चैत्र मासिक शिवरात्रि 2026: तिथि, पूजा विधि और व्रत के नियम
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा का विशेष विधान है। वर्ष 2026 में चैत्र माह की मासिक शिवरात्रि मार्च महीने में आ रही है। यद्यपि इसका महत्व महाशिवरात्रि के समान ही माना जाता है, लेकिन इसकी पूजा प्रक्रिया सरल होती है। आइए जानते हैं चैत्र मासिक शिवरात्रि की सही तिथि, पूजा मुहूर्त और व्रत के नियम।
चैत्र मासिक शिवरात्रि 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
चैत्र मासिक शिवरात्रि की तिथि और पूजा के लिए शुभ समय इस प्रकार है:
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 17 मार्च 2026, सुबह 9:23 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 18 मार्च 2026, सुबह 8:25 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: 18 मार्च, रात 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
उपरोक्त जानकारी के अनुसार, चैत्र मासिक शिवरात्रि का व्रत 17 मार्च 2026 को रखा जाएगा।
मासिक शिवरात्रि व्रत और पूजा विधि
व्रत का संकल्प: प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके पश्चात घर के मंदिर या किसी शिवालय में जाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। महाशिवरात्रि की भांति भव्य पूजा अनिवार्य नहीं है, सामान्य पूजन भी पर्याप्त है।
पूजा सामग्री: शिवलिंग पर जल या गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद पुष्प अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
दिनभर व्रत रखें: कुछ भक्त निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि अन्य फलाहार या एक समय सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
रात्रि में विशेष पूजा: धार्मिक मान्यता है कि शिवरात्रि की रात भगवान शिव शिवलिंग में विशेष रूप से विराजमान रहते हैं, अतः इस समय पूजा और मंत्र जाप का विशेष महत्व है।
व्रत का पारण: अगले दिन प्रातः भगवान शिव की पूजा करने के बाद व्रत का पारण करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान दें।
मासिक शिवरात्रि व्रत के नियम
- व्रत के दिन सात्विक भोजन का सेवन करें और लहसुन-प्याज से परहेज रखें।
- मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें।
- क्रोध, असत्य और विवाद से दूर रहने का प्रयास करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है।
- भगवान शिव के मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करें।
- संभव हो तो मंदिर जाकर शिवलिंग का अभिषेक अवश्य करें।
यह जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है।