व्हाट्सएप की प्राइवेसी पर उठे सवाल: अमेरिकी मुकदमे के बाद टेक जगत में हलचल
डिजिटल दुनिया में निजता आज सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बन गई है। हम जिन एप्लिकेशन का रोजाना उपयोग करते हैं, वे हमारी आदतों, पसंद और निजी जानकारियों का खजाना अपने पास रखते हैं। यह डेटा कंपनियों को लक्षित विज्ञापन दिखाने में मदद करता है, जिससे उनकी कमाई होती है। लेकिन जब सवाल आपकी निजी बातचीत पर नजर रखने का होता है, तो प्राइवेसी का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसी बीच, दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर गोपनीयता को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसने पूरे टेक उद्योग में बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी अदालत में दायर मुकदमा और टेक लीडर्स का हमला
हाल ही में अमेरिका की एक अदालत में व्हाट्सएप के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि मेटा का यह कहना भ्रामक है कि कोई भी आपकी चैट नहीं पढ़ सकता। मुकदमे के अनुसार, व्हाट्सएप यूजर्स की निजी बातचीत को स्टोर, विश्लेषित और एक्सेस करने में सक्षम है। इस खबर के बाद टेक जगत के दो बड़े नामों ने मेटा पर सीधा हमला बोला है।
स्पेसएक्स और टेस्ला के संस्थापक एलन मस्क ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट रूप से कहा कि व्हाट्सएप सुरक्षित नहीं है और यहां तक कि सिग्नल भी संदेह के घेरे में है। उन्होंने यूजर्स को व्हाट्सएप के बजाय एक्स चैट का उपयोग करने की सलाह दी। मस्क लंबे समय से मेटा की डेटा नीतियों के आलोचक रहे हैं, और इस बार उन्होंने सीधे तौर पर यूजर डेटा की सुरक्षा पर चिंता जताई है।
भारतीय टेक कंपनी जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तर्क दिया कि जब कोई कंपनी अपने राजस्व के लिए विज्ञापनों पर निर्भर करती है, तो उसके लिए यूजर की प्राइवेसी कभी भी सबसे बड़ी प्राथमिकता नहीं हो सकती। वेम्बू के अनुसार, यह हितों का सीधा टकराव है। उन्होंने कहा कि मुनाफे के दबाव और ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए कंपनियां यूजर्स के व्यवहार को ट्रैक करने को मजबूर हैं, ऐसे में प्राइवेसी की उम्मीद करना व्यर्थ है।
व्हाट्सएप पर लगे मुख्य आरोप
सैन फ्रांसिस्को की अदालत में दायर मुकदमे में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हिसलब्लोअर्स ने बताया है कि मेटा के कर्मचारी एक आंतरिक सिस्टम के जरिए किसी भी यूजर के मैसेज को देख सकते हैं। यह दावा व्हाट्सएप के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के दावे को सीधी चुनौती देता है, जिसमें कहा जाता है कि मैसेज सिर्फ भेजने और पाने वाला ही पढ़ सकता है, खुद कंपनी भी नहीं।
प्राइवेसी विवाद का पुराना इतिहास
व्हाट्सएप पर निजता उल्लंघन के आरोप कोई नए नहीं हैं। मेटा (तब फेसबुक) द्वारा 2014 में व्हाट्सएप का अधिग्रहण करने के बाद से यह मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। यहां कुछ प्रमुख घटनाओं का जिक्र जरूरी है:
- डेटा शेयरिंग की शुरुआत (2016): अधिग्रहण के दो साल बाद, व्हाट्सएप ने अपनी पॉलिसी अपडेट की और यूजर्स के फोन नंबर और अन्य मेटाडेटा को फेसबुक के साथ साझा करना शुरू किया। इस कदम ने पहली बार बड़े पैमाने पर प्राइवेसी को लेकर सवाल खड़े किए।
- पेगासस स्पाइवेयर हमला (2019): इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके दुनिया भर के पत्रकारों और कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप अकाउंट हैक किए गए। व्हाट्सएप ने इस मामले में एनएसओ ग्रुप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की थी।
- गूगल के साथ डेटा शेयरिंग के आरोप (2020): गूगल के खिलाफ एक एंटीट्रस्ट मामले में यह आरोप लगा कि व्हाट्सएप ने गूगल को यूजर्स के निजी मैसेज तक पहुंच प्रदान की थी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि यह मैसेज बैकअप से संबंधित था या एन्क्रिप्शन में सेंधमारी से।
- प्राइवेसी पॉलिसी अपडेट विवाद (2021): व्हाट्सएप ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव का ऐलान किया, जिसमें बिजनेस चैट्स का डेटा मेटा के साथ शेयर करने की बात थी। इससे दुनिया भर में यह डर फैल गया कि व्हाट्सएप अब निजी मैसेज भी पढ़ सकेगा। कंपनी ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत चैट्स अभी भी एन्क्रिप्टेड हैं, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था और लाखों यूजर्स ने सिग्नल और टेलीग्राम जैसे विकल्पों की ओर रुख किया था।
मेटा की सफाई और कानूनी लड़ाई
व्हाट्सएप के प्रमुख विल कैथकार्ट ने हालिया आरोपों को पूरी तरह से गलत और काल्पनिक बताया है। कंपनी का कहना है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहता है और एप में साफ लिखा होता है कि चैट में भेजे गए मैसेज केवल संबंधित लोग ही पढ़ सकते हैं। उनका तर्क है कि तकनीकी रूप से कंपनी मैसेज नहीं पढ़ सकती। मेटा ने इस मामले को अदालत में ले जाने वाले वकीलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी है।
यह विवाद एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि डिजिटल युग में प्राइवेसी को लेकर भरोसा कितना नाजुक है। जहां एक तरफ कंपनियां एन्क्रिप्शन और सुरक्षा का दावा करती हैं, वहीं दूसरी तरफ यूजर्स के डेटा के दुरुपयोग के लगातार मामले सामने आते रहते हैं। इस मामले की सुनवाई और उसके नतीजे तय करेंगे कि आने वाले समय में मैसेजिंग एप्स की प्राइवेसी नीतियां किस दिशा में जाएंगी।