गर्मी में सेहत का ख्याल: सिर्फ पानी नहीं, इलेक्ट्रोलाइट्स भी हैं जरूरी

देश के अधिकांश इलाकों में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। चिलचिलाती धूप और लू ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। अस्पतालों में लू लगने, तेज बुखार, रक्तचाप में उतार-चढ़ाव, चक्कर आने और पेट की समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। इस स्थिति को और भी खतरनाक बना रही है उमस भरी गर्मी, जो शरीर के प्राकृतिक शीतलन तंत्र को बाधित करती है।

जब वातावरण में नमी अधिक होती है, तो पसीना शरीर से निकलने के बाद वाष्पित नहीं हो पाता। इस कारण शरीर का तापमान लगातार बढ़ता रहता है, जो आगे चलकर हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। गर्मी और लू के इस मौसम में डिहाइड्रेशन का खतरा भी काफी बढ़ जाता है, जिससे कई तरह की शारीरिक परेशानियां हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान केवल पानी पीना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।

गर्मियों में इलेक्ट्रोलाइट्स की क्यों बढ़ जाती है जरूरत?

एक प्रमुख अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन की वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. दिव्या गोपाल बताती हैं कि गर्मी के मौसम में खूब पानी पीना बेहद जरूरी है, लेकिन हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए सिर्फ पानी ही काफी नहीं है। जब तापमान बहुत अधिक होता है और शरीर से अत्यधिक पसीना निकलता है, तो उसके साथ शरीर के लिए जरूरी कई महत्वपूर्ण मिनरल्स भी बाहर निकल जाते हैं। इनमें सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स शामिल हैं।

ये इलेक्ट्रोलाइट्स मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के सही ढंग से काम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। साथ ही, ये शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करते हैं। अगर पसीने के साथ निकले इन मिनरल्स की भरपाई नहीं की गई, तो डिहाइड्रेशन के साथ-साथ कई अन्य समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। डॉ. दिव्या के अनुसार, अत्यधिक पसीना आने के बाद सिर्फ पानी पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी नहीं होती। इससे थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, सिरदर्द, चक्कर आना और बार-बार प्यास लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

तेज गर्मी और अधिक पसीना आने की स्थिति में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए कुछ खास उपाय अपनाए जा सकते हैं। इनमें ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का सेवन, नींबू पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर पीना, नारियल पानी, छाछ और संतुलित भोजन शामिल हैं। ये सभी शरीर में खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स को वापस लाने में प्रभावी रूप से मदद करते हैं।

इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी से शरीर के कई अंगों को खतरा

एक अन्य अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख डॉ. मुर्तजा एस बागवाला का कहना है कि अत्यधिक गर्म मौसम में डिहाइड्रेशन की समस्या सबसे आम है। पसीने के माध्यम से शरीर से पानी के साथ-साथ सोडियम और पोटैशियम जैसे आवश्यक मिनरल्स भी कम हो जाते हैं। यदि समय रहते इस कमी को पूरा नहीं किया गया, तो यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

डिहाइड्रेशन के कारण शरीर में गंभीर कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, अत्यधिक थकान, ऊर्जा की कमी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। कई लोगों में यह स्थिति निम्न रक्तचाप का कारण बन सकती है या दिल की धड़कन तेज हो सकती है। गंभीर मामलों में बेहोशी भी आ सकती है, जो एक खतरनाक संकेत है और तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।

पहले से बीमार लोग रहें विशेष रूप से सावधान

इंटरनल मेडिसिन और मेटाबॉलिक रोगों के विशेषज्ञ डॉ. विमल पाहुजा ने चेतावनी दी है कि जिन लोगों को पहले से मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) और हृदय रोग हैं, उनके लिए गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा और भी अधिक बढ़ जाता है। इन बीमारियों के लिए ली जाने वाली दवाइयां भी शरीर में पानी और मिनरल्स के संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।

जब शरीर से बहुत अधिक तरल पदार्थ बाहर निकल जाता है, तो रक्त की मात्रा (ब्लड वॉल्यूम) भी कम हो जाती है। इस स्थिति को हाइपोवोलेमिया कहा जाता है, जो गंभीर हो सकती है। उच्च रक्तचाप और हृदय रोगियों में इससे खड़े होने पर चक्कर आने और बेहोशी का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा, शरीर के जरूरी अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त न पहुंचने से किडनी की समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए, ऐसे मरीजों को गर्मियों में विशेष सावधानी बरतने और अपने तरल पदार्थ तथा इलेक्ट्रोलाइट्स के सेवन पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी जाती है।

नोट: यह लेख चिकित्सा विशेषज्ञों की रिपोर्ट और सुझावों पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।