मिथुन संक्रांति 2026: सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए करें ये उपाय, दूर होंगे दोष

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहा जाता है। इस वर्ष 15 जून 2026 को मिथुन संक्रांति का शुभ अवसर है। इस दिन सूर्यदेव वृषभ राशि का भ्रमण समाप्त कर बुध ग्रह के स्वामित्व वाली मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य इस राशि में लगभग एक माह तक विराजमान रहेंगे, जिसके बाद वे कर्क राशि में गोचर करेंगे। धार्मिक दृष्टि से मिथुन संक्रांति पर किए गए उपाय अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन उपायों को करने से पूरे वर्ष सूर्यदेव की कृपा बनी रहती है, जिससे जीवन में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और वैभव में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं मिथुन संक्रांति की पूजन विधि और सूर्यदेव को प्रसन्न करने के प्रभावी उपायों के बारे में।

मिथुन संक्रांति 2026 पूजन विधि

मिथुन संक्रांति के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करना चाहिए। स्नान के पश्चात तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, अक्षत, रोली और थोड़ा गुड़ डालकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्यदेव को जल अर्पित करें। जल अर्पित करते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ और ‘ॐ आदित्याय नमः’ मंत्रों का जाप करें। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना भी अत्यंत लाभकारी होता है। मिथुन संक्रांति पर मन में सकारात्मक विचार रखें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।

सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय

  • सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए मिथुन संक्रांति पर तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालकर अर्घ्य दें। इस उपाय से बुद्धि तीव्र होती है और मानसिक शक्ति बढ़ती है।
  • मिथुन संक्रांति के दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करें और लाल चंदन का तिलक लगाएं। इससे सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करने के शुभ योग बनते हैं।
  • सूर्यदेव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावशाली उपाय आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करना है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से आत्मबल, आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है।
  • मिथुन संक्रांति पर पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें और उसकी सात बार परिक्रमा करें। इस उपाय से स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार आता है और रोगों से मुक्ति मिलती है।

हिंदू धर्म में मिथुन संक्रांति का विशेष महत्व है। सूर्य जब वर्ष में एक बार मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं, तब इस घटना को मिथुन संक्रांति कहा जाता है। इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान और उपाय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। सूर्यदेव की कृपा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

(अस्वीकरण: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। प्रस्तुत सूचना और तथ्यों की सटीकता एवं संपूर्णता के लिए प्रकाशक उत्तरदायी नहीं है।)