नौतपा 2026: सूर्य की कृपा पाने के लिए अपनाएं ये खास उपाय, बढ़ेगा मान-सम्मान
इस वर्ष 25 मई से नौतपा का आरंभ हो चुका है, जो 2 जून 2026 तक जारी रहेगा। मान्यता है कि इन नौ दिनों में सूर्य देव का प्रभाव सर्वाधिक होता है, क्योंकि वे पृथ्वी के अत्यधिक निकट माने जाते हैं। यही कारण है कि इस अवधि में प्रचंड गर्मी और तेज धूप का प्रभाव देखने को मिलता है। धार्मिक दृष्टि से यह समय अत्यंत फलदायी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि नौतपा के दौरान किए गए पूजा-पाठ, दान और सरल उपायों का अनेक गुना शुभ फल प्राप्त होता है। यह सूर्य देव की विशेष कृपा पाने के लिए भी लाभकारी समय है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य आत्मविश्वास, मान-सम्मान और नेतृत्व क्षमता का कारक ग्रह है। यदि कुंडली में सूर्य मजबूत हो, तो व्यक्ति को समाज में प्रतिष्ठा और हर जगह सम्मान प्राप्त होता है। अतः नौतपा के दौरान कुछ सरल उपाय करके सूर्य देव की विशेष कृपा अर्जित की जा सकती है।
नौतपा में करें ये आसान उपाय
नौतपा के दौरान प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
इस अवधि में सूर्य के 12 शक्तिशाली मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे आत्मबल मजबूत होता है और मानसिक तनाव दूर होने लगता है।
सूर्य ग्रह के 12 मंत्र
- ॐ आदित्याय नमः।
- ॐ सूर्याय नमः।
- ॐ रवेय नमः।
- ॐ पूषणे नमः।
- ॐ दिनेशाय नमः।
- ॐ सावित्रे नमः।
- ॐ प्रभाकराय नमः।
- ॐ मित्राय नमः।
- ॐ उषाकराय नमः।
- ॐ भानवे नमः।
- ॐ दिनमणाय नमः।
- ॐ मार्तंडाय नमः।
दान और सेवा के उपाय
इस अवधि में जरूरतमंद लोगों को ठंडा जल, पंखा, छाता या गर्मी से राहत देने वाली वस्तुओं का दान करना चाहिए। ऐसा करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं।
नौतपा में गुड़ का दान करना भी लाभकारी माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इससे कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और मान-सम्मान में वृद्धि के योग बनते हैं।
इन दिनों पक्षियों के लिए पानी रखना और उन्हें दाना खिलाना भी बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मकता बनी रहती है और अनेक प्रकार की परेशानियां दूर होती हैं।
अस्वीकरण: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। प्रस्तुत सूचना और तथ्यों की सटीकता एवं संपूर्णता के लिए जिम्मेदारी नहीं ली जाती।