AI के बढ़ते दबदबे के बीच मेटा का बड़ा फैसला: 8,000 कर्मचारियों की छंटनी तय

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में शुमार मेटा एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई नई उपलब्धि नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर छंटनी है। रॉयटर्स की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मेटा अपने वैश्विक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा कम करने जा रही है। कंपनी 20 मई से इस प्रक्रिया की शुरुआत करेगी, जिसमें लगभग 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया जाएगा। यह संख्या कंपनी के कुल कर्मचारियों का करीब 10% है।

हैरानी की बात यह है कि यह कदम कंपनी के भारी मुनाफे के बावजूद उठाया जा रहा है। मेटा वर्तमान में वित्तीय रूप से मजबूत स्थिति में है, फिर भी प्रबंधन ने इस कठोर फैसले को लागू करने का मन बनाया है। इसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को अपनाना और कंपनी के संचालन को पूरी तरह से इसी पर आधारित करना है। मार्क जुकरबर्ग की योजना है कि वे AI की मदद से कम कर्मचारियों के साथ अधिक कुशलता से काम कर सकें।

क्या है कंपनी की पूरी योजना?

पहले चरण में मेटा अपने वैश्विक कार्यबल में 10% की कटौती करेगी, जिसका सीधा असर लगभग 8,000 लोगों पर पड़ेगा। बता दें कि 31 दिसंबर तक कंपनी में कुल 79,000 कर्मचारी कार्यरत थे। हालांकि, यह कटौती यहीं खत्म नहीं होगी। सूत्रों के अनुसार, साल के दूसरे भाग में भी छंटनी का दौर जारी रह सकता है।

आगे कितने और लोगों को नौकरी से निकाला जाएगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि AI तकनीक कंपनी के विभिन्न कामों में कितनी तेजी से और प्रभावी ढंग से शामिल होती है। पिछले महीने ही एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मेटा 20% से अधिक कर्मचारियों को हटा सकता है, लेकिन तब कंपनी ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की थी।

क्या AI वाकई नौकरियों का दुश्मन बन रहा है?

मेटा के इस कदम ने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है कि क्या AI तकनीक इंसानी नौकरियों के लिए खतरा बन रही है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग AI तकनीक पर अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं और कंपनी के कामकाज को पूरी तरह से AI के इर्द-गिर्द ढालना चाहते हैं।

प्रबंधन का ध्यान अब कंपनी के पदानुक्रम को कम करने और AI की सहायता से काम की गति को बढ़ाने पर है। इसके लिए मेटा के अंदर कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं:

  • खुद कोडिंग करने वाले AI एजेंट: ‘रिएलिटी लैब्स’ के कई इंजीनियरों को एक नए ‘एप्लाइड AI’ ग्रुप में भेजा जा रहा है। इस टीम का मुख्य उद्देश्य ऐसे स्मार्ट AI एजेंट बनाना है जो खुद कोड लिख सकें और जटिल कार्यों को बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के पूरा कर सकें।
  • नई यूनिट्स में स्थानांतरण: छंटनी से पहले कंपनी अपने ढांचे को पुनर्गठित कर रही है। इसी क्रम में कुछ कर्मचारियों को हाल ही में बनाई गई नई यूनिट ‘मेटा स्मॉल बिजनेस’ में शिफ्ट किया जा रहा है।

भारी मुनाफे के बावजूद छंटनी क्यों?

अगर आपको याद हो, तो 2022 के अंत और 2023 की शुरुआत में मेटा ने ‘ईयर ऑफ एफिशिएंसी’ अभियान चलाया था। उस समय कंपनी ने 21,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। इसके पीछे मुख्य कारण कोविड के दौरान अत्यधिक भर्ती और शेयर बाजार में गिरावट थी।

हालांकि, इस बार की स्थिति बिल्कुल अलग है। मेटा किसी आर्थिक संकट से नहीं गुजर रहा है, बल्कि वित्तीय रूप से बहुत मजबूत है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च के बावजूद, कंपनी ने 200 अरब डॉलर से अधिक की कमाई और 60 अरब डॉलर का शानदार मुनाफा दर्ज किया था। साथ ही, इस साल मेटा के शेयरों में भी करीब 3.68% की बढ़त देखी गई है।

सीधे शब्दों में कहें तो यह छंटनी घाटे की भरपाई या पैसे बचाने के लिए नहीं, बल्कि AI के माध्यम से कामकाज को पूरी तरह से स्वचालित और स्मार्ट बनाने के लिए की जा रही है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में कम इंसानी संसाधनों के साथ अधिक तेजी से काम करना है।

पूरी टेक इंडस्ट्री पर AI का प्रभाव

यह सिर्फ मेटा की कहानी नहीं है। दुनिया भर की कई बड़ी टेक कंपनियां AI का हवाला देकर बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं:

  • अमेजन: ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन ने हाल के महीनों में अपने कॉर्पोरेट सेक्टर से लगभग 30,000 कर्मचारियों को निकाल दिया है, जो उनके कुल व्हाइट-कॉलर कार्यबल का लगभग 10% है।
  • ब्लॉक: मशहूर फिनटेक कंपनी ब्लॉक ने इसी साल फरवरी में अपने लगभग आधे कर्मचारियों की छंटनी कर दी।

छंटनी के आंकड़े क्या कहते हैं?

टेक सेक्टर में नौकरियों की कटौती पर नजर रखने वाली वेबसाइट Layoffs.fyi के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक 73,212 टेक कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं, जबकि पूरे 2024 में यह आंकड़ा लगभग 1 लाख 53 हजार था।

इन सभी कंपनियों का तर्क एक जैसा है: AI की मदद से काम में दक्षता और गति आ रही है, जिससे चीजों को स्वचालित किया जा रहा है। इसलिए, कंपनी को चलाने के लिए अब पहले जितने कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं रह गई है।