नीट यूजी 2026 पेपर लीक: सीबीआई ने सुलझाई पूरी साजिश, पुणे के प्रोफेसर को बताया मास्टरमाइंड
मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी सफलता हासिल की है। एजेंसी ने दावा किया है कि उसने इस पूरे नेटवर्क की कमान संभालने वाले मुख्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। यह व्यक्ति पुणे में रहने वाला एक प्रोफेसर है, जो कई वर्षों से नीट के प्रश्न पत्र तैयार करने वाली टीमों का हिस्सा रहा है। जांच में सामने आया है कि इस प्रोफेसर ने अपनी गोपनीय पहुंच का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिया, जिससे करीब 23 लाख अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फिर गया।
मास्टरमाइंड की पहचान और गिरफ्तारी
सीबीआई के अनुसार, इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड पी. वी. कुलकर्णी नाम का प्रोफेसर है, जो मूल रूप से लातूर का रहने वाला है। वह केमिस्ट्री विषय का विशेषज्ञ है और लंबे समय से नीट प्रश्न पत्र निर्माण से जुड़े पैनलों में शामिल रहा है। एजेंसी का आरोप है कि कुलकर्णी ने अपने इसी विशेषाधिकार और गोपनीय जानकारी का फायदा उठाकर प्रश्न पत्र लीक किया। शुक्रवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
घर पर चलाई गई विशेष कोचिंग
जांच की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 के आखिरी हफ्ते में कुलकर्णी ने अपने पुणे स्थित घर पर गुप्त कोचिंग क्लासेज आयोजित कीं। इन क्लासों में उसने कुछ चुनिंदा छात्रों को प्रश्न, उनके विकल्प और सही उत्तर शब्दशः लिखवा दिए। सीबीआई का दावा है कि ये वही प्रश्न थे जो 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पूछे गए। इन क्लासों के आयोजन में मनीषा वाघमारे नाम की एक महिला ने अहम भूमिका निभाई, जिसे 14 मई को गिरफ्तार किया गया था। उसने छात्रों को इन क्लासों में शामिल होने के लिए तैयार किया और उनसे लाखों रुपये वसूले। बाद में जब छात्रों की कॉपियों की जांच की गई, तो उनमें लिखे प्रश्न वास्तविक प्रश्न पत्र से पूरी तरह मेल खाते पाए गए।
पेपर लीक का फैला हुआ नेटवर्क
सीबीआई ने पेपर लीक के इस नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगा लिया है। जांच के अनुसार:
- पहला कदम: मनीषा वाघमारे ने लीक प्रश्न पत्र धनंजय लोखंडे को दिया।
- दूसरा कदम: धनंजय लोखंडे ने यह पेपर नासिक के शुभम खैरनार को सौंप दिया।
- तीसरा कदम: शुभम खैरनार ने इसे गुरुग्राम के यश यादव तक पहुंचाया।
- चौथा कदम: यश यादव ने इस लीक पेपर को कई अन्य लोगों में फैलाया।
इसके अलावा, सीबीआई ने जयपुर से मांगिलाल बीवाल, विकास बीवाल और दिनेश बीवाल को भी गिरफ्तार किया है। गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को पकड़ा गया है।
लाखों रुपये में हुआ सौदा
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अप्रैल महीने में शुभम खैरनार ने यश यादव को बताया था कि मांगिलाल बीवाल अपने छोटे बेटे के लिए लीक प्रश्न पत्र खरीदने को तैयार है। इसके लिए 10 से 12 लाख रुपये का सौदा तय हुआ था। सीबीआई का दावा है कि खैरनार ने यश यादव के साथ करीब 500 से 600 प्रश्न साझा किए थे, ताकि अच्छे अंक लाकर मेडिकल कॉलेज में सीट सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों के अनुसार, मांगिलाल बीवाल ने यह पेपर न केवल अपने बेटे को दिया, बल्कि अपने रिश्तेदारों में भी बांट दिया। साथ ही, यश यादव ने विकास बीवाल से कहा था कि वह अन्य छात्रों को भी ये प्रश्न बेचकर पैसे की भरपाई कर ले।
पूरा घटनाक्रम: एक नजर में
- 3 मई 2026: नीट यूजी परीक्षा देशभर में आयोजित हुई।
- परीक्षा से पहले: व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए एक गेस पेपर वायरल हुआ, जिसकी फोटोकॉपी भी कई जगह बांटी गई।
- परीक्षा के दिन: सीकर में कुछ छात्रों ने इस गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई।
- 7 मई: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को अनियमितता की सूचना मिली।
- 8 मई: मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। राजस्थान एसओजी ने एडीजी विशाल बंसल के नेतृत्व में जांच शुरू की।
- 12 मई: एनटीए ने परीक्षा रद्द कर दी।
- मामला सीबीआई को सौंपा गया, जिसने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
- 14 मई: मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे गिरफ्तार हुए।
- जयपुर, गुरुग्राम और नासिक से कई अन्य आरोपी पकड़े गए।
- देशभर में छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।
- 16 मई: सीबीआई ने मास्टरमाइंड पी. वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया।
डिजिटल सबूतों से खुली पोल
सीबीआई ने पिछले 24 घंटों में देशभर में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान एजेंसी ने कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त डिजिटल उपकरणों की प्रारंभिक जांच में कथित चैट, लीक प्रश्न पत्र और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं। अब इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर किया जा सके और साजिश की पूरी तस्वीर सामने लाई जा सके।
परीक्षा का आकार और प्रभाव
बता दें कि नीट यूजी 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। यह परीक्षा देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर कराई गई थी। इसके लिए करीब 23 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था। एनटीए के अनुसार, 7 मई की शाम को उसे कथित गड़बड़ी की जानकारी मिली, जिसके बाद अगले ही दिन मामले को स्वतंत्र जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दिया गया। इस पूरे मामले ने लाखों छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया है, और सीबीआई की जांच जारी है।