मानसून में महिलाओं के लिए बढ़ जाते हैं ये संक्रमण, रहें सावधान

बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही कई स्वास्थ्य समस्याओं को भी न्योता देता है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह समय अतिरिक्त सावधानी बरतने का होता है। मानसून में बढ़ती नमी, गीले कपड़े, पसीना और बैक्टीरिया-फंगस की तेजी से बढ़ती संख्या कई तरह के संक्रमणों का खतरा पैदा कर देती है।

इस मौसम में महिलाओं में त्वचा संबंधी समस्याओं से लेकर प्राइवेट पार्ट से जुड़ी परेशानियां अधिक देखने को मिलती हैं। कई बार छोटी सी लापरवाही गंभीर संक्रमण का रूप ले सकती है। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं इस मौसम में अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता, खानपान और रोजमर्रा की आदतों पर विशेष ध्यान दें। आइए जानते हैं कि मानसून में महिलाओं को कौन-कौन से संक्रमण सबसे ज्यादा परेशान कर सकते हैं और उनसे बचाव के क्या उपाय हैं।

1. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)

मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी और बैक्टीरिया की सक्रियता महिलाओं में मूत्र मार्ग के संक्रमण का खतरा काफी बढ़ा देती है। यह संक्रमण मूत्राशय, मूत्रमार्ग या किडनी को प्रभावित कर सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में पेशाब के दौरान जलन, बार-बार पेशाब आने की इच्छा, पेट के निचले हिस्से में दर्द और कभी-कभी बुखार शामिल हैं। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

बचाव के तरीके:

  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • पेशाब को लंबे समय तक रोककर न रखें।
  • शौचालय का उपयोग करने के बाद सफाई का विशेष ध्यान रखें।
  • गीले कपड़े या अंडरगारमेंट्स को तुरंत बदलें।
  • हमेशा सूती और आरामदायक अंडरगारमेंट्स पहनें।

2. यीस्ट इंफेक्शन

बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से फंगस तेजी से पनपता है, जिससे महिलाओं में यीस्ट संक्रमण की समस्या बढ़ सकती है। इससे प्राइवेट पार्ट में खुजली, जलन, लालिमा और सफेद डिस्चार्ज की शिकायत हो सकती है। टाइट कपड़े पहनना और लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना इसका बड़ा कारण बनता है।

बचाव के तरीके:

  • ढीले और सूती कपड़े पहनने की आदत डालें।
  • गीले कपड़ों में लंबे समय तक न रहें।
  • निजी अंगों की स्वच्छता बनाए रखें।
  • जरूरत से ज्यादा सुगंधित उत्पादों का इस्तेमाल न करें।
  • पसीना आने पर तुरंत कपड़े बदल लें।

3. फंगल त्वचा संक्रमण

मानसून में त्वचा पर लंबे समय तक नमी बनी रहने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दाद, खुजली, लाल चकत्ते और रैशेज इसके आम लक्षण हैं। यह समस्या गर्दन, बगल, कमर और त्वचा की सिलवटों वाले हिस्सों में अधिक देखने को मिलती है।

बचाव के तरीके:

  • त्वचा को हमेशा सूखा और साफ रखें।
  • नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह से पोंछें।
  • दूसरों के तौलिये या कपड़ों का इस्तेमाल न करें।
  • पसीना आने पर कपड़े बदल लें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी क्रीम न लगाएं।

4. बैक्टीरियल वेजिनोसिस

यह संक्रमण तब होता है जब प्राइवेट पार्ट में मौजूद अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके कारण दुर्गंध, असामान्य डिस्चार्ज और असहजता महसूस हो सकती है। मानसून में बढ़ी नमी इस समस्या के जोखिम को और बढ़ा सकती है।

बचाव के तरीके:

  • निजी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
  • अनावश्यक रसायन युक्त उत्पादों से बचें।
  • साफ और सूती अंडरगारमेंट्स ही पहनें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।