एनसीईआरटी की इतिहास की पुस्तकों में बड़े बदलाव: विभाजन पर कांग्रेस का रुख बदला, हिटलर का उल्लेख हटा

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में कई अहम संशोधन किए हैं। ये बदलाव विवादों के बीच सामने आए हैं, जिसमें 1947 के विभाजन पर कांग्रेस पार्टी के रुख को नए सिरे से पेश किया गया है और एडोल्फ हिटलर तथा नाजी विचारधारा से जुड़े सभी संदर्भों को हटा दिया गया है।

नई संशोधित पुस्तक, जिसका नाम “एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड” है, को फरवरी में न्यायपालिका से जुड़े एक अध्याय पर उठे विवाद के बाद जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने तब पुरानी पुस्तक की भौतिक और डिजिटल प्रतियों को वापस लेने और आगे के प्रकाशन पर रोक लगाने का आदेश दिया था। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने पुस्तक के चौथे अध्याय “समाज में न्यायपालिका की भूमिका” को पूरी तरह से पुनर्लिखित किया।

विभाजन पर कांग्रेस के रुख में संशोधन

पाठ्यपुस्तक के इतिहास खंड “India’s Long Road to Independence” में विभाजन से संबंधित अध्याय को बदला गया है। संशोधित संस्करण में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने देश के विभाजन का व्यापक रूप से विरोध किया था। साथ ही, यह सवाल कि क्या विभाजन ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता था, आज भी बहस का विषय बना हुआ है।

पुरानी पाठ्यपुस्तक में यह उल्लेख था कि विभाजन के दौरान उपमहाद्वीप में हुए सांप्रदायिक नरसंहार के समय कांग्रेस नेता असहाय थे। इस वाक्य को नए संस्करण से पूरी तरह हटा दिया गया है। पहले के संस्करण में यह भी लिखा था कि अंग्रेजों ने हिंदू-मुस्लिम मतभेदों का फायदा उठाकर भारत का विभाजन किया, जिसे कांग्रेस ने अंततः स्वीकार कर लिया।

हिटलर और नाजी विचारधारा के संदर्भ हटाए गए

नई पाठ्यपुस्तक में सबसे उल्लेखनीय बदलाव एडोल्फ हिटलर और नाजी विचारधारा से जुड़े सभी संदर्भों को हटाना है। पुराने संस्करण में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा सेना खड़ी करने के लिए हिटलर से समर्थन मांगने का उल्लेख था। साथ ही, हिटलर को “नस्लवादी नाजी विचारधारा वाला तानाशाह” बताने वाला हिस्सा भी शामिल था।

संशोधित संस्करण में अब केवल इतना कहा गया है कि बोस ने “ब्रिटिश विरोधी ताकतों” से समर्थन मांगा था। इस प्रकार, हिटलर और नाजी विचारधारा से जुड़ी सभी चर्चाओं को पूरी तरह हटा दिया गया है।

वी.डी. सावरकर का उल्लेख शामिल

नई पुस्तक में वी.डी. सावरकर के बारे में एक नई जानकारी जोड़ी गई है। इसमें बताया गया है कि सावरकर ने 1925 में स्वराज की मांग उठाई थी। यह बदलाव इतिहास के अध्याय में स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न पहलुओं को शामिल करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

न्यायपालिका से जुड़े अध्याय में सुधार

न्यायपालिका से संबंधित अध्याय में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। विवादित हिस्सों को हटाने के साथ ही, अदालतों में लंबित मामलों और दो प्रमुख न्यायिक फैसलों के संदर्भों को भी हटा दिया गया है। इसके बजाय, जनहित याचिका (PIL), ट्रिब्यूनल और विवादों के वैकल्पिक समाधान तंत्र जैसी नई जानकारियों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को न्यायिक व्यवस्था की अधिक व्यापक और संतुलित समझ प्रदान करना है।

पुस्तक की विकास टीम में बदलाव

वापस ली गई पाठ्यपुस्तक की विकास टीम में 51 सदस्य शामिल थे, जबकि संशोधित संस्करण में 48 सदस्य हैं। तीन लोगों – मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार – के नाम हटा दिए गए हैं, जिन्हें शुरू में इस अध्याय के लिए जिम्मेदार माना गया था।

नई पाठ्यपुस्तक की भूमिका में स्पष्ट किया गया है कि इसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और एक व्यापक समीक्षा प्रक्रिया के बाद प्रकाशित किया गया है। यह बदलाव शैक्षिक सामग्री को अद्यतन और विवादों से मुक्त रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।