किसान के बेटे से लेकर ‘सिंघम’ आईपीएस और फिर राजनीति तक: के. अन्नामलाई की प्रेरक यात्रा
तमिलनाडु की राजनीति में कुछ नाम अपनी अनूठी यात्रा के लिए जाने जाते हैं, और उनमें से एक हैं पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे अन्नामलाई ने न केवल प्रतिष्ठित आईपीएस सेवा में अपनी पहचान बनाई, बल्कि अपनी निडरता और ईमानदारी के दम पर ‘सिंघम’ जैसी उपाधि भी अर्जित की। आज वे राजनीति के मैदान में एक नई लहर पैदा कर रहे हैं, जहां उनके फैसले और आंदोलन लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।
पुलिस सेवा में ‘सिंघम’ की छवि
साल 2019 की बात है, जब बेंगलुरु के कुमारस्वामी लेआउट पुलिस स्टेशन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें पुलिसकर्मी एक महिला के साथ दुर्व्यवहार करते नजर आ रहे थे। आमतौर पर ऐसे मामले जांच के बाद दब जाते हैं, लेकिन इस बार मामला उस थाने के प्रभारी एक युवा आईपीएस अधिकारी के हाथों में था, जो अपनी सख्त और निष्पक्ष छवि के लिए जाने जाते थे। उन्होंने मामले की गहराई से जांच की और फिर एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने उस थाने के कुल 78 पुलिसकर्मियों में से 71 का तुरंत तबादला कर दिया। यह कार्रवाई इतनी साहसिक थी कि जनता ने उन्हें ‘सिंघम’ कहना शुरू कर दिया। यह अधिकारी कोई और नहीं बल्कि के. अन्नामलाई थे।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
के. अन्नामलाई का जन्म तमिलनाडु के एक गांव में एक किसान परिवार में हुआ। उनका पूरा नाम कुप्पुसामी अन्नामलाई है। उनकी शिक्षा-दीक्षा बेहद प्रभावशाली रही है। उन्होंने पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और उसके बाद आईआईएम लखनऊ से एमबीए किया। साल 2011 में उन्होंने यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास कर आईपीएस अधिकारी बनने का सपना साकार किया।
नौकरी छोड़ने का फैसला और राजनीति में प्रवेश
पुलिस सेवा में रहते हुए 2018 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी के निधन की घटना ने अन्नामलाई के जीवन को गहराई से प्रभावित किया। इस घटना ने उन्हें जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने 2019 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर पुलिस की नौकरी छोड़ दी। शुरुआत में वे अभिनेता रजनीकांत के साथ राजनीति में आना चाहते थे, लेकिन बाद में वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। उनकी मेहनत और संगठन क्षमता के दम पर उन्हें 2021 से 2025 तक तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।
गांव की माटी से लगाव और सामाजिक कार्य
राजनीति में आने से पहले अन्नामलाई का सपना अपने गांव लौटकर जैविक खेती करना था। इसी उद्देश्य से उन्होंने 2020 में ‘वी द लीडर्स फाउंडेशन’ नामक एक गैर-सरकारी संगठन की स्थापना की। इस संस्था का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण विकास, जैविक खेती को बढ़ावा देना और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। बाद में बड़े पैमाने पर समाज सेवा की इच्छा ने ही उन्हें राजनीति में कदम रखने के लिए प्रेरित किया। यहां तक कि राजनीति में सक्रिय रहते हुए भी उन्होंने 2024 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठित चेविनिंग गुरुकुल फेलोशिप में भाग लिया, जो उनकी सीखने की निरंतर इच्छा को दर्शाता है।
साहित्य, संस्कृति और फिल्मों में रुचि
अन्नामलाई एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्हें इतिहास, अध्यात्म, राजनीति और अर्थशास्त्र पर गंभीर किताबें पढ़ने का शौक है। वे अक्सर अपने भाषणों में तमिल क्लासिक ‘तिरुक्कुरल’ का संदर्भ देते हैं। प्रकृति से उनका गहरा लगाव है और उन्हें ट्रैकिंग पसंद है। वे तमिलनाडु के पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू और लोक कलाओं के प्रति भी उत्साही हैं। इसके अलावा, उन्होंने 2024 में कन्नड़ फिल्म ‘अरब्बी’ में एक स्विमिंग कोच की भूमिका निभाकर अपने अभिनय कौशल का भी प्रदर्शन किया।
राजनीतिक रणनीति और नया आंदोलन
हाल ही में अन्नामलाई ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसका कारण चुनावी रणनीति को लेकर मतभेद बताए गए। उन्होंने तमिलनाडु में ‘अन्नामलाई मक्कल इयक्कम’ (अन्नामलाई जन आंदोलन) नाम से एक नया जन आंदोलन शुरू किया है, जिससे अब तक लगभग 14 लाख लोग जुड़ चुके हैं। उनकी राजनीति का मुख्य आधार वंशवाद और व्यक्तिपूजा का विरोध रहा है, जो युवाओं को खासा आकर्षित करता है। उनकी आक्रामक शैली के कारण स्थानीय मीडिया उन्हें ‘उग्रम’ भी कहती है।
चुनावी प्रदर्शन और लोकप्रियता
हालांकि अन्नामलाई 2024 के लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर सीट से हार गए थे, लेकिन उन्हें लगभग 4.4 लाख वोट मिले थे। उनका वोट शेयर 30 प्रतिशत से अधिक रहा, जो जनता के बीच उनकी बढ़ती लोकप्रियता का स्पष्ट संकेत है। इस प्रदर्शन के बाद भाजपा ने कोयंबटूर की कई विधानसभा सीटों को भविष्य में जीतने की संभावना वाली सीटों के रूप में चिन्हित किया था।
अन्नामलाई ने अपनी किताब ‘स्टेपिंग बियॉन्ड खाकी: रिवेलेशंस ऑफ ए रियल-लाइफ सिंघम’ में अपने पुलिस जीवन के अनुभवों, अपनी गलतियों और उनसे मिली सीखों को ईमानदारी से साझा किया है। उनकी यह यात्रा एक साधारण किसान के बेटे से लेकर एक निडर आईपीएस अधिकारी और फिर एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता बनने तक की है, जो कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।