JEE Advanced 2026 परिणाम: सोशल मीडिया से दूरी और अनुशासन बने टॉपर्स की सफलता का मंत्र

जेईई एडवांस्ड 2026 के नतीजे घोषित हो चुके हैं। इस वर्ष टॉप करने वाले छात्रों ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर मेहनत, पढ़ाई पर गहरी एकाग्रता और सोशल मीडिया से परहेज को दिया है। इन छात्रों ने समय का सदुपयोग करते हुए अपने लक्ष्य पर अटूट ध्यान बनाए रखा। आइए जानते हैं कि इन मेधावी विद्यार्थियों ने सफलता पाने के लिए कौन सी रणनीति अपनाई।

नेगेटिव खबरों से दूरी और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग

शुभम कुमार ने जेईई एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक प्राप्त कर देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया। उनकी सफलता के पीछे नकारात्मक खबरों से दूरी और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग प्रमुख कारण रहा। वहीं, गुरुग्राम के कबीर छिल्लर ने 329 अंकों के साथ ऑल इंडिया दूसरी रैंक प्राप्त की। दोनों ही छात्रों ने कोटा स्थित एक कोचिंग संस्थान में रहकर परीक्षा की तैयारी की और शानदार प्रदर्शन किया।

रोजाना 8 से 10 घंटे की पढ़ाई और खेल से संतुलन

शुभम कुमार के पिता बिहार के गया में हार्डवेयर का व्यवसाय करते हैं और मां गृहिणी हैं। शुभम ने बताया कि कोटा से जुड़ी नकारात्मक खबरों पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया और अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस बनाए रखा। उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी और मोबाइल का इस्तेमाल केवल माता-पिता और शिक्षकों से बातचीत के लिए करते थे।

शुभम प्रतिदिन लगभग 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे। पढ़ाई के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए वे रविवार को क्रिकेट और बैडमिंटन जैसे अपने पसंदीदा खेल खेलते थे। उनके अनुसार, अनुशासन, मेहनत और ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूरी ने उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाई।

तनाव प्रबंधन और परिवार का सहयोग

तनाव से निपटने के बारे में शुभम ने कहा, “जब मैं तनाव में होता था तो 5-10 मिनट ध्यान करता था। मेरा मानना है कि परिवार के सदस्य, चचेरे भाई-बहन और दोस्त तनाव के क्षणों में बहुत मददगार होते हैं।” उन्होंने कोटा शहर को अपनी सफलता में महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, विशेष अध्ययन सामग्री, अनुभवी शिक्षक और प्रतिस्पर्धी छात्रों का समूह केवल कोटा जैसे शहर में ही संभव है।

शुभम ने आगे कहा, “लक्ष्य हासिल करने के लिए हमारे अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन होनी चाहिए। मैंने हर चुनौती को प्रेरणा में बदल दिया और अपना पूरा ध्यान लक्ष्य पर केंद्रित रखा। अब मैं आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर विज्ञान विभाग से बीटेक करूंगा।” शुभम के पिता ने बताया कि उन्हें अपने बेटे की सफलता की उम्मीद थी, क्योंकि वह लंबे समय से तैयारी कर रहा था और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा।

कबीर छिल्लर: तनाव मुक्त रहकर हासिल की दूसरी रैंक

ऑल इंडिया दूसरी रैंक प्राप्त करने वाले कबीर छिल्लर मात्र एक अंक से प्रथम स्थान से चूक गए। कबीर ने कहा कि उन्होंने कभी भी पढ़ाई या परीक्षा का तनाव नहीं लिया। वे खुद को मानसिक रूप से मजबूत मानते हैं और बताते हैं कि किसी भी विषय को समझने के लिए उन्हें उसे केवल एक बार ध्यान से पढ़ना पड़ता है। परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा।

कबीर ने कहा, “मैं सोशल मीडिया का उपयोग कभी नहीं करता। मेरे पास व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम है, लेकिन केवल शिक्षकों और दोस्तों से विषय पर चर्चा के लिए जुड़ने के लिए।” कबीर के पिता आईआईटी से पढ़े हुए सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और मां एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। उनकी मां ने कहा, “जिस तरह से वह मेहनत करता था, उससे उम्मीद थी कि वह कुछ असाधारण करेगा।”

दोनों टॉपर्स की सफलता से यह स्पष्ट है कि अनुशासन, सोशल मीडिया से दूरी और लक्ष्य पर फोकस ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने साबित कर दिया कि सही रणनीति और कड़ी मेहनत से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।