चीनी वैज्ञानिकों की नई खोज: 20 सेकंड में पानी को बर्फ में बदलने वाली क्रांतिकारी कूलिंग तकनीक

चीन के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तरल शीतलन तकनीक विकसित करने का दावा किया है जो कमरे के तापमान को मात्र 20 सेकंड में शून्य से नीचे ला सकती है। यह तकनीक खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटरों में उत्पन्न होने वाली अत्यधिक गर्मी की समस्या के समाधान के रूप में उभर रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह खोज थर्मल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता है और डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत को काफी हद तक कम कर सकती है।

कैसे काम करता है यह जादुई तरल?

इस तकनीक के पीछे का सिद्धांत पानी में घुले एक विशेष नमक, अमोनियम थायोसाइनेट के असामान्य व्यवहार पर आधारित है। शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को ‘गीले स्पंज को निचोड़ने’ जैसा बताया है। जब इस घोल पर दबाव डाला जाता है और फिर अचानक दबाव छोड़ा जाता है, तो नमक तेजी से पुनः घुलने लगता है और अपने आसपास की भारी मात्रा में गर्मी को सोख लेता है। यह प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि तापमान कुछ ही सेकंड में भारी गिरावट दर्ज करता है।

प्रयोगशाला में मिले चौंकाने वाले नतीजे

प्रयोगों के दौरान यह पाया गया कि सामान्य कमरे के तापमान पर यह घोल मात्र 20 सेकंड में लगभग 30 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हो गया। वहीं, जब इसे अत्यधिक गर्म वातावरण में रखा गया, तो तापमान में 50 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक की गिरावट देखी गई। यह प्रदर्शन मौजूदा समय में उपयोग होने वाले पारंपरिक शीतलन प्रणालियों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी है। यह शोध 22 जनवरी को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर’ में प्रकाशित हुआ था।

AI डेटा सेंटरों के लिए क्यों है यह जरूरी?

अमेरिका और चीन के बीच चल रही AI प्रतिस्पर्धा के कारण दुनिया भर में डेटा सेंटरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ये डेटा सेंटर भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं और अत्यधिक गर्मी पैदा करते हैं। साल 2024 में अकेले अमेरिका की वाणिज्यिक बिजली खपत में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका एक बड़ा कारण डेटा सेंटर थे। OpenAI के प्रमुख सैम ऑल्टमैन भी मान चुके हैं कि AI सिस्टम को संचालित करने के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा और कुशल शीतलन प्रणाली की आवश्यकता होती है।

चीन, जिसके पास अमेरिका से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता है, अब ऊर्जा-कुशल डेटा सेंटरों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने पारंपरिक ‘बारोकैलोरिक इफेक्ट’ को आगे बढ़ाते हुए इसे तरल रूप में लागू किया है। उन्होंने इस नई प्रक्रिया को “डिसॉल्यूशन पर आधारित बारोकैलोरिक इफेक्ट” नाम दिया है।

चार चरणों वाली कूलिंग साइकिल

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक के आधार पर एक चार-चरणीय शीतलन चक्र तैयार किया है:

  • दबाव डालना: तरल घोल पर दबाव डाला जाता है।
  • गर्मी निष्कासन: इस दबाव के कारण उत्पन्न गर्मी को बाहर निकाल दिया जाता है।
  • तेजी से ठंडा करना: दबाव को अचानक छोड़ा जाता है, जिससे तरल तेजी से ठंडा हो जाता है।
  • गर्मी सोखना: इस ठंडे तरल का उपयोग मशीनों की गर्मी को सोखने के लिए किया जाता है।

एक चक्र में, प्रति ग्राम यह तरल लगभग 67 जूल गर्मी सोख सकता है। इसकी सैद्धांतिक दक्षता 77 प्रतिशत तक आंकी गई है, जो सामान्य रेफ्रिजरेटर की तुलना में काफी बेहतर है।

बिजली की बचत और पर्यावरणीय लाभ

चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, डेटा सेंटरों की कुल बिजली खपत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा केवल शीतलन प्रणाली में खर्च होता है। ऐसे में यह नई खोज न केवल भारी मात्रा में बिजली बचा सकती है, बल्कि पर्यावरण के लिए हानिकारक गैसों के उपयोग को भी समाप्त कर सकती है। यह तकनीक AI बुनियादी ढांचे के लिए एक स्थायी और किफायती समाधान प्रदान कर सकती है, जिससे भविष्य में डेटा सेंटरों का संचालन अधिक कुशल और पर्यावरण-अनुकूल हो सकेगा।