भारतीय सेना का डुअल-यूज एआई: सीमा सुरक्षा और स्मार्ट सिटी दोनों में कारगर

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। हाल ही में संपन्न इंडिया एआई समिट में भारतीय सेना ने अपने स्वदेशी डुअल-यूज एआई टूल्स का प्रदर्शन किया। ये समाधान न सिर्फ सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करेंगे, बल्कि स्मार्ट शहरों में नागरिकों की रक्षा और आपदा प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाएंगे। यह पहल तकनीकी आत्मनिर्भरता और डेटा संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

प्राक्षेपण: आपदा की पूर्व चेतावनी देने वाली दुनिया की पहली प्रणाली

सेना द्वारा विकसित ‘प्राक्षेपण’ एक हाइब्रिड सिस्टम है, जो भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का एक सप्ताह पहले ही सटीक पूर्वानुमान लगा सकता है। यह तकनीक सीमा पर तैनात जवानों की सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों को समय रहते सचेत करके जीवन बचाने में मददगार साबित होगी। यह आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर साबित होने की क्षमता रखती है।

एकम: इंटरनेट के बिना काम करने वाला सुरक्षित एआई प्लेटफॉर्म

डेटा चोरी और साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए सेना ने ‘एकम’ प्लेटफॉर्म तैयार किया है। यह एक एयर-गैप्ड सेवा है, जो बिना इंटरनेट कनेक्शन के काम करती है। यह प्लेटफॉर्म गोपनीय दस्तावेजों का अनुवाद और सारांश तैयार करने में सक्षम है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि संवेदनशील जानकारी देश की सीमाओं के बाहर नहीं जा सकती, जिससे डेटा संप्रभुता सुनिश्चित होती है।

सैम-यूएन: सैटेलाइट डेटा से युद्ध क्षेत्र और स्मार्ट सिटी का विश्लेषण

‘सैम-यूएन’ एक ऐसा मॉड्यूल है जो सैटेलाइट डेटा का गहन विश्लेषण कर युद्ध के मैदान की सटीक स्थिति बता सकता है। यह सिस्टम सिर्फ सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग स्मार्ट सिटी के कंट्रोल रूम, ट्रैफिक प्रबंधन और शहरी नियोजन में भी किया जा सकता है। यह डुअल-यूज तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण है।

एक्सफेस: डीपफेक और साइबर खतरों से निपटने की तकनीक

डीपफेक वीडियो और फर्जी चेहरों की पहचान करना आज के डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए सेना ने ‘एक्सफेस’ तकनीक विकसित की है। यह नकली वीडियो और चेहरों को पकड़ने में माहिर है। इसके अलावा, सेना का अपना फायरवॉल डिजिटल बुनियादी ढांचे को हैकर्स और साइबर हमलों से सुरक्षित रखेगा।

नभ दृष्टि: फील्ड ऑपरेशन में रियल-टाइम निगरानी

‘नभ दृष्टि’ और ‘एआई इन अ बॉक्स’ जैसी डिवाइस सेना के लॉजिस्टिक्स को और मजबूत बनाती हैं। ये उपकरण युद्ध क्षेत्र में वाहनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग और ड्राइवरों की थकान का पता लगाने में सक्षम हैं। इससे न केवल सैन्य अभियानों की दक्षता बढ़ेगी, बल्कि दुर्घटनाओं को भी कम किया जा सकेगा।

भारतीय सेना द्वारा विकसित ये सभी एआई मॉडल रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय डिजिटल ढांचे, आपदा प्रबंधन और साइबर सुरक्षा में भी योगदान देंगे। यह स्पष्ट संकेत है कि सेना अब पूरी तरह से नेटवर्क-आधारित, डेटा-संचालित और एआई-समर्थित भविष्य की ओर बढ़ रही है।