जैमिसन ली ग्रीर: अमेरिकी व्यापार नीति के पीछे का दिमाग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने पिछले कुछ समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इस नीति के जन्मदाता और मुख्य वास्तुकार हैं जैमिसन ली ग्रीर, जो अमेरिका के 20वें व्यापार प्रतिनिधि हैं। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले ग्रीर आज ट्रंप प्रशासन के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में गिने जाते हैं। उनकी गिनती उन चुनिंदा लोगों में होती है जो बहुत कम बोलते हैं, लेकिन उनकी एक बात दुनिया भर के बाजारों की दिशा बदल सकती है।

बचपन से ही व्यापार में रुचि

ग्रीर का बचपन कैलिफोर्निया की पहाड़ियों में बीता। जब स्कूल की घंटी बजती थी और बाकी बच्चे खेलने के लिए मैदान की ओर भागते थे, तब एक दुबला-पतला लड़का दुनिया का नक्शा फैलाकर बैठ जाता था। उसे देशों की सीमाएं याद करने से ज्यादा यह समझने में मजा आता था कि कौन सा देश क्या उत्पादन करता है और सामान एक जगह से दूसरी जगह क्यों पहुंचता है। एक दिन उसने अपनी मां से पूछा था, ‘अगर खिलौना चीन में बनता है, दुकान अमेरिका में है और खरीदार कोई और है, तो इसका असली मालिक कौन है?’ परिवार ने इसे बचपन की जिज्ञासा समझकर टाल दिया, लेकिन यही सवाल उनकी पेशेवर सोच की नींव बने।

उन्होंने बचपन में ही पड़ोस के बच्चों के साथ मिलकर एक ‘मिनी ट्रेड क्लब’ बना लिया था। इस क्लब में बच्चे आपस में कॉमिक्स, कार्ड और वीडियो गेम की अदला-बदली करते थे। ग्रीर हर लेन-देन के लिए नियम लिखते थे, जैसे ‘खराब स्थिति में मूल्य कम होगा’ और ‘देर से लौटाने पर जुर्माना लगेगा’। यह छोटा सा क्लब आज की विशाल व्यापार नीतियों का प्रारंभिक पाठशाला था।

साधारण परिवार से असाधारण मुकाम तक

जैमिसन ली ग्रीर का जन्म 4 मार्च 1979 को न्यूयॉर्क के अल्बानी शहर में हुआ था। उनका पालन-पोषण उत्तरी कैलिफोर्निया में एक बेहद साधारण परिवार में हुआ। उनके माता-पिता, माइकल और शैनन ग्रीर, परिवार का भरण-पोषण करने के लिए एक साथ कई नौकरियां करते थे। एक समय ऐसा भी आया जब उनका परिवार ‘मोबाइल होम’ यानी पहियों वाले घर में रहता था। चार भाई-बहनों में वह सबसे छोटे थे।

उन्होंने 1998 में कैलिफोर्निया के पैराडाइज हाई स्कूल से पढ़ाई पूरी की। इसके बाद ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी से 2004 में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में स्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होंने पेरिस के प्रतिष्ठित संस्थानों साइंसेज पो और पैंथियन-सोरबोन विश्वविद्यालय से ग्लोबल बिजनेस लॉ में मास्टर्स किया। इसके अलावा, वर्जीनिया विश्वविद्यालय स्कूल ऑफ लॉ से उन्होंने कानून की डिग्री प्राप्त की।

सैन्य सेवा और कानूनी करियर

ग्रीर ने अमेरिकी वायु सेना के जज एडवोकेट जनरल कोर में अधिकारी के रूप में सेवा दी। वह इराक में भी तैनात रहे, जहां उन्होंने ‘चीफ ऑफ मिलिट्री जस्टिस’ के रूप में काम किया। सरकार में शामिल होने से पहले वह प्रतिष्ठित लॉ फर्मों किंग एंड स्पैल्डिंग और स्कैडेन आर्प्स में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों के पार्टनर रहे। इस दौरान उन्होंने चीन के खिलाफ व्यापारिक मुकदमों में अमेरिकी स्टील कंपनियों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने चीन के साथ ‘फेज वन’ व्यापार समझौते और अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

व्यापार से अनोखा नाता

ग्रीर के पूर्वज टेनेसी के एक छोटे से कस्बे से थे, जिसका नाम संयोगवश ‘ट्रेड’ था। वह मजाक में कहते हैं कि शायद नियति ने पहले ही तय कर दिया था कि वह बड़े होकर दुनिया के व्यापार समीकरणों को संभालेंगे। वह सार्वजनिक सुर्खियों से दूर रहना पसंद करते हैं। उनके सहकर्मियों के अनुसार, ग्रीर बेहद कम बोलते हैं, लेकिन जब भी बोलते हैं, तो उनकी टिप्पणियां चर्चा की दिशा बदल देती हैं।

एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड

2025 में जब जैमिसन ली ग्रीर को 20वें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के रूप में चुना गया, तो उन्होंने एक नया रिकॉर्ड बनाया। 2009 के बाद वह पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो ‘मॉर्मन’ समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और अमेरिका के कैबिनेट स्तर के इतने बड़े पद तक पहुंचे हैं। मॉर्मन वे लोग हैं जो ‘द चर्च ऑफ जीसस क्राइस्ट ऑफ लैटर-डे सेंट्स’ नामक ईसाई धार्मिक समूह को मानते हैं। यह समुदाय परिवार को बहुत महत्व देता है। शायद यही कारण है कि ग्रीर अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हैं और अपने अधिकतर संबोधनों में परिवार के त्याग का जिक्र करना नहीं भूलते। उनकी पत्नी का नाम मार्लो ग्रीर है और उनके पांच बच्चे हैं: नोएल, पर्ल, ईव, जेम्सन और सोनोरा।

पढ़ने-लिखने का शौक

ग्रीर को पढ़ने-लिखने का बेहद शौक है। वह इतिहास, भूगोल, विज्ञान, संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय मामलों और शास्त्रीय साहित्य से जुड़ी किताबें पढ़ना पसंद करते हैं। विक्टर ह्यूगो का उपन्यास ‘लेस मिजरेबल’ उनकी पसंदीदा किताबों में से एक है। वह अपना खाली वक्त पुस्तकालय में बिताना पसंद करते हैं। इसके अलावा, वह अक्सर मीडिया संस्थानों के लिए लेख भी लिखते रहते हैं और जीवन के खास पलों को पन्नों पर उतारना नहीं भूलते।

टैरिफ हॉक का तमगा

दूसरे ट्रंप प्रशासन के दौरान चीन पर लगाए जाने वाले बड़े टैरिफ की रणनीति बनाने में ग्रीर को प्रमुख माना जाता है। उन्होंने टैरिफ नीति और व्यापार सुरक्षा से जुड़े कानूनों के तकनीकी पहलुओं पर काम किया। उन्होंने यह तर्क मजबूत किया कि इन कदमों से अमेरिकी विनिर्माण उद्योग को अनुचित विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सकता है। इसी वजह से उन्हें अक्सर ‘टैरिफ हॉक’ यानी कड़े टैरिफ समर्थक भी कहा जाता है। वह अटॉर्नी और पूर्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट ई. लाइटहाइजर को अपना मार्गदर्शक मानते हैं।

हाल ही में, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ पर रोक लगाई, तब भी ग्रीर ने ट्रंप को राष्ट्रपति की अन्य शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए वैश्विक टैरिफ को 15 फीसदी तक बढ़ाने और भारत, चीन व ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ नई व्यापारिक नीति शुरू करने का कड़ा रुख अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दुनिया भर के आर्थिक विश्लेषक उन्हें ट्रंप की टैरिफ रणनीति का ‘शांत वास्तुकार’ कह रहे हैं।