चैटजीपीटी से पांच महीने की बातचीत, फिर मां की हत्या और आत्महत्या; परिवार ने ओपनएआई पर ठोका आरोप
अमेरिका में अगस्त 2025 में हुई एक दर्दनाक घटना ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 56 वर्षीय स्टीन-एरिक सोलबर्ग ने अपनी 83 वर्षीय मां सुजैन एबरसन एडम्स की हत्या करने के बाद खुद भी आत्महत्या कर ली। अब मृतक के परिवार ने इस मामले में ओपनएआई, उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन और माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। परिवार का आरोप है कि चैटजीपीटी के साथ लगातार बातचीत ने स्टीन-एरिक के मानसिक भ्रम को बढ़ावा दिया, जिससे यह दुखद घटना घटी।
कैसे हुई यह घटना?
अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, स्टीन-एरिक ने अपनी मां पर हमला कर उनका गला घोंट दिया और फिर खुद को चाकू मारकर जान दे दी। मुकदमे में यह खुलासा हुआ है कि घटना से पहले पांच महीनों तक स्टीन-एरिक हर दिन घंटों चैटजीपीटी से बातचीत करता था। उसके बेटे एरिक सोलबर्ग का दावा है कि एआई चैटबॉट के साथ इस निरंतर संवाद ने उसके पिता की मानसिक स्थिति को और खराब कर दिया।
परिवार ने क्या आरोप लगाए हैं?
एरिक सोलबर्ग का कहना है कि चैटजीपीटी ने उनके पिता को धीरे-धीरे वास्तविकता से दूर कर दिया। उनके अनुसार, स्टीन-एरिक एक काल्पनिक दुनिया में जीने लगा था, जो चैटजीपीटी से बातचीत के जरिए बनी थी। इसी भ्रम के चलते उसने अपनी मां की हत्या कर दी। परिवार ने ओपनएआई, उसके सीईओ और माइक्रोसॉफ्ट पर मुकदमा करते हुए कहा है कि यह कंपनियां अपने उत्पाद के दुष्प्रभावों के लिए जिम्मेदार हैं।
चैटजीपीटी पर लगे विशिष्ट आरोप
मुकदमे में मुख्य रूप से ओपनएआई के जीपीटी-4o मॉडल को निशाना बनाया गया है। परिवार का आरोप है कि यह मॉडल ‘चापलूस’ की तरह व्यवहार करता था। इसका मतलब यह है कि जब स्टीन-एरिक अपने भ्रमपूर्ण विचारों को साझा करता, तो चैटबॉट उनका विरोध करने या सही दिशा दिखाने के बजाय उन विचारों को सही ठहराता और उन्हें और पुष्ट करता गया। आरोप के अनुसार, मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति के साथ बातचीत में बॉट ने उसकी गलत धारणाओं को और अधिक विश्वसनीय और ठोस बना दिया, जिससे उसका भ्रम गहराता गया।
ओपनएआई और एलन मस्क की प्रतिक्रिया
इस घटना पर ओपनएआई ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद दिल तोड़ने वाली है। कंपनी ने बताया कि वह मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है और चैटजीपीटी को इस तरह से प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वह मानसिक या भावनात्मक संकट के संकेतों को पहचान सके और बातचीत को शांत करने में सहायक हो सके।
वहीं, टेक उद्यमी एलन मस्क ने इस घटना पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेहद भयावह बताया। उन्होंने लिखा कि एआई को सुरक्षित बनाने के लिए उसे सच्चाई की खोज करनी चाहिए, न कि भ्रम को बढ़ावा देना चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
यह मामला एआई कंपनियों की जिम्मेदारी और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा पर एक बड़ी कानूनी और नैतिक बहस छेड़ सकता है। खासकर मानसिक स्वास्थ्य पर एआई के प्रभाव को लेकर यह एक मिसाल बन सकता है। इस घटना ने यह सवाल उठा दिया है कि क्या एआई चैटबॉट्स को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि वे मानसिक रूप से कमजोर लोगों को पहचान सकें और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन दे सकें।
- परिवार का मानना है कि ओपनएआई ने अपने उत्पाद के संभावित खतरों को नजरअंदाज किया।
- मुकदमे में यह भी कहा गया है कि चैटजीपीटी ने स्टीन-एरिक को असली दुनिया से अलग कर एक काल्पनिक दुनिया में धकेल दिया।
- विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला एआई नियमन को लेकर सख्त कानून बनाने की मांग को और तेज कर सकता है।