ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: चंद्र दोष से मुक्ति के लिए अपनाएं ये 5 कारगर उपाय
ज्येष्ठ पूर्णिमा का दिन ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से चंद्रमा की कृपा प्राप्त करने और उससे जुड़े दोषों को दूर करने के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ सरल उपाय व्यक्ति के मानसिक संतुलन को बेहतर बना सकते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या राहु-केतु का प्रभाव है, उनके लिए यह दिन विशेष लाभकारी साबित हो सकता है।
चंद्रमा की पूजा और व्रत का महत्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर व्रत रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देते समय कच्चे दूध में सफेद फूल और अक्षत (चावल) मिलाकर चंद्र देव को समर्पित करें। ऐसा करने से मन को शांति मिलती है और मानसिक अशांति दूर होती है। साथ ही, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से चंद्र दोष के अशुभ प्रभावों में कमी आती है।
दान और सेवा के लाभ
इस पावन दिन पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। सुबह स्नान के बाद चंद्रमा से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। इनमें दूध, शक्कर, सफेद वस्त्र, खीर, चांदी, मोती और मिश्री जैसी चीजें शामिल हैं। इन वस्तुओं का दान करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। इसके अतिरिक्त, चूंकि चंद्रमा का संबंध माता से माना जाता है, इसलिए इस दिन अपनी मां की सेवा करना और उनका आशीर्वाद लेना बेहद फलदायी होता है। मां का स्नेह और आशीर्वाद मानसिक शांति प्रदान करता है और चंद्रमा के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक होता है।
मंत्र जाप और उपाय
पूजा के बाद मंत्र जाप का विशेष महत्व है। “ॐ सोमाय नमः” या “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः” मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है। इस मंत्र का जाप स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से करने पर अधिक सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, शिव चालीसा, रुद्राष्टक या चंद्र स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। जो लोग चंद्र दोष से ग्रस्त हैं, वे उचित मुहूर्त में चांदी की अंगूठी में मोती धारण कर सकते हैं। इस उपाय से चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और मानसिक समस्याओं से राहत मिलती है।
जीवन में संतुलन और सकारात्मकता
इस प्रकार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और सही विधि से किए गए ये उपाय व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति, संतुलन और सकारात्मकता लाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। यह दिन आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर की शक्तियों को पहचान सकता है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकता है।