भारत में K-कल्चर का बढ़ता प्रभाव: फिल्मों से लेकर खाने तक, हर ओर कोरियन ट्रेंड का बोलबाला
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय युवाओं के बीच कोरियन संस्कृति के प्रति आकर्षण काफी बढ़ा है। किशोरों से लेकर युवा वयस्कों तक, कोरियन ड्रामा, फिल्में, संगीत, फैशन और खान-पान ने अपनी जगह बना ली है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसकी लोकप्रियता के आंकड़े इस बात को साफ करते हैं कि यह सिर्फ एक अस्थायी चलन नहीं, बल्कि एक गहरा सांस्कृतिक बदलाव है।
कोरियन जीवनशैली का गहरा असर
गाजियाबाद में तीन बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले ने इस ट्रेंड के एक गंभीर पहलू को उजागर किया है। जांच में सामने आया कि तीनों बहनों पर कोरियन जीवनशैली का इतना गहरा प्रभाव था कि वे खुद को भारतीय नहीं, बल्कि कोरियन समझने लगी थीं। उन्होंने अपने नाम भी कोरियन लड़कियों जैसे रख लिए थे। रिपोर्ट के अनुसार, वे स्कूल नहीं जाती थीं और घर से कम ही निकलती थीं। अधिकतर समय वे अपने कमरे में मोबाइल पर कोरियन कंटेंट देखने में बिताती थीं। पिता द्वारा मोबाइल छीनने और डांटने के बाद वे कोरियन कंटेंट नहीं देख पा रही थीं, जिससे तनाव और अवसाद में आकर उन्होंने यह कदम उठा लिया।
युवाओं में कोरियन कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता
यह घटना अकेली नहीं है, बल्कि यह भारत के युवाओं में कोरियन संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि का एक चरम उदाहरण है। पिछले कुछ वर्षों में कोरियन ड्रामा, फिल्में, गाने, फैशन और खान-पान का क्रेज जबरदस्त तरीके से बढ़ा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म से लेकर फूड और फैशन कंपनियां इसे एक बड़े बाजार के रूप में देख रही हैं।
कोरोना महामारी के दौरान, जब स्कूल और कॉलेज बंद थे, युवा लंबे समय तक घरों में सीमित रहे। इस दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर के-पॉप, के-ड्रामा और कोरियन गेम्स जैसे कंटेंट की खपत में भारी इजाफा हुआ।
सस्ते इंटरनेट ने बढ़ाया K-पॉप का प्रसार
गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों के अनुसार, 2014 के बाद भारत में 4G इंटरनेट क्रांति ने लोगों को वैश्विक संस्कृति से जोड़ दिया। सस्ते इंटरनेट ने अंतरराष्ट्रीय कंटेंट को हर घर तक पहुंचाया। इसी दौरान कोरियन कंटेंट से जुड़ी ऑनलाइन सर्च में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।
कोरोना लॉकडाउन के दौरान यह ट्रेंड अपने चरम पर पहुंच गया। 2020 में कोरियन वीडियो गेम्स और टीवी सीरीज की खपत पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 78 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई। 2021 तक के-पॉप गाने और के-ड्रामा भारत में ट्रेंड करने लगे और इनसे जुड़ी सर्च में 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कोरियन ड्रामा और फिल्मों की जबरदस्त लोकप्रियता
पिछले पांच वर्षों (2021-2025) के गूगल ट्रेंड के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कोरियन ड्रामा, फिल्में, पॉप सॉन्ग और कोरियन कंटेंट उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म्स के बारे में सर्च सबसे तेजी से बढ़ी। इस दौरान कोरियन बैंड बीटीएस (BTS) के बारे में भी लोगों ने खूब सर्च किया। ‘कोरियन ड्रामा’, ‘के-ड्रामा’ और ‘कोरियन ड्रामा हिंदी’ जैसे की-वर्ड्स गूगल सर्च इंजन पर सबसे ज्यादा बार सर्च हुए।
इस दौरान के-ड्रामा थ्रिलर सीरीज ‘स्क्विड गेम्स’ सर्च में टॉप पर रहा। इस सीरीज को दुनियाभर में जबरदस्त लोकप्रियता मिली और भारत में भी लोगों ने इसे खूब पसंद किया। लॉकडाउन के दौरान इसे सबसे ज्यादा देखा जा रहा था, जबकि 2025 में नया सीजन आने के बाद भारत में भी इसने काफी लोकप्रियता हासिल की। इसके अलावा, टॉप सर्च में “ऑल ऑफ अस आर डेड”, “विनसेंजो” और “मनी हाइस्ट-कोरियन” जैसे कोरियन टीवी सीरीज भी काफी पॉपुलर रहे। लोगों ने कोरियन फिल्मों के हिंदी डबिंग को भी इंटरनेट पर काफी सर्च किया।
फैशन और खाने में भी छाया K-कल्चर
भारत में कोरियन ट्रेंड सिर्फ स्क्रीन तक ही सीमित नहीं रहा। 2023 में हालात सामान्य होने के बाद कोरियन ओवरसाइज टी-शर्ट, बैगी पैंट और लूज फिट कपड़े युवाओं के बीच फैशन स्टेटमेंट बन गए। इस दौरान कोरियन फैशन से जुड़े सर्च में करीब 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। युवाओं ने “कोरियन फिट पैंट्स”, “कोरियन लूज पैंट” और “कोरियन बैगी जींस” के बारे में जमकर सर्च किया।
वहीं, 2020 के बाद से भारत में कोरियन फूड का भी जबरदस्त क्रेज देखने को मिला। 2025 में ‘किमची’, कोरियन रेस्त्रां और बार्बेक्यू डिश ‘सैमग्येओप्सल’ से जुड़ी सर्च अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
कोरियन गेम्स की बढ़ती लोकप्रियता
भारत में कोरियन गेम्स को लेकर भी युवाओं का झुकाव तेजी से बढ़ा है। गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक ‘पॉपी प्लेटाइम’, ‘द बेबी इन येलो’, ‘एविल नन’ और ‘आइसक्रीम मैन’ जैसे गेम्स युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुए। खास बात यह है कि ‘पॉपी प्लेटाइम’ वही गेम था जिसे गाजियाबाद की तीनों बहनें सबसे ज्यादा खेलती थीं। इन गेम्स से जुड़े लाइव स्ट्रीमिंग यूट्यूब चैनलों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है, जो इस ट्रेंड की गहराई को दिखाता है।
एक गंभीर खतरे की ओर इशारा
गाजियाबाद की तीन बहनों की मौत सिर्फ एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है, बल्कि यह डिजिटल युग में युवाओं के सामने खड़े एक बड़े सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती है। किसी भी विदेशी संस्कृति या कंटेंट को पसंद करना गलत नहीं है, लेकिन जब यह लगाव पहचान, मानसिक संतुलन और वास्तविक जीवन से दूरी का कारण बनने लगे, तो खतरा गंभीर हो जाता है।
आज जरूरत इस बात की है कि माता-पिता, स्कूल और समाज मिलकर बच्चों की डिजिटल आदतों पर नजर रखें, उनसे खुलकर संवाद करें और यह समझाएं कि मनोरंजन और जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।