JEE Advanced परीक्षा में बड़े बदलाव: एप्टीट्यूड टेस्ट शामिल, साल में कई बार आयोजन की तैयारी
देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Advanced के स्वरूप में जल्द ही बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। आईआईटी कानपुर के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ समिति परीक्षा में सुधारों का एक नया रोडमैप तैयार कर रही है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, अब परीक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) के साथ-साथ एप्टीट्यूड से जुड़े प्रश्न भी शामिल होंगे। साथ ही, छात्रों को राहत देने के लिए परीक्षा को साल में एक बार के बजाय दो से तीन बार आयोजित करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।
क्या है प्रस्तावित नया पैटर्न?
ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड (JAB) की देखरेख में बनाई गई समिति, जिसकी अध्यक्षता आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल कर रहे हैं, अगले छह महीनों में सुधारों का विस्तृत खाका पेश करेगी। इसके बाद पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों और विश्लेषण के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। नए पैटर्न में एप्टीट्यूड प्रश्नों को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य छात्रों की तार्किक क्षमता, गणितीय कौशल और समस्या सुलझाने की दक्षता को परखना है। इस बदलाव से परीक्षा का कठिन स्तर कुछ हद तक आसान होने की उम्मीद है, क्योंकि अब ध्यान केवल विषयवस्तु पर नहीं, बल्कि क्रिटिकल थिंकिंग और स्किल डेवलपमेंट पर होगा।
साल में कई बार परीक्षा का विकल्प
वर्तमान में JEE Advanced साल में केवल एक बार आयोजित की जाती है, जिससे छात्रों पर अत्यधिक दबाव रहता है। नई योजना में इसे JEE Main की तर्ज पर साल में दो से तीन या चार बार आयोजित करने का प्रस्ताव है। परीक्षा को कई दिनों तक अलग-अलग स्लॉट में कराने की तैयारी है, ताकि छात्र अपनी सुविधानुसार इसमें शामिल हो सकें। इससे न केवल परीक्षा का दबाव कम होगा, बल्कि छात्रों को अपनी तैयारी के अनुसार सबसे अच्छा प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा।
एप्टीट्यूड शामिल होने से PCM प्रश्नों में कमी
मौजूदा परीक्षा में पूरी तरह से PCM विषयों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। एप्टीट्यूड सेक्शन जोड़े जाने के बाद प्रश्नपत्र में PCM के सवालों की संख्या में कमी आएगी। यह बदलाव उन छात्रों के लिए राहत भरा हो सकता है जो लंबे समय से कोचिंग पर निर्भर हैं। इस कदम का उद्देश्य रटने की प्रवृत्ति को कम करना और छात्रों की बौद्धिक क्षमता को अधिक प्राथमिकता देना है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत परीक्षाओं से जुड़े तनाव को कम करने पर जोर दिया गया है। JEE Advanced को लेकर छात्रों में सबसे अधिक तनाव देखा जाता है। आंकड़ों के अनुसार, केवल 19,000 सीटों के लिए लगभग डेढ़ से दो लाख छात्र परीक्षा में शामिल होते हैं। इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण अभिभावक अपने बच्चों को छठी कक्षा से ही कोचिंग सेंटरों में दाखिला करवा देते हैं। स्कूल और कोचिंग की दोहरी पढ़ाई के चलते छात्र मानसिक रूप से बहुत दबाव में आ जाते हैं। कई मामलों में यह तनाव गंभीर रूप ले लेता है, जिससे दुखद घटनाएं भी सामने आती हैं। इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए परीक्षा पैटर्न में सुधार की मांग लंबे समय से उठ रही थी।
- तनाव में कमी: साल में कई बार परीक्षा देने के विकल्प से छात्रों पर एक ही परीक्षा का बोझ कम होगा।
- कोचिंग पर निर्भरता घटेगी: एप्टीट्यूड प्रश्नों के शामिल होने से रट्टा लगाने की बजाय सोचने और समझने की क्षमता पर जोर दिया जाएगा।
- समग्र मूल्यांकन: नया पैटर्न छात्रों की केवल विषयगत जानकारी ही नहीं, बल्कि उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता को भी परखेगा।
विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार किए जा रहे इस रोडमैप के लागू होने से इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की दिशा और दशा दोनों बदलने की उम्मीद है। यह बदलाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों के लिए एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।