भारत में AI नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 31% तक पहुंची
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में एआई से जुड़ी नई नौकरियों में 31 प्रतिशत पदों पर महिलाएं कार्यरत हैं। यह आंकड़ा पिछले साल के 26 प्रतिशत से पांच प्रतिशत अधिक है, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।
हालांकि कुछ वैश्विक शोधों में यह आशंका जताई गई थी कि एआई के आने से महिलाओं की नौकरियों पर सबसे अधिक खतरा होगा, लेकिन भारतीय भर्ती कंपनियों के आंकड़े इसके विपरीत तस्वीर पेश कर रहे हैं। टैलेंट प्लेटफॉर्म इंस्टाहायर के अनुसार, देश में एआई और भविष्य की तकनीकों में पैदा होने वाले हर 100 में से 31 पद महिलाओं को दिए जा रहे हैं।
महिलाएं संभाल रही हैं चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं
यह केवल प्रवेश स्तर की नौकरियों तक सीमित नहीं है। महिलाएं अब डेटा एनालिटिक्स, डिजाइन इंजीनियरिंग, अनुसंधान एवं विकास, उत्पाद प्रबंधन और गुणवत्ता आश्वासन जैसे उच्च कौशल वाले क्षेत्रों में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं। यह दर्शाता है कि महिलाएं सिर्फ सहायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि तकनीकी रूप से जटिल कार्यों में भी अपनी दक्षता साबित कर रही हैं।
कैंपस प्लेसमेंट ने बदली तस्वीर
भारतीय टेक वर्कफोर्स में महिलाओं की कुल भागीदारी लगभग 36 प्रतिशत है। प्रवेश स्तर की नौकरियों में यह आंकड़ा 35 प्रतिशत के करीब है। इस बदलाव का सबसे बड़ा श्रेय इंजीनियरिंग कॉलेजों में होने वाली कैंपस प्लेसमेंट को जाता है। कंपनियां अब लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना प्रतिभा को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे महिलाओं के लिए तकनीकी क्षेत्र में प्रवेश आसान हो रहा है।
नेतृत्व स्तर पर अब भी कम भागीदारी
हालांकि करियर की शुरुआत में महिलाएं मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन नेतृत्व स्तर पर पहुंचते-पहुंचते यह संख्या काफी कम हो जाती है। आंकड़ों के अनुसार, प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 23 प्रतिशत है, जबकि शीर्ष कार्यकारी पदों पर यह घटकर लगभग 17 प्रतिशत रह जाती है। यह स्थिति बताती है कि भले ही शुरुआत में महिलाएं अच्छी संख्या में आ रही हैं, लेकिन उन्हें ऊपरी पदों पर पहुंचने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
टेक इंडस्ट्री में ‘प्रोग्रेशन गैप’ बरकरार
इंस्टाहायर के चीफ बिजनेस ऑफिसर सर्बोजीत मल्लिक के अनुसार, टेक इंडस्ट्री में एक स्पष्ट संरचनात्मक अंतर अभी भी मौजूद है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में आने वाले लगभग हर तीन में से एक पेशेवर महिला होती है, लेकिन चार में से एक से भी कम महिलाएं नेतृत्व स्तर तक पहुंच पाती हैं। यह आंकड़ा बताता है कि भारत की टेक टैलेंट पाइपलाइन में महिलाओं के लिए आगे बढ़ने की चुनौती अब भी बनी हुई है। कंपनियों को इस अंतर को पाटने के लिए अधिक समावेशी नीतियों और मेंटरशिप कार्यक्रमों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।