कर्मचारियों के विरोध के बाद मेटा ने ट्रैकिंग योजना में किया बदलाव
मेटा ने अपने कर्मचारियों के कंप्यूटर गतिविधियों पर नज़र रखने वाले विवादास्पद कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब कर्मचारियों को अपने माउस मूवमेंट और कीबोर्ड इनपुट की रिकॉर्डिंग को रोकने का अधिकार देगी। यह निर्णय कर्मचारियों के व्यापक विरोध के बाद लिया गया है, जिन्होंने इसे निजता पर हमला बताया था।
मार्क जुकरबर्ग की अगुवाई वाली कंपनी का लक्ष्य था कि वह अपने कर्मचारियों के काम करने के तरीके से डेटा एकत्र करे और इसका उपयोग एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने में करे। ये एआई एजेंट भविष्य में मनुष्यों की तरह कार्य करने में सक्षम होंगे। हालांकि, कंपनी के भीतर इस योजना को लेकर गहरी नाराजगी और असहजता पैदा हो गई थी।
क्या है पूरा विवाद?
पिछले महीने मेटा ने अमेरिका में कार्यरत अपने कर्मचारियों के कंप्यूटरों पर एक नया ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर स्थापित करने की घोषणा की थी। इस सॉफ्टवेयर का उद्देश्य माउस की हर हरकत, हर क्लिक और कीबोर्ड पर दबाए गए हर बटन को रिकॉर्ड करना था। कंपनी का तर्क था कि इस डेटा से ऐसे एआई एजेंट विकसित किए जा सकेंगे जो भविष्य में जटिल कार्यों को अंजाम दे सकें।
लेकिन यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब कंपनी पहले से ही कई आंतरिक बदलावों से गुज़र रही थी। कर्मचारियों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की और कंपनी की तुलना एक डेटा निकालने वाली फैक्ट्री से कर दी। उनका कहना था कि इस तरह की निगरानी उनके काम के माहौल को अविश्वासपूर्ण बना रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, मेटा का यह कदम यूरोपीय संघ में भी कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता था, क्योंकि वहां डेटा संग्रह को लेकर पहले से ही सख्त नियम हैं और टेक कंपनियों को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों की चिंताएं और कंपनी का नया विकल्प
मेटा के सुपरइंटेलिजेंस लैब के वाइस प्रेसिडेंट स्टीफन कासरियल ने एक आंतरिक संदेश में बताया कि कर्मचारियों की चिंताओं को देखते हुए कंपनी ने उन्हें अधिक नियंत्रण देने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी अब डेटा संग्रह को एक बार में 30 मिनट के लिए रोक सकेंगे। इसके अलावा, वे विशेष परिस्थितियों में इस ट्रैकिंग कार्यक्रम से पूरी तरह छूट भी मांग सकते हैं।
कंपनी ने सॉफ्टवेयर में कुछ तकनीकी सुधार भी किए हैं। कर्मचारियों की शिकायत थी कि यह टूल बहुत अधिक डेटा का उपयोग कर रहा था, जिससे उनके घर के इंटरनेट बिल पर असर पड़ रहा था और लैपटॉप की बैटरी भी बहुत तेजी से खत्म हो रही थी।
बैटरी और इंटरनेट की समस्या का समाधान
कर्मचारियों की परेशानी सिर्फ निजता तक सीमित नहीं थी। कई कर्मचारियों ने बताया कि ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर इतना अधिक डेटा खपत कर रहा था कि उनके घर का इंटरनेट बिल बढ़ गया था और उनके लैपटॉप की बैटरी भी जल्दी खत्म हो जाती थी।
स्टीफन कासरियल ने अपने संदेश में बताया कि उनकी टीम ने सॉफ्टवेयर में कई बदलाव किए हैं ताकि कंप्यूटर की बैटरी पर इसका प्रभाव कम हो। हालांकि मेटा ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं, लेकिन यह मामला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि एआई के युग में डेटा और निजता के बीच संतुलन बनाना टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।