खरमास 2026: मार्च में कब से लग रहा है खरमास? जानें कब से लगेगा विवाह और मांगलिक कार्यों पर रोक

खरमास के दौरान विवाह, यज्ञोपवीत संस्कार, कान छिदवाना, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत और नामकरण जैसे शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में खरमास कब से शुरू हो रहा है और इसकी अवधि कितनी रहेगी।

खरमास 2026 मार्च-अप्रैल

जब सूर्य धनु या मीन राशि में होते हैं, इस अवधि को खरमास कहते हैं। ज्योतिषीय मान्यता है कि इस अवधि में सूर्य का प्रभाव कमजोर होता है, जिससे यह समय शादी-विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ या मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास वर्ष में दो बार आता है। पहली बार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे धनु संक्रांति का समय कहा जाता है। आमतौर पर यह दिसंबर-जनवरी के बीच पड़ता है। दूसरी बार जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जो मार्च-अप्रैल के महीनों में आता है। इस दौरान विवाह, यज्ञोपवीत संस्कार, कान छिदवाना, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत और नामकरण जैसे शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में खरमास कब से शुरू हो रहा है और इसकी अवधि कितनी रहेगी।

मार्च में कब लग रहा है खरमास?

साल 2026 में सूर्य देव 14 मार्च की रात 1 बजकर 8 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस गोचर के साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी। यह अवधि लगभग एक महीने तक रहेगी और 14 अप्रैल 2026 को समाप्त होगी। 14 अप्रैल को सूर्य देव के मेष राशि में प्रवेश करते ही खरमास का समापन हो जाएगा। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों के लिए फिर से शुभ समय शुरू हो जाएगा।

मांगलिक कार्य वर्जित

खरमास के दौरान विवाह और अन्य मांगलिक कार्य करने की अनुमति नहीं होती। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस समय किए गए शुभ कार्यों के सफल होने की संभावना कम मानी जाती है। इसलिए परिवारों में शादी-विवाह, सगाई या अन्य बड़े संस्कारों को इस अवधि के बाद ही करने की सलाह दी जाती है।

खरमास में न करें ये काम

  • इस समय विवाह से जुड़े किसी भी प्रकार के आयोजन नहीं करने चाहिए।
  • नया घर या संपत्ति खरीदना भी शुभ नहीं माना जाता। वाहन खरीदने से भी परहेज करना चाहिए।
  • गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य इस अवधि में नहीं किए जाते।
  • मुंडन संस्कार और नामकरण जैसे पारंपरिक संस्कार भी इस समय टाल दिए जाते हैं।

हालांकि खरमास को पूरी तरह अशुभ नहीं माना जाता। धार्मिक दृष्टि से यह समय पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इस अवधि में सूर्य देव की विशेष पूजा और आराधना करना शुभ फल देने वाला माना जाता है। इसके अलावा अपने पितरों और पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध या तर्पण करना भी पुण्यदायक माना जाता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं है।