नासा ने चंद्र मिशन के प्रक्षेपण को स्थगित किया, अब मार्च में होगा प्रयास

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने महत्वाकांक्षी चंद्रमा मिशन के प्रक्षेपण को स्थगित कर दिया है। तकनीकी खराबी के कारण यह लॉन्चिंग अब मार्च महीने में करने की योजना है। दरअसल, फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर में ईंधन भरने के परीक्षण के दौरान हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस का रिसाव पाया गया, जिसके बाद परीक्षण को बीच में ही रोकना पड़ा। इस देरी का असर मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों पर भी पड़ा है, जिन्हें फिलहाल क्वारंटाइन से बाहर भेज दिया गया है। यह लगभग दस दिनों का मिशन होगा, जिसमें यान चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से (फार साइड) तक जाएगा और वापस लौटेगा। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में मनुष्यों की चंद्रमा पर सुरक्षित वापसी और दीर्घकालिक उपस्थिति की तैयारी करना है।

परीक्षण के दौरान उत्पन्न हुई चुनौतियां

सोमवार को कैनेडी स्पेस सेंटर में वैज्ञानिकों की टीम ने विशाल रॉकेट में अत्यधिक ठंडी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस भरने की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन कुछ ही घंटों में रॉकेट के निचले हिस्से से गैस लीक होने लगी। लगभग सात लाख गैलन ईंधन भरने के दौरान काम को दो बार रोकना पड़ा। यह स्थिति तीन साल पहले की उन घटनाओं की याद दिलाती है, जब इसी प्रकार के रिसाव के कारण रॉकेट की पहली उड़ान में काफी देरी हुई थी। इस बार केवल गैस रिसाव ही नहीं, बल्कि टीम के सदस्यों के बीच संवाद में भी बाधा आई और काम पूरा करने में अपेक्षा से अधिक समय लग गया। इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नासा ने कहा है कि अब उनके पास डेटा का गहन विश्लेषण करने और कमियों को सुधारने का पर्याप्त समय होगा। वास्तविक उड़ान से पहले एक बार फिर ईंधन भरने का पूरा परीक्षण करके सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ा प्रभाव

इस मिशन के लिए चुने गए चारों अंतरिक्ष यात्री, जिनमें तीन अमेरिकी और एक कनाडाई शामिल हैं, पिछले दो सप्ताह से क्वारंटाइन में थे। लॉन्चिंग की तारीख आगे बढ़ने के कारण उन्हें फिलहाल घर भेज दिया गया है। जब मार्च में प्रक्षेपण का समय नजदीक आएगा, तब ये यात्री उड़ान से लगभग दो सप्ताह पहले पुनः क्वारंटाइन में प्रवेश करेंगे। उल्लेखनीय है कि सोमवार को जब रॉकेट का परीक्षण चल रहा था, तब ये चारों यात्री ह्यूस्टन में बैठकर पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रहे थे।

मिशन का उद्देश्य और महत्व

यह मिशन लगभग दस दिनों का होगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के उस हिस्से तक जाएंगे जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता, जिसे ‘फार साइड’ कहा जाता है। वहां से वे सीधे पृथ्वी पर लौट आएंगे। इस यात्रा का सबसे बड़ा उद्देश्य यह जांचना है कि अंतरिक्ष यान के अंदर यात्रियों के जीवित रहने की व्यवस्था और अन्य मशीनरी सही ढंग से काम कर रही है या नहीं। 1960 और 1970 के दशक के अपोलो मिशन के बाद, नासा का लक्ष्य अब चंद्रमा पर मनुष्यों को लंबे समय तक बसाना है। यदि यह मिशन सफल रहा, तो इससे भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के चंद्रमा पर उतरने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

आगे की योजना

नासा ने अभी तक मार्च के लिए कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक ठंड के कारण फरवरी में प्रक्षेपण के लिए वैसे भी बहुत कम समय बचा था। अब नासा की टीम पहले पुरानी गलतियों और डेटा की गहन जांच करेगी, सभी कमियों को दूर करेगी और उसके बाद ही अगले परीक्षण की तैयारी शुरू करेगी। इस दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।