मेटा के Muse AI टूल पर सरकारी जांच: प्राइवेसी और फर्जी तस्वीरों का खतरा

मेटा के नवीनतम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल ‘Muse Image’ ने भारत में डेटा सुरक्षा और निजता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फीचर की मौजूदा कानूनों के तहत बारीकी से जांच की जाएगी। सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, मंत्रालय को प्राप्त सभी शिकायतों और सुझावों का गहन अध्ययन किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह टूल कानूनी मापदंडों के अनुरूप है या नहीं।

विवाद की जड़ क्या है?

मेटा ने हाल ही में Muse Image को लॉन्च किया, जिसे कंपनी अपना सबसे उन्नत AI इमेज जनरेशन मॉडल बता रही है। हालांकि, लॉन्च के तुरंत बाद ही इसकी डेटा गोपनीयता, इमेज स्क्रैपिंग और उपयोगकर्ता की सहमति को लेकर सवाल उठने लगे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह टूल किसी भी व्यक्ति का इंस्टाग्राम यूजरनेम लिखकर उसके सार्वजनिक अकाउंट की तस्वीरों से AI-जनित इमेज तैयार कर सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि सार्वजनिक अकाउंट्स के लिए यह सुविधा डिफ़ॉल्ट रूप से सक्रिय रहती है, जिससे उपयोगकर्ताओं की जानकारी के बिना ही उनकी तस्वीरों का उपयोग हो सकता है।

विशेषज्ञों की चिंताएं

साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी विशेषज्ञों ने इस टूल को लेकर कई गंभीर खतरों की ओर इशारा किया है:

  • बिना अनुमति इमेज का उपयोग: विशेषज्ञों का कहना है कि इससे किसी भी व्यक्ति की तस्वीरों का बिना सहमति के AI प्रशिक्षण और इमेज निर्माण में इस्तेमाल हो सकता है।
  • कंटेंट क्रिएटर्स के लिए जोखिम: खासकर इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह बड़ा खतरा है, क्योंकि उनकी पहचान और चेहरा उनके पेशे का अभिन्न हिस्सा है।
  • फर्जी तस्वीरों और डीपफेक का खतरा: इस टूल के दुरुपयोग से नकली प्रमोशन, पहचान की चोरी और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। डीपफेक तकनीक के बढ़ने से असली और नकली तस्वीरों में अंतर करना मुश्किल हो जाएगा।

मेटा का पक्ष और बचाव के उपाय

इन आरोपों के बीच मेटा ने अपनी सफाई पेश की है। कंपनी का दावा है कि उपयोगकर्ताओं के पास इस फीचर को बंद करने का पूरा विकल्प है। इंस्टाग्राम की ‘Reuse’ सेटिंग को बंद करके कोई भी अपनी सार्वजनिक तस्वीरों का AI में इस्तेमाल रोक सकता है। इसके अलावा, मेटा ने ‘Content Seal’ नामक एक अदृश्य वॉटरमार्क सिस्टम पेश किया है, जो AI से बनी तस्वीरों की पहचान करने में मदद करेगा। यह वॉटरमार्क फोटो को क्रॉप करने, रिसाइज करने या स्क्रीनशॉट लेने के बाद भी बरकरार रहेगा। कंपनी जल्द ही इस वॉटरमार्क का पता लगाने के लिए एक अलग डिटेक्शन टूल भी लॉन्च करने की योजना बना रही है।

सरकार की कानूनी कार्रवाई की संभावना

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रही है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि यह फीचर मौजूदा कानूनों या उपयोगकर्ताओं की निजता के अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, मेटा का यह नया AI टूल डेटा सुरक्षा, ऑनलाइन प्राइवेसी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग को लेकर एक नई बहस का केंद्र बन गया है। यह मामला तकनीकी नवाचार और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।