अंतरिक्ष मलबे से सैटेलाइट्स को बचाएगी भारतीय तकनीक, सिंगापुर के साथ हुआ समझौता
भारत का अंतरिक्ष स्टार्टअप ‘दिगंतरा इंडस्ट्रीज’ अब अंतरिक्ष में मौजूद खतरनाक मलबे से सैटेलाइट्स की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम उठाने जा रहा है। बेंगलुरु स्थित इस कंपनी ने सिंगापुर की रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी एजेंसी (DSTA) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते के तहत, दिगंतरा सिंगापुर के राष्ट्रीय उपग्रहों को अंतरिक्ष में तैरते मलबे से होने वाली टक्करों से बचाने के लिए एक विशेष तकनीक विकसित करेगी। यह पहली बार है जब सिंगापुर की कोई रक्षा इकाई किसी भारतीय स्पेस-टेक कंपनी के साथ साझेदारी कर रही है, जो भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कौशल को दर्शाता है।
क्या है यह तकनीक और क्यों है जरूरी?
आज के समय में अंतरिक्ष में हजारों पुराने उपग्रहों के टुकड़े और मलबा बिखरा हुआ है। ये छोटे-छोटे टुकड़े भी किसी सक्रिय सैटेलाइट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए दिगंतरा और सिंगापुर की DSTA मिलकर ‘स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस’ (SSA) टूल्स विकसित करेंगे। यह तकनीक एक उन्नत रडार की तरह काम करेगी, जो अंतरिक्ष में मलबे की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी संभावित टक्कर से पहले ही चेतावनी जारी कर देगी। इसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती भीड़भाड़ वाली कक्षाओं में उपग्रहों की सुरक्षा और उनकी कार्यक्षमता को लंबे समय तक बनाए रखना है।
AI और सेंसर तकनीक का सम्मिलन
इस परियोजना में डेटा विश्लेषण को और अधिक सटीक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक निम्नलिखित पहलुओं पर काम करेगी:
- फ्लाइट डायनेमिक्स: सैटेलाइट के मार्ग में आने वाले संभावित खतरों की पहचान करना।
- सेंसर डेटा: अंतरिक्ष और जमीन पर लगे सेंसरों के माध्यम से मलबे की लगातार ट्रैकिंग करना।
- असेंबली और टेस्टिंग: सिंगापुर के विशेषज्ञ दिगंतरा के साथ मिलकर इन सेंसरों की जांच और फिटिंग में सहयोग करेंगे।
यह साझेदारी सिर्फ सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दिगंतरा के आगामी अंतरिक्ष-आधारित सेंसर मिशनों में असेंबली, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग प्रक्रिया में सिंगापुर सरकार की भागीदारी भी शामिल है।
सिंगापुर को मिलेगा पूर्ण नियंत्रण
दिगंतरा के सीईओ अनिरुद्ध शर्मा के अनुसार, इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता ‘सॉवरेन कंट्रोल’ है। इसका मतलब है कि दिगंतरा जो भी सॉफ्टवेयर या उपकरण विकसित करेगी, उस पर सिंगापुर सरकार का पूर्ण अधिकार होगा। वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इसे स्थानीय स्तर पर संचालित और अनुकूलित कर सकेंगे। यह सुविधा सिंगापुर को अपने राष्ट्रीय उपग्रहों की सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र और सशक्त प्रणाली प्रदान करेगी।
एशिया-पैसिफिक बाजार में विस्तार की संभावना
दिगंतरा इस साझेदारी को एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में अपने विस्तार के लिए एक बड़ा अवसर मान रही है। कंपनी का मानना है कि सिंगापुर के माध्यम से दक्षिण कोरिया, मलेशिया, थाईलैंड जैसे अन्य एशियाई देशों में प्रवेश का रास्ता खुलेगा। कंपनी के अनुसार, अंतरिक्ष और जमीन-आधारित संवेदन बुनियादी ढांचे में दिगंतरा की विशेषज्ञता के जरिए ऐसे सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन तैयार किए जाएंगे, जो उपग्रह ट्रैकिंग को अधिक सटीक और प्रभावी बनाएंगे। यह साझेदारी न केवल भारतीय अंतरिक्ष तकनीक के लिए एक नई पहचान बनेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष सुरक्षा के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।