भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात: स्मार्टफोन ने रचा इतिहास, 32% की छलांग

भारत अब केवल तकनीकी उपकरणों का उपभोक्ता नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख निर्माता और निर्यातक के रूप में उभर रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में देश के इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर निर्यात ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर निर्यात संवर्धन परिषद (ईएससी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 32.47 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ 38.58 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 29.12 अरब डॉलर था। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत तेजी से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक अहम केंद्र बनता जा रहा है।

स्मार्टफोन: निर्यात वृद्धि का मुख्य चालक

इस शानदार उपलब्धि में सबसे बड़ा योगदान स्मार्टफोन और दूरसंचार उपकरणों का रहा है। आंकड़े बताते हैं कि स्मार्टफोन निर्यात में अभूतपूर्व उछाल आया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जहां यह 15.57 अरब डॉलर था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 24.14 अरब डॉलर हो गया। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत से निर्यात होने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक सामानों में स्मार्टफोन का हिस्सा सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बन चुका है। सरकार की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और वैश्विक कंपनियों का बढ़ता भरोसा इस सफलता के पीछे प्रमुख कारण हैं।

किन देशों में है ‘मेड इन इंडिया’ स्मार्टफोन की सबसे अधिक मांग?

भारत में निर्मित स्मार्टफोन की मांग दुनिया के कई बड़े बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। इस निर्यात सूची में सबसे आगे हैं:

  • अमेरिका: भारतीय स्मार्टफोन का सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका है, जिसकी कुल निर्यात में 44 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
  • संयुक्त अरब अमीरात (यूएई): 11 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ यूएई दूसरा सबसे बड़ा बाजार है।
  • नीदरलैंड: 9 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ नीदरलैंड तीसरे स्थान पर है।
  • यूनाइटेड किंगडम और इटली: क्रमशः 6 प्रतिशत और 5 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ ये देश भी प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं।

क्षेत्रवार बाजार: उत्तरी अमेरिका और यूरोप सबसे आगे

यदि संपूर्ण क्षेत्रों की बात करें, तो उत्तरी अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार बनकर उभरा है। इस क्षेत्र में भारत ने 14.70 अरब डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद भेजे हैं। इसके बाद यूरोप का स्थान है, जहां 11.45 अरब डॉलर के उत्पाद निर्यात किए गए। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भारत न केवल अपने घरेलू बाजार के लिए, बल्कि दुनिया की दिग्गज अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी एक विश्वसनीय और प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। यह वृद्धि भारत के तकनीकी क्षेत्र के भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।