जेएनयू में कर्मचारियों के बच्चों के लिए पांच प्रतिशत कोटा लागू, बढ़ेंगी अतिरिक्त सीटें

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने अपने शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों के लिए प्रवेश कोटा बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में इन्हें पांच प्रतिशत का अतिरिक्त आरक्षण मिलेगा। यह कोटा मौजूदा सीटों की संख्या में किसी भी तरह का बदलाव किए बिना, नई सीटें जोड़कर लागू होगा।

कार्यकारी परिषद में प्रस्ताव पारित

यह निर्णय 15 अप्रैल को आयोजित कार्यकारी परिषद की बैठक में लिया गया। इससे पहले जेएनयू में केवल नियमित ग्रुप बी, सी और डी कर्मचारियों के बच्चों के लिए एक प्रतिशत से भी कम का सुपरन्यूमेररी कोटा मौजूद था। नई व्यवस्था के तहत इस कोटे को बढ़ाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है और इसे शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों तक भी विस्तारित किया गया है।

लंबे समय से जेएनयू के कर्मचारी अपने बच्चों के लिए कोटा बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि देश के कई अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पहले से ही कर्मचारियों के बच्चों के लिए पांच से पंद्रह प्रतिशत तक का आरक्षण उपलब्ध है।

मौजूदा सीटों पर नहीं पड़ेगा असर

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह नया कोटा पूरी तरह से अतिरिक्त सीटों पर लागू होगा। इसका मतलब यह है कि पहले से तय सीटों की संख्या में कोई कमी नहीं की जाएगी। एक विश्वविद्यालय अधिकारी के अनुसार, यह पांच प्रतिशत सुपरन्यूमेररी कोटा आगामी शैक्षणिक सत्र से सभी यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में लागू होगा। ये सीटें मौजूदा सीटों से अलग बनाई जाएंगी, जिससे सामान्य प्रवेश प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

सेवाकाल में निधन पर भी मिलेगा लाभ

इस फैसले से पहले सक्षम प्राधिकरण ने मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था। समिति ने विस्तृत चर्चा के बाद सिफारिश की कि जेएनयू के नियमित शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बच्चों को पांच प्रतिशत सुपरन्यूमेररी कोटा दिया जाए। साथ ही, सेवा के दौरान निधन हो चुके कर्मचारियों के बच्चों को भी इस कोटे का लाभ देने की सिफारिश की गई।

समिति की इन सिफारिशों को अकादमिक परिषद के समक्ष रखा गया, जहां उन्हें मंजूरी मिली। इसके बाद कार्यकारी परिषद ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और मौजूदा शैक्षणिक वर्ष से ही पांच प्रतिशत कोटा लागू करने का निर्णय लिया।

प्रवेश प्रक्रिया और पात्रता मानदंड

जेएनयू में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश क्रमशः सीयूईटी-यूजी और सीयूईटी-पीजी के माध्यम से होता है। स्टाफ कोटे के तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को भी निर्धारित न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करना होगा और राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में सफल होना अनिवार्य होगा। एक अधिकारी के अनुसार, इस श्रेणी के सभी उम्मीदवारों का प्रवेश पूरी तरह से निर्धारित पात्रता मानदंड और राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में उनके प्रदर्शन के आधार पर ही होगा।

अन्य विश्वविद्यालयों में भी प्रचलन

देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान पहले से ही अपने कर्मचारियों के बच्चों के लिए इस तरह की व्यवस्था लागू कर चुके हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भी इसी प्रकार के प्रावधान मौजूद हैं। हालांकि, अलग-अलग संस्थानों में इस कोटे का दायरा और प्रतिशत भिन्न हो सकता है।

इस फैसले से जेएनयू के कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, विशेषकर उन परिवारों को जो लंबे समय से इस सुविधा की मांग कर रहे थे। यह कदम न केवल कर्मचारियों के बच्चों को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के मनोबल को भी बढ़ाएगा।