गूगल क्रोम चुपके से आपके सिस्टम में डाउनलोड कर रहा है 4GB का AI मॉडल? जानिए पूरा सच
हाल के दिनों में एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने गूगल क्रोम उपयोगकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि यह ब्राउजर उपयोगकर्ताओं को सूचित किए बिना उनके कंप्यूटर में लगभग 4GB का एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल इंस्टॉल कर रहा है। यह मामला न सिर्फ स्टोरेज बल्कि प्राइवेसी और डेटा उपयोग से जुड़े सवाल भी खड़े करता है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
कैसे हुआ इस गुप्त डाउनलोड का खुलासा?
एक सुरक्षा शोधकर्ता ने इस घटना को उजागर किया है। उन्होंने एक मैक कंप्यूटर पर परीक्षण किया और पाया कि क्रोम ने बिना किसी अनुमति के अपने आप एक नया फोल्डर बना लिया। इस फोल्डर का नाम ‘OptGuideOnDeviceModel’ था। हैरानी की बात यह रही कि मात्र 14 मिनट के भीतर ही ब्राउजर ने करीब 4GB की एक फाइल डाउनलोड कर ली। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पृष्ठभूमि में हुई, जिससे उपयोगकर्ता को इसकी भनक तक नहीं लगी।
यह 4GB की फाइल आखिर क्या है और क्यों डाउनलोड हो रही है?
यह फाइल गूगल क्रोम के ‘ऑन-डिवाइस एआई फीचर्स’ से जुड़ी हुई है। इसका मतलब यह है कि ब्राउजर कुछ एआई-आधारित कार्यों को क्लाउड सर्वर पर भेजने के बजाय सीधे आपके कंप्यूटर पर ही करना चाहता है। इससे प्रोसेसिंग तेज हो सकती है और इंटरनेट पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, अभी भी क्रोम के अधिकांश मुख्य एआई फीचर्स सर्वर-साइड पर ही काम करते हैं। ऐसे में यह संभावना है कि यह बड़ी फाइल आपके सिस्टम में अनुपयोगी पड़ी रहे और आप इसका लाभ भी न उठा पाएं।
आपके कंप्यूटर पर कहां मिलेगी यह फाइल?
अगर आप विंडोज 11 ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं, तो यह फाइल निम्नलिखित पथ पर मौजूद हो सकती है:
- %LOCALAPPDATA%GoogleChromeUser DataOptGuideOnDeviceModel
यदि आपके लैपटॉप या डेस्कटॉप में पहले से ही सीमित स्टोरेज है, तो 4GB की यह अतिरिक्त फाइल आपके सिस्टम की गति को प्रभावित कर सकती है और जगह घेर सकती है।
क्या इस फाइल को डिलीट करने से समस्या हल हो जाएगी?
यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि आप केवल इस फोल्डर को डिलीट कर देते हैं, तो समस्या पूरी तरह से खत्म नहीं होगी। क्रोम संभवतः इसे दोबारा डाउनलोड कर सकता है। इससे बचने का एक तरीका यह है कि आप ब्राउजर की एक्सपेरिमेंटल सेटिंग्स में बदलाव करें। इसके लिए:
- क्रोम के एड्रेस बार में ‘chrome://flags’ टाइप करें और एंटर दबाएं।
- सर्च बार में ‘optimization-related on-device AI’ लिखकर खोजें।
- इससे संबंधित विकल्प को ‘Disabled’ यानी बंद कर दें।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से पूरी तरह निजात पाने का एकमात्र निश्चित उपाय क्रोम ब्राउजर को अनइंस्टॉल करना ही हो सकता है।
आम उपयोगकर्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?
इस तरह के गुप्त डाउनलोड के कई नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। सबसे बड़ी समस्या इंटरनेट डेटा की बर्बादी है। अगर दुनिया भर के लाखों-करोड़ों उपयोगकर्ताओं के सिस्टम में यह 4GB की फाइल बिना सूचना के डाउनलोड होती है, तो वैश्विक स्तर पर डेटा की खपत बहुत अधिक होगी। इसका सीधा असर उपयोगकर्ता की जेब और उनके डिवाइस की परफॉर्मेंस पर पड़ता है।
खासकर उन लोगों के लिए यह एक बड़ी समस्या है जो सीमित डेटा प्लान (जैसे 1.5GB या 2GB प्रतिदिन) का उपयोग करते हैं। बिना किसी चेतावनी के होने वाला यह डाउनलोड उनका पूरे दिन का डेटा कोटा कुछ ही मिनटों में खत्म कर सकता है। इसके अलावा, बैकग्राउंड में इतनी बड़ी फाइल डाउनलोड होने से लैपटॉप की बैटरी भी जल्दी खत्म होती है और बिजली की खपत बढ़ती है।
गूगल की ओर से कोई स्पष्टीकरण क्यों नहीं?
इस पूरे मामले पर अब तक गूगल की ओर से कोई आधिकारिक या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कंपनी की इस चुप्पी ने उपयोगकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल पारदर्शिता, उपयोगकर्ता की सहमति और डेटा उपयोग जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। उपयोगकर्ताओं को उम्मीद है कि गूगल जल्द ही इस मामले में स्पष्टता लाएगा और बताएगा कि यह प्रक्रिया क्यों और कैसे काम करती है।