के तहत चुनावों को अधिक समावेशी बनाने के लिए चुनाव आयोग के प्रयासों पर भी प्रकाश डालती है। इसमें ब्रेल-सक्षम ईवीएम और वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर से मतदान की सुविधा का उल्लेख किया गया है।
पुस्तक में चुनाव आयोग के विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों का भी जिक्र है, जिनमें सक्षम ऐप, वोटर हेल्पलाइन ऐप, सीविजिल, ईटीपीबीएस, सुविधा, ईरोनेट और सुगम शामिल हैं। छात्रों को दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों, सेवा मतदाताओं, कैदियों और सुरक्षात्मक हिरासत में रखे गए लोगों के लिए किए गए सुधारों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है।
अध्याय में राजनीतिक दलों को लोकतंत्र की ‘बुनियादी भूमिका’ निभाने वाला बताया गया है। साथ ही, छात्रों को 1977 से 2024 तक के लोकसभा चुनावों में विजयी गठबंधनों का अध्ययन करने का सुझाव दिया गया है, ताकि वे भारतीय लोकतंत्र की गतिशीलता को बेहतर ढंग से समझ सकें।