नासा के आर्टेमिस 3 मिशन में बड़ा बदलाव: अब चांद पर नहीं, बल्कि पृथ्वी की कक्षा में होगा परीक्षण

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत एक बड़ा फैसला लिया है। आर्टेमिस 3 मिशन की योजना में भारी बदलाव किया गया है। अब यह मिशन सीधे चंद्रमा की सतह पर उतरने के बजाय पृथ्वी की कक्षा में रहकर कुछ अहम तकनीकों का परीक्षण करेगा। इस बदलाव के साथ ही नासा ने इस मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों के नामों की घोषणा भी कर दी है, लेकिन टीम में एक भी महिला को शामिल न किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।

क्यों बदली गई आर्टेमिस 3 की योजना?

जब आर्टेमिस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी, तब आर्टेमिस 3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानों को उतारने वाले ऐतिहासिक मिशन के रूप में पेश किया गया था। लेकिन 2026 में नासा ने इस योजना में संशोधन करते हुए आर्टेमिस 2 और चंद्र लैंडिंग मिशन के बीच एक अतिरिक्त मिशन जोड़ने का फैसला किया।

अब आर्टेमिस 3 का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की कक्षा में उन तकनीकों और प्रणालियों का परीक्षण करना होगा, जिनका उपयोग भविष्य में चंद्रमा पर उतरने के लिए किया जाएगा। चंद्रमा पर वास्तविक लैंडिंग का लक्ष्य अब आर्टेमिस 4 मिशन को सौंपा गया है, जिसे 2028 में लॉन्च करने की योजना है।

मिशन में देरी के पीछे तकनीकी चुनौतियां

आर्टेमिस कार्यक्रम को पिछले कुछ वर्षों में कई तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ा है। आर्टेमिस 1 मिशन के दौरान ओरियन कैप्सूल की हीट शील्ड में अपेक्षा से अधिक क्षति देखी गई थी। हीट शील्ड किसी भी अंतरिक्ष यान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि यह पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश के समय उत्पन्न होने वाली भयंकर गर्मी से अंतरिक्ष यात्रियों की रक्षा करता है।

नासा का मानना है कि चंद्रमा पर इंसानों को दोबारा भेजने से पहले सभी तकनीकों का अतिरिक्त परीक्षण और जांच करना बेहद जरूरी है। यही कारण है कि आर्टेमिस 3 को अब एक परीक्षण मिशन के रूप में तैयार किया जा रहा है। एजेंसी किसी भी तरह का जोखिम लेने के बजाय सुरक्षित और क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहती है।

आर्टेमिस 3 के चालक दल में शामिल यात्री

जून 2026 में नासा ने इस मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों के नामों की घोषणा की। यह मिशन कम से कम 2027 के अंत तक लॉन्च होने की संभावना है, जिससे चयनित टीम को एक साथ प्रशिक्षण लेने के लिए करीब 18 महीने का समय मिलेगा।

  • आंद्रे डगलस – नासा
  • रैंडी ब्रेसनिक – नासा
  • फ्रैंक रुबियो – नासा
  • लुका पर्मिटानो – यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी

स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन की तकनीक का होगा परीक्षण

नासा ने चंद्रमा पर उतरने के लिए स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन दोनों कंपनियों के साथ साझेदारी की है। हालांकि, अभी तक इन दोनों कंपनियों के लूनर लैंडर चंद्रमा पर सफलतापूर्वक नहीं उतरे हैं। आर्टेमिस 3 मिशन में ओरियन कैप्सूल और संभावित लूनर लैंडर सिस्टम के बीच समन्वय और इंटरफेस की जांच की जाएगी। नासा का मानना है कि किसी भी तकनीक की सबसे बड़ी परीक्षा वास्तविक अंतरिक्ष मिशन में ही होती है।

हीट शील्ड और लैंडर की टेस्टिंग क्यों जरूरी?

आर्टेमिस प्रोग्राम में हो रही देरी का सबसे बड़ा कारण इंजीनियरिंग से जुड़ी चुनौतियां हैं। आर्टेमिस 1 के दौरान स्पेसक्राफ्ट की हीट शील्ड को उम्मीद से ज्यादा नुकसान पहुंचा था। जब स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस आता है, तो तापमान 2,760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। नासा इसके लिए Avcoat नाम के विशेष मटीरियल का उपयोग करता है, जो जलकर खत्म होता रहता है और अंदर बैठे क्रू को भयंकर गर्मी से बचाता है। इंसान की सुरक्षा के लिए इस हीट शील्ड का पूरी तरह से सही होना सबसे जरूरी है।

वहीं, लूनर लैंडर की टेस्टिंग भी उतनी ही अहम है। नासा ने चांद पर उतरने वाले लैंडर बनाने का कॉन्ट्रैक्ट स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन को दिया है। इन दोनों कंपनियों के लैंडर्स ने अभी तक चांद पर लैंडिंग नहीं की है। आर्टेमिस 3 मिशन के दौरान अंतरिक्ष में ओरियन कैप्सूल और इन लैंडर्स के बीच के कनेक्शन की टेस्टिंग की जाएगी।

पूरी तरह पुरुषों वाली टीम पर क्यों छिड़ा विवाद?

जब 2019 में आर्टेमिस प्रोग्राम शुरू हुआ था, तो नासा का सबसे बड़ा नारा था कि वे चांद पर अगले आदमी और पहली महिला को उतारेंगे। लेकिन आर्टेमिस 3 के लिए चुनी गई टीम में चारों सदस्य पुरुष हैं। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर नासा की काफी आलोचना हो रही है।

आलोचकों का कहना है कि नासा अपने शुरुआती वादे से पीछे हटता नजर आ रहा है। विवाद इतना बढ़ गया कि नासा प्रमुख जारेड आइजैकमैन को सार्वजनिक रूप से सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि क्रू का चयन पूरी तरह योग्यता और मिशन की जरूरतों के आधार पर किया गया है और इस प्रक्रिया में किसी राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका नहीं रही। हैरानी की बात यह है कि अब नासा की आधिकारिक आर्टेमिस वेबसाइट से पहली महिला को चांद पर भेजने का जिक्र हटा दिया गया है।

2027 से पहले लॉन्च की उम्मीद नहीं

नासा के मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार, आर्टेमिस 3 मिशन का प्रक्षेपण 2027 के अंत से पहले होने की संभावना नहीं है। इससे चयनित अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 18 महीने का संयुक्त प्रशिक्षण समय मिलेगा। नासा का कहना है कि चंद्रमा पर मानव मिशन दोबारा शुरू करना आसान नहीं है, क्योंकि आखिरी बार इंसान 1972 में अपोलो 17 मिशन के दौरान चंद्रमा पर गया था। ऐसे में एजेंसी किसी भी तरह का जोखिम लेने के बजाय धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ना चाहती है।