इबोला वायरस: क्या भारत में दस्तक दे चुका है यह खतरनाक संक्रमण?

इबोला वायरस को दुनिया के सबसे घातक संक्रमणों में गिना जाता है। हाल के दिनों में इसने एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत और अफ्रीकी संघ के बीच प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को स्थगित करना पड़ा। ऐसे में आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इबोला ने भारत में प्रवेश कर लिया है?

इबोला के बढ़ते खतरे और भारत की तैयारी

कांगो और युगांडा में शुरू हुआ इबोला का प्रकोप तेजी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित कर दिया है। इस वायरस का प्रभाव अब एशियाई देशों में भी देखा जा रहा है। इसी के मद्देनजर नई दिल्ली में 28 से 31 मई तक आयोजित होने वाले भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन को फिलहाल टाल दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कोई कारण नहीं बताया, लेकिन संकेत दिए कि अफ्रीकी देशों में इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

भारत सरकार ने इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए पहले ही अलर्ट जारी कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में इबोला वायरस से निपटने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

क्या भारत में इबोला के मामले सामने आए हैं?

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में अब तक इबोला संक्रमण का कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि, डब्ल्यूएचओ की चेतावनी के बाद निगरानी और रोकथाम के उपायों को और सख्त कर दिया गया है। एहतियात के तौर पर सभी राज्यों को हर स्तर पर तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • हवाई अड्डों पर निगरानी और स्क्रीनिंग प्रक्रिया को बढ़ा दिया गया है।
  • क्वारंटीन प्रोटोकॉल, मरीजों के प्रबंधन और लैब परीक्षण से जुड़े मानक दिशा-निर्देश सभी राज्यों को पहले ही भेजे जा चुके हैं।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि भारत को ऐसी स्थितियों से निपटने का पूर्व अनुभव है, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है।

भारत में इबोला का पहला और एकमात्र मामला

भारत में कभी भी इबोला वायरस का कोई स्थानीय प्रकोप नहीं हुआ है। साल 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैली महामारी के दौरान एकमात्र मामला 10 नवंबर 2014 को सामने आया था। यह एक 26 वर्षीय भारतीय नागरिक था जो लाइबेरिया से लौटा था। हवाई अड्डे पर स्क्रीनिंग के दौरान उसमें संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उसे तुरंत आइसोलेट कर दिया गया और सफलतापूर्वक इलाज कर ठीक कर लिया गया। उसके बाद देश में इस संक्रमण का कोई अन्य मामला सामने नहीं आया।

मौजूदा खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी नागरिकों से जारी दिशा-निर्देशों और सलाह का पालन करने की अपील की है। इबोला प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया है।

  • बुखार या अन्य लक्षण दिखने पर यात्रियों को हवाई अड्डे पर मौजूद स्वास्थ्य डेस्क पर तुरंत सूचना देनी होगी।
  • भारत आने के बाद 21 दिनों तक अपने स्वास्थ्य की निगरानी करने की सलाह दी गई है।

इबोला का संक्रमण कैसे फैलता है?

इबोला से बचने के लिए यह समझना जरूरी है कि यह वायरस कैसे फैलता है। चिकित्सा रिपोर्टों के अनुसार, यह संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों जैसे रक्त, पसीना, उल्टी या वीर्य के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला का संक्रमण कोविड-19 की तरह हवा के माध्यम से नहीं फैलता। यही कारण है कि इस संक्रमण को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत संभव माना जाता है। अस्पतालों में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और संक्रमित मरीज के परिजन सबसे अधिक जोखिम में होते हैं।

इबोला का सबसे अधिक खतरा किन्हें है?

इबोला वायरस का सबसे बड़ा खतरा उन लोगों को है जो संक्रमित मरीजों के सीधे संपर्क में आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, निम्नलिखित लोगों को सबसे अधिक सावधानी बरतनी चाहिए:

  • स्वास्थ्यकर्मी और अस्पताल का स्टाफ
  • मरीजों की देखभाल करने वाले परिजन
  • संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने वाले लोग

अफ्रीका में हुए कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि अंतिम संस्कार के दौरान भी संक्रमण फैलने के मामले सामने आए हैं। ऐसा शव को छूने की पारंपरिक प्रथाओं के कारण हुआ। विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर आपके घर में कोई व्यक्ति अफ्रीकी देशों की यात्रा करके लौटा है, तो उसके सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए और कम से कम 21 दिनों तक सतर्कता बरतनी चाहिए।