आर्टेमिस 2: पांच दशक बाद चांद की ओर मानव का अगला कदम
नासा एक बार फिर इंसानों को चांद की यात्रा पर भेजने की तैयारी में जुट गया है। ‘आर्टेमिस 2’ मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री एक ऐतिहासिक उड़ान भरने वाले हैं, जो 1972 के बाद पहली बार मनुष्य को पृथ्वी के इस निकटतम उपग्रह की ओर ले जाएगा। यह मिशन न केवल नासा के भविष्य के चंद्र अभियानों की नींव रखेगा, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों को मानव इतिहास में पृथ्वी से सबसे दूर भी ले जाएगा। आइए, इस महत्वाकांक्षी मिशन से जुड़ी हर अहम बात को विस्तार से समझते हैं।
मिशन की मुख्य योजना और उद्देश्य
आर्टेमिस 2 का प्राथमिक लक्ष्य चांद की सतह पर उतरना नहीं है। यह एक ‘फ्लाईबाय’ मिशन है, जिसे भविष्य में होने वाली वास्तविक चंद्र लैंडिंग के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण के रूप में डिजाइन किया गया है। इस मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर चक्कर लगाकर सीधे पृथ्वी पर लौट आएंगे। यह पूरी यात्रा 10 दिन से भी कम समय में पूरी होगी। इस दौरान नासा अपने ‘ओरियन’ अंतरिक्ष यान के सभी सिस्टम और संचालन प्रक्रियाओं का बारीकी से परीक्षण करेगा, ताकि आने वाले मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से चांद पर उतारा जा सके।
विविधता का प्रतीक: चार सदस्यीय दल
आर्टेमिस 2 के लिए चुनी गई टीम न केवल अत्यधिक कुशल है, बल्कि यह अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में विविधता का एक नया अध्याय भी लिख रही है। पहली बार किसी चंद्र मिशन में एक महिला, एक अश्वेत और एक गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री को शामिल किया गया है।
- रीड वाइजमैन (मिशन कमांडर): रिटायर्ड नेवी कैप्टन और अनुभवी अंतरिक्ष यात्री, जो पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रह चुके हैं। वे इस पूरे मिशन की कमान संभालेंगे।
- क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ): उनके नाम एक महिला द्वारा अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने का रिकॉर्ड दर्ज है। वे इस मिशन में अपने अनुभव का योगदान देंगी।
- विक्टर ग्लोवर (पायलट): नेवी टेस्ट पायलट और अंतरिक्ष स्टेशन पर रहने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री। वे मिशन की विविधता को और मजबूती प्रदान करते हैं।
- जेरेमी हेन्सेन (मिशन विशेषज्ञ): कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के पूर्व फाइटर पायलट। वे अपना पहला अंतरिक्ष मिशन पूरा करेंगे, जो इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक बनाता है।
दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट: SLS
इस मिशन की रीढ़ नासा का स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट है। 322 फीट ऊंचा यह महारॉकेट पुराने अपोलो मिशनों में इस्तेमाल हुए ‘सैटर्न V’ से भी अधिक शक्तिशाली है। अंतरिक्ष यात्री इसी रॉकेट के शीर्ष पर लगे ‘ओरियन कैप्सूल’ में सवार होंगे। हालांकि, इस यात्रा की तैयारी चुनौतियों से भरी रही है। रॉकेट में लिक्विड हाइड्रोजन लीक और हीलियम से जुड़ी तकनीकी खामियों के कारण शुरुआती परीक्षणों में देरी हुई। अब यह मिशन अप्रैल 2026 में लॉन्च होने की संभावना है।
यात्रा का रोमांच और पृथ्वी पर वापसी
आर्टेमिस 2 की यात्रा रोमांच और चुनौतियों से भरी होगी। लॉन्च के बाद पहले 25 घंटों तक चालक दल पृथ्वी की ऊंची कक्षा में रहेगा और ओरियन अंतरिक्ष यान को मैन्युअल रूप से नियंत्रित करने का अभ्यास करेगा। इसके बाद, मुख्य इंजन के प्रज्वलित होते ही यान चांद की ओर रवाना हो जाएगा।
यह मिशन एक नया कीर्तिमान भी स्थापित करेगा। ओरियन कैप्सूल चांद से लगभग 5,000 मील आगे तक जाएगा, जो अपोलो 13 के समय बनाए गए पिछले रिकॉर्ड से कहीं अधिक दूर है। इस दौरान चालक दल को चांद के उन हिस्सों की तस्वीरें लेने का अवसर मिलेगा, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देते। लगभग 2,44,000 मील की इस ऐतिहासिक यात्रा के अंत में, कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में पैराशूट की मदद से सुरक्षित ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। वहां से नौसेना की टीमें इसे बरामद कर लेंगी।